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Sunday, 8 October 2017

स्ट्रीट फ़ाइट के साथ होम फाइट के लिए तैयार रहिए मोदी जी!

बीबीसी के अनुसार नरेंद्र मोदी की कई ख़ूबियों में से एक ख़ूबी ये है कि वो ज़रूरत पडऩे पर बेखटके प्रधानमंत्री की गरिमा वाला चोला उतार फेंकते हैं और फिर अपना पुराना स्ट्रीट फ़ाइटर वाला चोला पहन लेते हैं जिसे पहनकर उन्होंने अब तक भारतीय जनता पार्टी के भीतर और बाहर के विरोधियों को परास्त किया है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक साधारण प्रचारक से देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे हैं। लेकिन मोदी जी इस बार फाइट अपने घर से शुरू हो गई है। यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी बाहर के नहीं बल्कि आपके घर के ही लोग हैं। अभी तो यह शुरुआत हुई है।
लोकसभा चुनाव जीतने और प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने शायद ही फिर कभी युवराज कहकर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का मखौल उड़ाया हो पर पिछले हफ़्ते हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनावों के लिए अपनी पार्टी के प्रचार अभियान की शुरुआत करते हुए उन्होंने फिर से राहुल गांधी का मज़ाक उड़ाने के अंदाज़ में उन्हें युवराज कहा और कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष और युवराज सहित पूरी कांग्रेस पार्टी ज़मानत पर है.
स्ट्रीट फ़ाइटर वाला चोला पहनते ही मोदी अपने विरोधियों को जोकरों की जमात में बदलने की कोशिश करते हैं ताकि उन पर हमला बोलना आसान हो जाए और सुनने वाले के दिमाग़ में मोदी-विरोधियों की यही थेथरी छवि बन जाए। तो दिल्ली में 49 दिन तक सरकार चलाने वाले अरविंद केजरीवाल एके-49 कहलाए गए, राहुल गांधी युवराज हो गए. पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का दायरा मोदी ने अल्पसंख्यकों तक सीमित कर दिया था। इस कड़ी में ताज़ा नाम भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी का भी जुड़ गया है जिन्हें इशारे-इशारे में मोदी ने महाभारत के शल्य की उपाधि से विभूषित कर दिया।
मोदी ने कहा कि महाभारत के शल्य की तरह कुछ मु_ी भर लोग हमेशा हताशा की बात करते हैं और कहते हैं — कुछ भी ठीक नहीं होगा। इन लोगों को हताशा फैलाने से रात को अच्छी नींद आती है।  पर नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के हर तीसरे वाक्य पर ताली बजाने वाले कंपनी सेक्रेटरीज़ को ये नहीं बताया कि नकारात्मकता फैलाने वाले शल्य को दुर्योधन ने एक चाल के ज़रिए महाभारत में कौरवों का पक्ष लेने के लिए तैयार किया था। जब शल्य को इस छल का अंदाज़ा हुआ तब उन्होंने युधिष्ठिर को वचन दिया कि वो युद्ध में कर्ण को हतोत्साहित करते रहेंगे। शरीर से कौरवों के पक्ष में लड़ेंगे पर मन और दिमाग़ से पाण्डवों का साथ देंगे।
शल्य को मालूम था कि कौरव महाभारत का युद्ध नहीं जीत पाएंगे और वो युद्ध के दौरान कर्ण को लगातार यही सच बता रहे थे। पर कर्ण को शल्य का सच पसंद नहीं आया।
किसी भी युग, देश, काल और परिस्थितियों में तमाम बाधाओं को पार कर, अपने विरोधियों को परास्त कर एक ख़ास मुक़ाम तक पहुंचे कर्ण को फ़ैसलाकुन क्षणों में शल्य का सच निराशाजनक ही लगता है।
गुजरात से दिल्ली की ओर क़दम बढ़ाने के साथ ही नरेंद्र मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे बुज़ुर्ग नेताओं के साथ-साथ यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी जैसे बीजेपी के नेताओं को भी हाशिए पर डाल दिया था। इससे पहले गुजरात में तो उन्होंने आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद के कुछ लोगों के लिए भी कई दरवाज़े बंद कर दिए. मोदी का सितारा बुलंद था और उनके हर फ़ैसले को लीक से हटकर और बोल्ड माना जाता था। इसलिए दबे सुरों में थोड़ी बहुत आलोचना हुई पर इससे ज़्यादा कुछ नहीं कहा गया। पर फिर आई आठ नवंबर 2016 की शाम जब नरेंद्र मोदी ने एक बोल्ड फ़ैसला लेकर ऐलान कर दिया कि आधी रात के बाद से 500 और 1000 के नोट लीगल टेंडर नहीं रह जाएंगे। अगले कुछ महीने पूरा हिंदुस्तान बैंको के आगे लाइन लगाकर खड़ा था और ख़ुश होकर सोच रहा था मोदी जी ने अमीरों को भी हमारी तरह लाइन में खड़ा कर दिया है. मोदी ने नोटबंदी को वर्ग संघर्ष में बदल दिया. हालांकि, अमीर किसी को भी बैंकों की लाइन में खड़े नहीं दिख रहे थे.
