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Thursday, 13 October 2016

परिचर्चा:देव और ईश्वर में क्या अन्तर है?

परिचर्चा:   आप हमारी इस धार्मिक एवं तार्किक परिचर्चा में भाग ले सकते हैं। अपने विचार प्रस्तुत करें।
हम आपके विचार इसी ब्लाक में प्रकाशित करेंगे।
अपना नाम व स्थान अवश्य लिखें
धन्यवाद

An Orange a day may keep stroke away


Nutrition may have a role to play in the pathogenesis of stroke, according to neurologists from the Prince of Wales Hospital in Sydney.
The doctors reported a case of ischaemic stroke in a 34- year old man with severe vitamin C deficiency caused by poor nutrition. The patient, who had recently been diagnosed with type 2 diabetes, had no history of hypertension or hypercholesterolaemia and no family history of stroke. Coagulation and lipid profiles were normal and the patient tested negative for underlying thrombophilia, vasculitides and Fabry disease. Tests showed the patient had normal carotid and vertebral arteries and a structurally normal heart without a source of embolus.
However the patient had poor dentition, with calculus deposition, scorbutic gums and gingival inflammation, and reported easy bruising in recent months. Suspecting a diagnosis of scurvy, the doctors discovered that his diet consisted mainly of fast food, with negligible vegetable and fruit intake. Laboratory testing confirmed the presence of severe vitamin C deficiency (< 5 μmol/L; reference range, 40–100 μmol/L). “We hypothesise that an unhealthy diet resulted in deficiencies in antioxidants and this contributed to stroke pathogenesis, the authors wrote in a letter to the MJA.
The marked prematurity of disease onset may have resulted from effect modification of antioxidant deficiency on conventional atherosclerotic risk factors such as diabetes, they added. It is unlikely that a direct causal link will ever be established but since malnutrition and unhealthy eating practices continue to be a serious public health problem, the doctors suggest attention to nutritional status should be incorporated into the new standard of stroke care.

Wednesday, 12 October 2016

50% Indians have no idea that diabetes is linked with heart disease

50% Diabetics in the Country are Prone to Develop Heart Disease: Study.

A study conducted to map people’s perceptions along with behaviour-related outcomes of diabetes management, revealed that a whopping 50% of diabetics in the country are at risk of developing heart diseases, 63% are at risk of getting microvascular complications and many have an enhanced risk of developing eye problems, especially retinopathy. The study brings to light poor diabetes management amongst Indians which it links to ignorance and to the prevalence of myths. This study conducted at 2014.

The unique Diabetes Myths & Truths Highlighter (Lifespan D-MYTH 2014) study, conducted by LIFESPAN, a thought leader in the management of diabetes and cardiometabolic disorders, made several disconcerting revelations regarding people’s perceptions about the disease, their practices and its effects in terms of mortality and morbidity. The Lifespan D-MYTH 2014 study was conducted among 5065 Indians in 16 cities on a one-to-one basis, and the data collected was compared with cumulative data from 10,074 patients who visited Lifespan and took Lifespan’s R.I.S.C.TM test.

Establishing a direct correlation between ignorance, poor diabetes management and high morbidity and mortality, Lifespan introduced the unique US FDA cleared R.I.S.C.TM Test in India which showed that 80% of diabetics in the country have higher cardiometabolic scores (used to predict heart disease risk), a whopping 50% are ignorant about the fact that diabetes could lead to heart disease.

The study conducted by Lifespan also revealed that while 63% diabetics in India are at risk of developing microvascular complications, which may in turn lead to eye problems, while 36% Indians are completely unaware that diabetes is even linked with eye problems. Further, the study showed that while 60% of diabetics in the country suffer from autonomic nervous system dysfunction, 38% Indians are clueless that diabetes can affect their sexual life. “The study’s findings are unique in terms of the insights it provides on people’s perceptions about diabetes and its effects on morbidity and mortality. Considering the huge burden of diabetes on the country, the findings should help us lay out a roadmap to ensure its prevention and management”, said Mr. Ashok Jain, Group MD and CEO, Lifespan Wellness Pvt. Ltd, who has been living with diabetes for the last 19 years, and whose struggle with it inspired him to set up the clinic chain to help and support people like himself.
As for diet and medication, the study’s findings again fell in the same pattern of ignorance and faulty practices. The study showed that 29% of diabetics use honey/jaggery with 41% found believing these are actually good for people suffering from diabetes. 33% regularly consume juices, which have high glycemic index (not good for diabetes), with nearly 1 out of 2 considering all fruit juices good for diabetes. While it is well established that bitter gourd (karela) and fenugreek (methi) cannot treat diabetes, 40% believe eating them can cure them of diabetes; 27% were found to be taking these alone to deal with diabetes before visiting Lifespan. 42% Indians believe that herbal treatment can cure diabetes, oblivious to the fact that usage of herbs may lead to toxicity to kidneys. Some key findings of the study:
•63% diabetics are at risk of developing microvascular complications
•60% diabetics suffer from autonomic nervous system dysfunction
•50% Indians have no idea that diabetes is a disease of the Pancreas
•While 56% were found to have co-morbid conditions like High Blood Pressure, Hypothyroidism, Diabetic Neuropathy, Heart Disease, Atherosclerosis etc, 30% believe in the myth that diabetes is not a serious medical condition a
 •34% diabetics had a family history of diabetes, 40% had no idea that it was linked with their diabetes and a significant 26% of Indians believed diabetes skips a generation
•24% diabetics are below the age of 40
•2 out of 3 diabetics die from heart diseases or stroke
•27% Indians do not take border-line diabetes seriously

वैदिक सूक्तों के द्रष्टा है ऋषिं पराशर

16 अक्टूबर को होने वाली जयंती के लिए विशेष
पराशर ऋषि महर्षि वसिष्ठ के पौत्र, गोत्रप्रवर्तक, वैदिक सूक्तों के द्रष्टा और ग्रंथकार। राक्षस द्वारा मारे गए वसिष्ठ के पुत्र.शक्ति से इनका जन्म हुआ। बड़े होने पर माता अदृश्यंती से पिता की मृत्यु की बात ज्ञात होने पर राक्षसों के नाश के निमित्त इन्होंने राक्षस सत्र नामक यज्ञ शुरू किया जिसमें अनेक निरपराध राक्षस मारे जाने लगे। यह देखकर पुलस्त्य आदि ऋषियों ने उपदेश देकर इनकी राक्षसों के विनाश से निवृत्त किया और पुराण प्रवक्ता होने का वर दिया।
तीर्थयात्रा में यमुना के तट पर मल्लाह की सुंदर कन्या परंतु मत्स्यगंध से युक्त सत्यवती को देखकर उससे प्रेम करने लगे। संपर्क से तुम्हारा कन्याभाव नष्ट न होगा और तुम्हारे शरीर की दुर्गंध दूर होकर एक योजन तक सुंगध फैलेगी, यह वर पराशर ने सत्यवती को दिए। समीपस्थ ऋषि ने अत: कोहरे का आवरण उत्पन्न किया। बाद में सत्यवती से इनको प्रसिद्ध व्यास पुत्र हुआ।
ऋग्वेद के अनेक सूक्त इनके नाम पर हैं (1, 65.73.9, 97)। इनसे प्रवृत्त पराशर गोत्र में गौर,नील, कृष्ण, श्वेत, श्याम और धूम्र छह भेद हैं। गौर पराशर आदि के भी अनेक उपभेद मिलते हैं। उनके पराशर, वसिष्ठ और शक्ति तीन प्रवर हैं ।

प्रचेतस ऋषि के दसवें पुत्र थे महर्षि वाल्मीकि

प्रारम्भिक जीवन में डाकू नहीं थे,तपस्या करने वाले महान ऋषि थे
16 अक्टूबर को होने वाली महर्षि जयंती पर विशेष

श्री वाल्मीक नमस्तुभ्यमिहागच्छ शुभ प्रद। उत्तरपूर्वयोर्मध्ये तिष्ठ गृहणीष्व मेऽर्चनम्।