जब लोगों में ये शंका घर करने लगी कि कहीं ऐसा तो नहीं कि सिर्फ़ वो ही लाइन में लगा दिए गए हैं अंबानी और अडानी नहीं — तो गांधीनगर से ख़बर आ गई कि प्रधानमंत्री मोदी की नब्बे वर्ष की मां हीराबेन तक बैंक की लाइन में खड़ी हुई हैं।
चारों ओर मोदी-मोदी के नारे गुंजायमान होने लगे पर विपक्ष ने मोदी के इस फ़ैसले पर हमला बोला तो मोदी ने जापान की यात्रा से लौटते ही तुरंत वहीं पुराना स्ट्रीट फ़ाइटर वाला चोला ओढ़ा और गोवा में बेहद तरल आवाज़ में कहा कि मेरे विरोधियों का बस चले तो वो मुझे ङ्क्षज़िदा जला दें।
फिर आया जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स जिसको मोदी गुड एंड सिंपल टैक्स कहते हैं. पर जिसकी जेब से जीएसटी जाता है वो समझने लगा कि ये कितना गुड और कितना सिंपल टैक्स है. आधी रात को संसद के दोनों सदनों का संयुक्त सत्र आहूत करते जीएसटी को दूसरी आज़ादी की तरह पेश किया गया. ये कई दूसरे इवेंट्स की तरह एक और इवेंट था जिसे देखकर राष्ट्रभक्तों के सीने गर्व से फूल गए। पर जैसा कि इवेंट मैनेजमेंट। करने वाले जानते हैं कि इवेंट संपन्न होने के कुछ समय इसका नशा उतर जाता है और उत्तेजना ख़त्म हो जाती है, इस इवेंट का असर बहुत दिनों तक नहीं रहा. गुजरात में व्यापारी लाखों की संख्या में सडक़ों पर उतर आए। यहां व्यापारियों ने ेजगह-जगह होर्डिंग्स लगाकर मोदी भगाओ देश बचाओं के नारे लगा दिए। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में किसान बेचैन होने लगे  उन्हें उनकी फ़सल की लागत तक नहीं मिल रही थी।
काला धन पता नहीं कहां बिला गया क्योंकि प्रतिबंधित नोट का 99 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा लोगों ने बैंकों में जमा करा दिया. नोटबंदी के बावजूद हिंदुस्तान से आतंकवाद की जड़ें नहीं उखड़ पाईं और न कश्मीरी पत्थरबाज़ ही बाज़ आए। और जब ये बात सामने आई कि अर्थव्यवस्था के विकास की दर 5.7 प्रतिशत तक गिर गई तब लोगों ने अपने नेज़े-भाले सान पर चढ़ाने शुरू कर दिए. महाभारत हर बार घर के भीतर ही लड़ा जाता रहा है.
इस बार भी नरेंद्र मोदी की नीतियों पर हमला ख़ुद उनकी पार्टी के सुब्रह्मण्यन स्वामी जैसे पुरोधाओं ने किया। आरएसएस से जुड़े एस. गुरुमूर्ति जो मोदी के परम समर्थकों में हैं -भी अर्थव्यवस्था के उत्तरोत्तर ख़स्ताहाल को नजऱअंदाज़ नहीं कर सके। अरुण शौरी तो लंबे अर्से से मोदी सरकार को ढाई लोगों की सरकार कहते आ रहे हैं — एक मोदी ख़ुद, एक बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और आधे अरुण जेटली। पर जब यशवंत सिन्हा ने इंडियन एक्सप्रेस में खुला लेख लिखकर जेटली को सीधे-सीधे और मोदी को थोड़ा इशारे से कठघरे में खड़ा किया तो लड़ाई कुरुक्षेत्र के मैदान में आ गई और मोदी जवाब देने को मजबूर हुए। मोदी ने सिन्हा को परोक्ष रूप से शल्य कहा तो बहुत से लोगों ने कोने में रखी महाभारत की धूल झाडक़र उसे पढऩा शुरू कर दिया. यशवंत सिन्हा ने भी नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी पर कटाक्ष करने के लिए महाभारत का ही सहारा लिया और एक समारोह में कहा - कौरव सौ भाई थे पर सिर्फ़ दो प्रसिद्ध हुए: दुर्योधन और दुशासन।
बीते साढ़े तीन बरस में यही सबसे बड़ा अंतर आया है. तब नरेंद्र मोदी एक स्ट्रीट फ़ाइटर की तरह अपने विरोधियों को सरेआम चारों खाने चित्त करते थे तो कहीं से कोई आवाज़ नहीं आती थी. अब यशवंत सिन्हा मोदी को उन्हीं की तरह, उन्हीं के मुहावरे में जवाब देकर राष्ट्रीय बहस का रुख़ मोड़ दे रहे हैं।  मोदी जी आपको स्ट्रीट फाइट के साथ होम फाइट के लिए भी तैयार रहना होगा।