शायद ही कोई ऐसा भारतीय होगा जो वाल्मीकि के नाम से परिचित न हो लेकिन उनके वृत्तान्त के बारे में इतिहास खामोश है। उनके व्यक्तित्व का प्रतिबिम्ब हमें रामायण महाकाव्य में दृष्टिगोचर होता है। इस कृति ने महर्षि वाल्मीकि को अमर बना दिया। उनके अविर्भाव से संस्कृत साहित्य में एक नए युग का सूत्रपात हुआ। इससे पूर्व का युग दैव युग के नाम से जाना जाता है। वाल्मीकि संस्कृत के सभी महान कवियों व नाटककारों के प्रेरणास्रोत रहे हैं। वे सब कवियों के गुरु हैं। रामायण सभी काव्यों का मूल है। उनके शूद्र होने की कहानी मनगढं़त है किसी प्रमाणिक ग्रंथ में इसका उल्लेख भी नहीं है।
्श्री राम जब सीता को वाल्मीकि के आश्रम में छोडऩे के लिए लक्ष्मण को भेजते हैं तो कहते हैं कि वहां जो वाल्मीकि मुनि का आश्रम है, वे महर्षि मेरे पिता के घनिष्ठ मित्र हैं। महर्षि वाल्मीकि कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे। उन्होंने तपस्या की थी। उन्होंने श्रीराम से कहा था कि मैंने मन,वचन,कर्म से कभी पाप नहीं किया है। यह बात इस धारणा का खंडन कर देती है कि वे अपने प्रारम्भिक जीवन में डाकू थे। इस तरह की भ्रामक मान्यताएं महर्षि वाल्मीकि जी के चरित्र हनन करने हेतु एक षड्यन्त्र के तहत उन्हें नीचा दिखाने के लिए लिखीं गईं हैँ। हम इस भ्रामक धारणा तथा सत्य तथ्यविहीन मान्यता का घोर विरोध करते हैं। उन्होंने सीता को पवित्र मानकर ही रखा था। वे सीता की अन्तरात्मा की बात जानते थे और इसलिए उन्होंने कहा था:
प्रचेतसोऽहं दशम: पुत्रो राघवनन्दन:।
नोपा श्नीयां फलं तस्या दुष्टेया यदि मैथिली।।
हे राम! मैं प्रचेतस का दसवा पुत्र हंूं। यदि सीता में कोई कमी हो तो मुझे मेरी तपस्या का फल न मिले। इन सभी बातों से साफ हो जाता है कि वाल्मीकि ऋषि जो अयोध्या के निकट तमसा नदी के किनारे रहते थे वे बड़े विद्वान थे। उन्होंने तपस्या करके ज्ञान प्राप्त किया था। उन जैसा पवित्र विद्वान और कोई नहीं था। वे राम के अश्वमेघ यज्ञ में भी लव-कुश के साथ पधारे थे और यज्ञ में शामिल हुए थे। ऋषि वाल्मीकि ने रामायण की रचना तमसा नदी के किनारे विहार कर रहे क्रौञ्च युगल के निर्मम शिकार को देखकर करुणा से द्रवित होकर की थी। उस दृश्य को देखकर उनके दया से वशीभूत हृदय से अकस्मात यह श्लोक प्रस्फुटित हुआ-
मा निषाद ! प्रतिष्ठां त्वगम: शाश्वती: समा:।
यत क्रौन्चमिथुनादकमधवी: काममोहितम्।।
अर्थात व्याघ्र ! तुम्हें कभी प्रतिष्ठा नहीं प्राप्त होगी  यह श्लोक लौकिक संस्कृत साहित्य का प्रथम श्लोक है। रामायण लौकिक संस्कृत का प्रथम काव्य है और इसने राम को अमर बना दिया। वाल्मीकि रामायण में सात काण्ड हैं और 24000 श्लोक हैं। विद्वानों की मान्यता है कि रामायण के प्रत्येक श्लोक का प्रथम अक्षर गायत्री-मन्त्र के श्रमिक अक्षर से प्रारम्भ होता है। एक श्रेष्ठ महाकाव्य में जो विशेषताएं होती हैं। वे सब इसमें हैं। इसमें अलंकारों की छटा है। प्रकृति का अनुपम चित्रण किया गया है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इसकी भाषा बड़ी सरल और मधुर है। रामायण जीवन का सार है, जो प्रत्येक मानव को जीने की कला सिखाती है। इसे पढक़र और उसके अनुसार चलकर एक आदर्श जीवन व्यतीत किया जा सकता है।
आज यदि महर्षि वाल्मीकि को जानना है तो रामायण में झांकना होगा। वाल्मीकि का कद श्रीराम से काफी बड़ा है। यदि रामायण नहीं होती तो राम नहीं होते और कालिदास अश्वघोष आदि संस्कृत के मूर्धन्य कवियों की कृतियों की कृतियां नहीं होती। इसके साथ रामायण की रचना के बारे में भी भ्रम है। यह कहा जाता है कि वाल्मीकि जी ने त्रिकालदर्शन के आधार पर राम के जीवन से काफी पहले ही रामायण की रचना कर दी थी। जबकि सच यह माना जाता है कि जब राम वनवास से वापस अयोध्या लौट आए थे और उसके काफी बाद जब उन्होंने श्रीराम से सारा वृत्तांत सुना था उसके आधार पर ही रामायण की रचना की। 

Tuesday, 11 October 2016

इस्लामी नए साल का आगाज है मुहर्रम

इस्लाम के प्रवर्तक पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत के गम में मनाया जाने वाला मुहर्रम पर्व चांद दिखने के साथ ही शुरू हो गया।
इसमें ताजिए और सवारियां शामिल होंगी। मुहर्रम का चांद दिखने के साथ ही इमामबाड़ों में मजलिसों का सिलसिला भी शुरू हो गया। यह सिलसिला दस दिनों तक शिद्दत के साथ जारी रहेगा।
बोहरा समाज ने मोहर्रम की रसूमात एक दिन पहले ही अदा करना शुरू कर दिया। इन दस दिनों में जगह.जगह ताजिए बिठाए जाएंगे तथा शरबत व पानी की सबीलें लगाई जाएंगी। इस दौरान मुहर्रम का यौमे आशूरा पर को परम्परागत जुलूस निकाला जाएगा। गौरतलब है कि पहली मुहर्रम से इस्लामी नया साल हिजरी सन 1435 का आगाज हो गया है। मुहर्रम से इस्लामी नया साल भी शुरू होता है, इसलिए लोगों ने नए साल का इस्तकबाल किया।
इस्लामी नया साल कुर्बानी से प्रारंभ होता है और कुर्बानी पर ही खत्म होता है।
 इसका उद्देश्य त्याग, समर्पण और सत्य मार्ग का अनुसरण तथा आपसी प्रेम व भाईचारे के साथ सेवा का भाव स्थापित करना है। इस्लामी नए साल पर देश में अमन शांति, एकता, भाईचारा और खुशहाली की कामना की जाएगी।
इमरान खान

Sunday, 9 October 2016

आपके अगले सप्ताह के सितारे

सोमवार से शनिवार तक 
मेष: राशि का स्वामी ग्रह मंगल माना जाता है। भगवान श्री गणेश को मेष राशि का आराध्य देव माना जाता है। शुभ रत्न- मूंगा, शुभ रुद्राक्ष-तीन मुखी। इस सप्ताह आर्थिक मुद्दों को लेकर की गई यात्रा सफल होगी। बिजनेस टूर या प्रॉपर्टी खरीदने के लिए बाहर जाना पड़े तो अवश्य जाएं। इस सप्ताह आप खुशमिजाज रहेंगे। सेहत भी दुरुस्त रहेगी। इस सप्ताह अपनी जिंदगी के कुछ खास पल रिश्तों को दें। दोस्तों और परिजनों को आपके साथ की जरूरत है। यह सप्ताह करियर के लिहाज से नॉर्मल रहेगा। बेरोजगारों को अभी और भागदौड़ करनी पड़ सकती है। इस सप्ताह किसी दोस्त की वजह से आपका रुका हुआ कार्य पूरा होगा। परिवार से भरपूर सहयोग मिलेगा। शुभ रंग-काला:सफेद और गुलाबी रंग से दूर रहें। शुभ अंक- 7। इस सप्ताह अंक 7 अंक आपको सफलता दिलाएगा।
वृषभ: वृषभ का राशि का स्वामी ग्रह शुक्र है। इस राशिवालों के लिए शुभ दिन शुक्रवार और बुधवार होते हैं। कुलस्वामिनी को वृषभ राशि का आराध्य माना जाता है। शुभ रत्न- हीरा। शुभ रुद्राक्ष-छह मुखी। आर्थिक मामलों में दोस्तों की मदद मिल सकती है। इस समय प्रॉपर्टी बेचने का ख्याल भी अपने दिमाग में ना रखें। नई प्रॉपर्टी लेने के लिए भी समय अनुकूल नहीं है। इस सप्ताह हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों को राहत मिल सकती है। समय अच्छा बीतेगा,बशर्ते आप तनाव से दूर रहें। तनाव का असर आपके रिश्तों पर पड़ सकता है। बंधुजनों और मित्रों से विवाद होने की संभावना है। लंबे समय से जिस परीक्षा या टेस्ट के नतीजों का आप इंतजार कर रहे थे वह इस सप्ताह मिल सकता है। नतीजे आपके पक्ष में ही होंगे। यह सप्ताह नॉर्मल रहेगा। परिवार में भी सब सामान्य होगा। संयम बनाए रखें। किसी दोस्त की सलाह आपको इस समय लाभ पहुंचा सकती है। शुभ रंग-भूरा।  इस सप्ताह भूरा रंग आपके लिए शुभ है। हरे और पीले रंग से दूर रहें। शुभ अंक-1। इस सप्ताह अंक 1 आपके लिए शुभ साबित होगा। परिश्रम करते रहें और फिजूलखर्ची से बचें।
मिथुन : मिथुन राशि का स्वामी ग्रह बुध होता है। इस राशि के जातक बेहद समझदार होते हैं। मिथुन राशि के आराध्य देव कुबेर होते हैं। शुभ रत्न- पन्ना। शुभ रुद्राक्ष-चार मुखी। यह सप्ताह निवेश करने के लिए अच्छा नहीं है। बिजनेस में कुछ नुकसान हो सकता है, पर इस नुकसान को होशियारी से टाला जा सकता है। इस सप्ताह अपने स्वास्थ्य को लेकर बेपरवाह ना बनें। रोग होने पर आवश्यक दवाई और उपचार अवश्य लें। इस सप्ताह आप रोमांटिक मूड में रहेंगे। प्यार का इजहार करने के लिए यह समय अच्छा है। यह सप्ताह विद्यार्थियों के लिए अच्छा रहेगा। कम मेहनत से भी अधिक परिणाम मिलेंगे। किसी नई जॉब का ऑफर आ सकता है। इस सप्ताह परिवार में माता-पिता या किसी बड़े से विवाद हो सकता है। बोलने से पहले अपने शब्दों पर ध्यान रखें। किसी भी मुद्दे पर राय देते समय उत्तेजित ना हों। शुभ रंग-पीला। पीला रंग आपके लिए खास है, सभी कार्य सिद्ध होंगे। हरे रंग के कपड़े न पहनें, परेशानी हो सकती है। शुभ अंक-8। आपका शुभ अंक 8 है।
कर्क: कर्क राशि का स्वामी ग्रह चंद्रमा है। भगवान शंकर को कर्क राशि का आराध्य देव माना जाता है। शुभ रत्न- मोती। शुभ रुद्राक्ष-दो मुखी रुद्राक्ष। सप्ताह की शुरुआत में निवेश करना अच्छा रहेगा। यह निवेश आगे चलकर आपको बड़ा फायदा देगा। मित्रता और व्यापार को अलग.अलग रखें। इस सप्ताह सितारे आपसे रुठे हुए लगते हैं। चोट लगने की आशंका है इसलिए गाड़ी चलाते समय बहुत सतर्क रहें। इस सप्ताह अविवाहितों के लिए नए रिश्ते आ सकते हैं। नए दोस्त और साथी बनने के आसार हैं। इस सप्ताह छात्रों को अधिक मेहनत करने की जरूरत है। एकाग्रता बनाए रखें। किसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सिर्फ उसी पर एकाग्र होकर कार्य करें। संतान से शुभ समाचार मिलने के आसार हैं। दोस्तों का साथ मिलेगा। परिवार में भी सभी आपका सहयोग देंगे। शुभ रंग-नारंगी। इस सप्ताह नारंगी रंग आपकी किस्मत के बंद दरवाजे खोल सकता है। काले और नीले रंग के वस्त्रों आदि का प्रयोग करने से बचें। शुभ अंक-4। आपके लिए 4 अंक शुभ है।
सिंह: सिंह राशि का स्वामी ग्रह सूर्य है। इस राशि के लोग किसी के सामने झुकना नहीं पसंद नहीं करते हैं। सिंह राशि के आराध्य देव भगवान सूर्य होते हैं। शुभ रत्न-माणिक्य। शुभ रुद्राक्ष-एकमुखी। इस सप्ताह सितारे आपके साथ हैं। कारोबार में बढ़ोत्तरी होगी। किसी पुराने प्रोजेक्ट या काम को शुरु करने के लिए समय शुभ है। आपका स्वास्थ्य इस सप्ताह पूरी तरह से ठीक रहेगा। हालांकि बाहर का खाना खाने की वजह से कुछ परेशानियां अवश्य हो सकती हैं। हर रिश्ता अपने लिए स्पेस मांगता हैए आपको यह बात समझनी होगी। दूसरों के निजी मामलों में दखल ना दें खासकर अपने पार्टनर के मामलों में। इस सप्ताह अपने करियर के विषय में कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए समय अनुकूल है। यह सप्ताह पारिवारिक स्तर पर काफी उतार.चढ़ाव भरा हो सकता है। घर के बड़े.बुजुर्गों के किसी विषय पर विवाद हो सकता है। शुभ रंग-ग्रे। इस सप्ताह आपके लिए ग्रे रंग शुभ है। इस रंग के वस्त्र और अन्य वस्तुएं प्रयोग करने से आपको सफलता मिलेगी। गहरे रंगों से दूर रहें। शुभ अंक-1। इस सप्ताह अंक 1 आपके लिए शुभ साबित होगा। यह अंक आपको हर जगह नंबर 1 बनने में मदद करेगा।
कन्या:कन्या राशि के जातक बेहद धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं। मान्यता है कि कन्या राशि के आराध्य देव कुबेर जी होते हैं। शुभ रत्न-पन्ना। शुभ रुद्राक्ष-चार मुखी। सप्ताह की शुरुआत तो सामान्य होगी लेकिन सप्ताह के मध्य तक आपको कहीं से अप्रत्याशित लाभ मिल सकता है। कोई रुका हुआ पैसा या खोई वस्तु आपको वापस मिल सकती है। वाहन चलाते समय या सडक़ पार करते समय बेहद सतर्क रहें। इस सप्ताह आपके बिगड़े रिश्ते सुधर सकते हैं। गलतफहमियों से पर्दा हट सकता है लेकिन इसके लिए जरूरी है कि आप अपने साथी से बातचीत करते रहें। इस सप्ताह आप करियर से जुड़ा कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। विद्यार्थियों के लिए भी यह समय आगे की योजना बनाने के लिए शुभ है। इस सप्ताह परिवार के लिए समय निकालना मुश्किल होगा। कार्यभार बढ़ेगा लेकिन पुराने दोस्तों से मुलाकात होने की भी संभावना है जिस वजह से आपकी टेंशन कम हो सकती है। शुभ रंग-लाल। इस सप्ताह लाल रंग आपके लिए लाभदायक है। नीले रंग के कपड़े न पहनें तो बेहतर होगा। शुभ अंक-5। आपका शुभ अंक 5 है।
तुला: तुला राशि के जातक भोले स्वभाव के होते हैं। कुलस्वामिनी को तुला राशि का आराध्य माना जाता है। शुभ रत्न-पन्ना। शुभ रुद्राक्ष-छह मुखी। इस सप्ताह स्टॉक मार्केट में पैसा ना लगाएं। सितारे आपके साथ नहीं हैं इसलिए वित्तीय मामलों में सावधानी बरतें। परिवार के किसी सदस्य का स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। रिश्तों को मजबूत होने के लिए कई कसौटियों से गुजरना पड़ता है। इस सप्ताह आपको भी इन कसौटियों का सामना करना पड़ सकता है। इस सप्ताह छात्रों को कड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है। करियर की राह में अभी आपको और पसीने बहाने होंगे। इस सप्ताह किसी रिश्तेदार की वजह से घर में कलेश हो सकता है। गलतफहमियों से बचने का एक ही रास्ता होता है और वह है,बातचीत का रास्ता। शुभ रंग-नीला। इस सप्ताह आपका शुभ रंग नीला है। यह रंग आपकी किस्मत बदल सकता है। लाल रंग से बचें, यह रुकावटें पैदा कर सकता है। शुभ अंक-6। इस सप्ताह अंक 6 आपके लिए शुभ रहेगा। सकारात्मक बने रहें और तनाव से बचें।
वृश्चिक:वृश्चिक राशि का स्वामी ग्रह मंगल है। वृश्चिक राशि के जातकों के आराध्य देव गणेश जी होते हैं। शुभ रत्न-माणिक्य। शुभ रुद्राक्ष-तीन मुखी। शेयर मार्केट में निवेश करना शुभ साबित हो सकता है। व्यापार में नई संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। भाग्य आपके साथ है। सप्ताह के कुछ दिन आलस भरे हो सकते हैं। आलस्य से बचने के लिए सुबह जल्दी उठने का प्रयास करें। इस सप्ताह आपका सोशल सर्कल बढ़ सकता है। नए लोगों से मुलाकात हो सकती है। इस सप्ताह परीक्षा.प्रतियोगिता में सफलता मिलने की प्रबल संभावना है। समय आपके अनुकूल है। कई दिनों से चली आ रही परेशानी का इस सप्ताह हल मिल सकता है।
इस सप्ताह किसी पुराने दोस्त से मुलाकात हो सकती है। परिवार के लोग आपसे खुश रहेंगे और घर में शांति बनी रहेगी। शुभ रंग-
बैंगनी। इस सप्ताह बैंगनी रंग पहनना आपके लिए लाभदायक है। नीले रंग के कपड़े न पहनें तो बेहतर होगा। शुभ अंक-3। इस सप्ताह अंक 3 आपका अत्यधिक साथ देगा।
धनु :धनु राशि का स्वामी ग्रह गुरु को माना जाता है। धनु राशि के आराध्य देव दत्तात्रेय होते हैं। शुभ रत्न-माणिक्य। शुभ रुद्राक्ष-पांच मुखी। इस सप्ताह कोर्ट.कचहरी के चक्कर लग सकते हैं। वित्तीय मामलों से जुड़े फैसले कुछ समय के लिए टाल दें। सप्ताह के मध्यम में सिरदर्द और थकान से परेशान हो सकते हैं। भोजन पर विशेष ध्यान दें। इस सप्ताह अपना कीमती समय अपने पार्टनर को दें, आपके पार्टनर को आपकी जरूरत है। बेकार की बातों और झगड़ों से बचें। छात्रों को इस सप्ताह मेहनत करने के लिए तैयार रहना होगा। कार्य स्थल पर प्रमोशन या प्रशंसा मिलने के आसार हैं। करियर को नई दिशा मिल सकती है। लाइफ पार्टनर के साथ आपके रिश्ते और मधुर होंगे। परिवार से भरपूर सहयोग मिलेगा। मित्र भी आपके पक्ष में खड़े रहकर आपकी मदद करते नजऱ आएंगे।
शुभ रंग-सफेद।सफेद रंग आपके लिए शुभ हैए सफ़ेद रंग की सादगी इस सप्ताह आपके जीवन में नए रंग भर देगी। शुभ अंक-2। इस सप्ताह अंक 2 आपके लिए शुभ साबित होगा।
मकर : मकर राशि का स्वामी ग्रह शनि होता है। भगवान शनि देव और हनुमान जी को मकर राशि का आराध्य देव माना जाता है। शुभ रत्न-नीलम। शुभ रुद्राक्ष-सात मुखी। यह समय शेयर या नई प्रॉपर्टी खरीदने के लिए शुभ है। लेकिन कोई भी फैसला हड़बड़ाहट में न लें। पुरानी बीमारी इस सप्ताह आपको परेशान कर सकती है। शारीरिक परेशानी मानसिक परेशानी ना बने इसलिए दवाई लें और चिंतित ना हो। यह सप्ताह रिश्तों के लिहाज से थोड़ा कठिन हो सकता है। अपनी वाणी पर संयम रखें और किसी प्रकार की गलतफहमी ना पालें। यह सप्ताह छात्रों के लिए थोड़ा मुश्किल भरा हो सकता है। पढ़ते समय एकाग्रता बनाने के लिए मेहनत करनी पड़ेगी। इस सप्ताह पारिवारिक संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी। किसी मेहमान के आने की संभावना है। शुभ रंग- आसमानी। इस सप्ताह आसमानी रंग के वस्त्र पहनने से आपको विशेष रूप से लाभ मिलेगा। नारंगी रंग का असर इसके उल्टा होगा। शुभ अंक-7। इस सप्ताह आपका लकी नंबर है 7। नंबर 7 आपके बिगड़े काम बनाएगा।
कुंभ : कुंभ राशि के जातक बेहद गुस्सैल किस्म के होते हैं। भगवान शनि देव और हनुमान जी को कुंभ राशि का आराध्य देव माना जाता है। शुभ रत्न-नीलम। शुभ रुद्राक्ष-सात मुखी। आमदनी में वृद्धि हो सकती है। कार्यक्षेत्र में लाभ होने से आपका मन प्रसन्न रहेगा। इस सप्ताह अपनी लाइफ स्टाइल को थोड़ा बदलने की कोशिश करें, सुबह और शाम के समय वॉक पर जाने का प्लान बनाएं। इस सप्ताह आप पर काम का बोझ अधिक है और इस वजह से आपके करीबी आपसे खफा हो सकते है। अपने साथी और परिवार के लिए भी समय निकालें। यह सप्ताह छात्रों के लिए बेहतरीन होगा। बाधाएं दूर हो सकती हैं। नतीजों की चिंता किए बिना मेहनत करेंगे तो कामयाबी आपके साथ होगी।  इस हफ्ते आप अपने परिवारजनों के साथ अच्छा टाइम बिताएंगे। वीकेंड पर घूमने का प्लान भी बना सकते हैं। शुभ रंग-हरा। शुभ रंग-हरा। इस सप्ताह हरा रंग आपके लिए शुभ साबित होगा। सफेद और लाल रंग पहनने से दिनभर गुस्सा आता रहेगा,इसलिए इनसे बचें। शुभ अंक-9। इस सप्ताह अंक 9 आपको काफी फायदे करा सकता है।
मीन : मीन राशि के जातक बेहद शांत स्वभाव के और मेहनती होते हैं। मीन राशि के आराध्य देव दत्तात्रेय होते हैं। शुभ रत्न-मूंगा। शुभ रुद्राक्ष-पांच मुखी। इस सप्ताह शेयर बाजार आपको मुनाफा दे सकता है। कारोबार में भी इज़ाफा होगा। स्वास्थ्य के लिहाज से यह सप्ताह सामान्य रहेगा। बीमार लोगों का स्वास्थ्य अच्छा होगा और मन खुश रहेगा। सभी परहेज जरूरी हैं। इस सप्ताह अपने साथी से कोई झूठा वादा ना करें अन्यथा आने वाले समय में आपको परेशानी हो सकती है। छात्रों को इस सप्ताह आसानी से सफलता प्राप्त होगी। हालांकि इंजीनियरिंग और टेक्निकल फील्ड के छात्रों को थोड़ी परेशानी झेलनी पड़ सकती है। घर में किसी से अनबन हो सकती है। वाणी पर संयम रखें। इस सप्ताह किसी भी अनजान शख्स से दोस्ती ना करें। शुभ रंग-गुलाबी। गुलाबी रंग इस सप्ताह ना सिर्फ  आपके व्यक्तित्व को निखारेगा बल्कि भाग्य को भी चमकाएगा। लाल और काले रंग से दूर रहें। शुभ अंक-3। इस सप्ताह अंक 3 आपके लिए शुभ है।

अहंकार का नाशक भी है दशहरा


दशहरा का त्यौहार भारत में बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार हैं । इस त्यौहार को विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता हैं।माँ दुर्गा की नौ दिनों तक पूजा करने के पश्चात दशमी के दिन यह त्यौहार मनाया जाता हैं। इस वर्ष यह पर्व आगामी 11 अक्टूबर को मनाया जा रहा है।  यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता हैं। इस दिन रावण का पुतला पुर देश भर में जलाया जाता हैं।
इस दिन भगवान राम ने राक्षस रावण का वध कर माता सीता को उसकी कैद से छुड़ाया था और सारा समाज भयमुक्त हुआ था। रावण को मारने से पूर्व राम ने दुर्गा की आराधना की थी। मां दुर्गा ने उनकी पूजा से प्रसन्न होकर उन्हें विजय का वरदान दिया था। रावण दहन आज भी बहुत धूमधाम से किया जाता है। इसके साथ ही आतिशबाजियां छोड़ी जाती हैं। दुर्गा की मूर्ति की स्थापना कर पूजा करने वाले भक्त मूर्ति.विसर्जन का कार्यक्रम भी गाजे.बाजे के साथ करते हैं।
भक्तगण दशहरे में मां दुर्गा की पूजा करते हैं। कुछ लोग व्रत एवं उपवास करते हैं। पूजा की समाप्ति पर पुरोहितों को दान.दक्षिणा देकर संतुष्ट किया जाता है। कई स्थानों पर मेले लगते हैं। रामलीला का आयोजन भी किया जाता है।दस दिन पहले ही रामलीला का मंचन आरंभ हो जाता है। इन दिनों रामकथा को नाटक रूप में दिखाया जाता है। दसवें दिन रावण, मेघनाद और कुभकरण के पुतले का दहन किया जाता है। इस अवसर पर विभिन्न स्थानों पर बड़े.बड़े मेलों का आयोजन भी किया जाता है। विद्यालयों में बच्चों के लिए दस दिन का अवकाश भी घोषित कर दिया जाता है।
बच्चे बड़े उत्साह के साथ रावण दहन देखने जाते हैं और मेलों में बहुत आनंद उठाते हैं। भारत के सभी स्थानों में इसे अलग.अलग रूप में मनाया जाता है। कहीं यह दुर्गा विजय का प्रतीक स्वरूप मनाया जाता हैए तो कहीं नवरात्रों के रूप में। बंगाल में दुर्गा पूजा का विशेष आयोजन किया जाता है। यह त्योहार हर्ष और उल्लास का प्रतीक है। इस दिन मनुष्य को अपने अंदर व्याप्त पाप, लोभ, मद, क्रोध, आलस्य, चोरी, अंहकार, काम, हिंसा, मोह आदि भावनाओं को समाप्त करने की प्रेरणा मिलती है। यह दिन हमें प्रेरणा देता है कि हमें अंहकार नहीं करना चाहिए क्योंकि अंहकार के मद में डूबा हुआ एक दिन अवश्य मुँह की खाता है।



रावण बहुत बड़ा विद्वान और वीर व्यक्ति था परन्तु उसका अंहकार ही उसके विनाश कारण बना। यह त्योहार जीवन को हर्ष और उल्लास से भर देता हैए साथ यह जीवन में कभी अंहकार न करने की प्रेरणा भी देता है।

शक्ति पूजा का पर्व है दशहरा


दशहरा ,विजयदशमी या आयुध.पूजा, हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। अश्विन  मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को इसका आयोजन होता है। भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसीलिये इस दशमी को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है। इसी दिन लोग नया कार्य प्रारम्भ करते हैं, शस्त्र-पूजा की जाती है। प्राचीन काल में राजा लोग इस दिन विजय की प्रार्थना कर रण.यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। इस दिन जगह-जगह मेले लगते हैं। रामलीला का आयोजन होता है। रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है। दशहरा अथवा विजयदशमी भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाए अथवा दुर्गा पूजा के रूप में, दोनों ही रूपों में यह शक्ति पूजा का पर्व है, शस्त्र पूजन की तिथि है। हर्ष और उल्लास तथा विजय का पर्व है। भारतीय संस्कृति वीरता की पूजक है, शौर्य की उपासक है। व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों. काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की सद्प्रेरणा प्रदान करता है। दशहरा को दुर्गा पूजा के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार वर्षा ऋतु के अंत में संपूर्ण भारत वर्ष में मनाया जाता है। नवरात्र में मूर्ति पूजा में पश्चिम बंगाल का कोई सानी नहीं है जबकि गुजरात में खेला जाने वाला डांडिया बेजोड़ है। पूरे दस दिनों तक त्योहार की धूम रहती है। लोग भक्ति में रमे रहते हैं। मां दुर्गा की विशेष आराधनाएं देखने को मिलती हैं।  दशमी के दिन त्योहार की समाप्ति होती है।
इस दिन भगवान राम ने राक्षस रावण का वध कर माता सीता को उसकी कैद से छुड़ाया था। और सारा समाज भयमुक्त हुआ था। रावण को मारने से पूर्व राम ने दुर्गा की आराधना की थी। मां दुर्गा ने उनकी पूजा से प्रसन्न होकर उन्हें विजय का वरदान दिया था। भक्तगण दशहरे में मां दुर्गा की पूजा करते हैं। कुछ लोग व्रत एवं उपवास करते हैं। पूजा की समाप्ति पर पुरोहितों को दान.दक्षिणा देकर संतुष्ट किया जाता है। कई स्थानों पर मेले लगते हैं। रामलीला का आयोजन भी किया जाता है। देश के कोने.कोने में यह विभिन्न रूपों से मनाया जाता है, बल्कि यह उतने ही जोश और उल्लास से दूसरे देशों में भी मनाया जाता जहां प्रवासी भारतीय रहते हैं। मैसूर का दशहरा देशभर में विख्यात है। मैसूर में दशहरे के समय पूरे शहर की गलियों को रोशनी से सज्जित किया जाता है और हाथियों का श्रृंगार कर पूरे शहर में एक भव्य जुलूस निकाला जाता है।
इस समय प्रसिद्ध मैसूर महल को दीपमालिकाओं से दुल्हन की तरह सजाया जाता है। इसके साथ शहर में लोग टार्च लाइट के संग नृत्य और संगीत की शोभा यात्रा का आनंद लेते हैं। द्रविड़ प्रदेशों में रावण-दहन का आयोजन नहीं किया जाता है।
सुनील कुमार 

Saturday, 8 October 2016

धन-सम्पदा का वरदान देतीं हैं माता महागौरी

नवरात्रि काल में रात्रि का विशेष महत्व होता है। देवियों के शक्ति स्वरुप की उपासना का पर्व नवरात्र प्रतिपदा से नवमी तक, निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन काल से मनाया जा रहा है।
सर्वप्रथम श्रीरामचंद्रजी ने इस शारदीय नवरात्रि पूजा का प्रारंभ समुद्र तट पर किया था और उसके बाद दसवें दिन लंका विजय के लिए प्रस्थान किया और विजय प्राप्त की। तब से असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म की जीत का पर्व दशहरा मनाया जाने लगा। नवरात्रि के नौ दिनों में आदिशक्ति माता दुर्गा के उन नौ रूपों का भी पूजन किया जाता है जिन्होंने सृष्टि के आरंभ से लेकर अभी तक इस पृथ्वी लोक पर विभिन्न लीलाएं की थीं। माता के इन नौ रूपों को नवदुर्गा के नाम से जाना जाता है।
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह़मचारिणी, 
तृतीयं चन्द्रघंटेति कूष्माण्डेति चतुर्थम।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च,
सप्तमं कालरात्रीति, महागौरी चाष्टमम्। 
नवमम् सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकीर्तिता। 
अष्टम नवदुर्गा:
माता महागौरी:   शंख और चन्द्र के समान अत्यंत श्वेत वर्ण धारी माँ महागौरी माँ दुर्गा का आठवां स्वरुप हैं। इन माता की पूजा ०९ अक्टूबर को की जाएगी। मां का स्वरूप धार्मिक ग्रन्थ के अनुसार भगवान शिव को पाने के लिए किये गए अपने कठोर तप के कारण माँ पार्वती का रंग काला और शरीर क्षीण हो गया था, तपस्या से प्रसन्न होकर जब भगवान शिव ने माँ पार्वती का शरीर गंगाजल से धोया तो वह विद्युत प्रभा के समान गौर हो गया। इसी कारण माँ को महागौरी के नाम से पूजते हैं। महागौरी की चार भुजाएं हैं जिनमें से दो अभयमुद्रा और वरमुद्रा में हैं तथा दो में त्रिशूल और डमरू धारण किया हुआ है। अपने सभी रूपों में से महागौरी, माँ दुर्गा का सबसे शांत रूप है। अष्टमी के दिन कन्या पूजन का भी विधान है।महागौरी की उपासना का मंत्र है.
श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचि:।
महागौरी शुभं दघान्महादेवप्रमोददा॥
नवम नवदुर्गा:
माता सिद्धिदात्री :सिद्धियों की दाता माँ सिद्धिदात्री देवी दुर्गा का अंतिम स्वरुप हैं। इन माता की पूजा १० अक्टूबर को की जाएगी नवमी के दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा और कन्या पूजन के साथ ही नवरात्रि का अंत होता है। माँ सिद्धिदात्री भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियाँ प्रदान करती हैं। मान्यता अनुसार भगवान शिव ने इन्हीं की उपासना कर सिद्धियों को प्राप्त किया था। माँ सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैंए जिनमें गदा, कमल पुष्प, शंख और चक्र लिये माँ कमल के फूल पर आसीन हैं। माँ सिद्धिदात्री का वाहन सिंह है। इनका उपासना मंत्र है.
सिद्धगन्धर्वयक्षाघैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