कौन था नीरो

नीरो रोम का सम्राट् था। उसकी माता ऐग्रिप्पिना, जो रोम के प्रथम सम्राट् आगस्टस की प्रपौत्री थी, बड़ी ही महत्वाकांक्षिणी थी। उसने बाद में अपने मामा सम्राट् क्लाडिअस प्रथम से विवाह कर लिया और अपने नए पति को इस बात के लिए राजी कर लिया कि वह नीरो को अपना दत्तक पुत्र मान ले और उसे ही राज्य का उत्तराधिकारी घोषित कर दे। नीरो को शीघ्र ही गद्दी पर बैठाने के लिए ऐग्रिप्पिना उतावली हो उठी और उसने जहर दिलाकर क्लाडिअस की हत्या करा दी।
रोम निवसियों ने पहले तो नीरो का स्वागत और समर्थन किया क्योंकि वह पितृ परंपरा से ही नहीं मातृ परंपरा से भी सम्राट् आगस्टस का वंशज था। शुरु में उसने अपने गुरु सेनेका से प्रभावित होकर राज्य का शासन भी अच्छी तरह से किया किंतु शीघ्र ही उसके दुर्गुण प्रकट होने लगे। सन्? 55 में उसने अपने प्रतिद्वंद्वी ब्रिटेनिकस को, जो क्लाडिअस का अपना पुत्र होने के कारण, राज्य का वास्तविक दावेदार था, जहर देकर मरवा डाला और चार वर्ष बाद खुद अपनी माता की भी हत्या करा दी। फिर उसने अनी पत्नी आक्टेविया को भी मरवा डाला और अपनी दूसरी स्त्री पापीया को क्रोधाविष्ट होकर मार डाला। उसने एक तीसरी स्त्री से विवाह करना चाहा पर उसने इनकार कर दिया और उसे भी मौत के घाट उतार दिया गया। इसके बाद नीरो ने एक और स्त्री के पति को मरवा डाला ताकि वह उसे अपनी पत्नी बना सके। धीरे धीरे उसके प्रति असंतोष बढऩे लगा। एक षडय़ंत्र का सुराग पाकर उसने अपने गुरु सेनेका को आत्महत्या करने का आदेश दिया। इसके सिवा और भी कई प्रसिद्ध पुरुषों को मृत्युदंड दे दिया गया।
सन् 64 में रोम नगर में अत्यंत रहस्यमय ढंग से आग की लपटें भडक़ उठीं जिससे आधे से अधिक नगर जलकर खाक हो गया। जब आग धूधू कर के जल रही थी नीरो एक स्थान पर खड़े होकर उसकी विनाशलीला देख रहा था और सारंगी बजा रहा था। यद्यपि कुछ लोगों का ख्याल है कि आग स्वयं नीरो ने लगवाई थी पर ऐसा समझने के लिए वस्तुत: कोई आधार नहीं है। आग बुझ जाने के बाद नीरो ने नगर के पुनर्निमणि का कार्य आरंभ किया और अपने लिए 'स्वर्ण मंदिर' नामक एक भव्य प्रासाद बनवाया। असह्य करभार, शासन संबंधी बुराइयों तथा अनेक क्रूरताओं के कारण उसके विरुद्ध विद्रोह की भावना बढ़ती गई। स्पेन के रोमन गवर्नर ने अपनी फौजों के साथ रोम पर हमला बोल दिया जिसमें स्वयं नीरो को अंगरक्षक सेना भी शामिल हो गई। नीरो को राज्य से पलायन करना पड़ा। इसी बीच सिनेट ने उसे फाँसी पर चढ़ा देने का निर्णय किया। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने आत्महत्या कर ली।

नीरो की तरह योगी भी जलते उत्तर प्रदेश को छोड़ कर बंसी बजा रहे हैंं?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आजकल रोम के सम्राट नीरो की भूमिका निभा रहे हैं। पूरा प्रदेश आपराधिक घटनाओं से जल रहा है परन्तु वे भाजपा के संकटमोचक बने हुए हैं। कभी केरल, कभी हरियाणा तो कभी गुजरात की ओर रुख कर रहे हैं। यहां उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ गैंगरेप, विस्फोट से हिल रही है तो पड़ोसी शहर कानपुर महानगर भी विस्फोट और दंगों से सुलग रहा है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा की बात ही कहने की नहीं है। अब एक दिल दहलाने वाली घटना मुजफ्फरनगर में हुई जहां एक महिला के साथ चार-पांच बदमाशों ने पति और बच्चे को गन प्वाइंट पर लेकर गन्ने के खेतों में गैंगरेप किया।
हालांकि वह पार्टी के सदस्य हैं, पदाधिकारी है और लंबे समय तक सांसद भी रहे हैं और अब देश की राजनीति दिशा तय करने वाले राज्य के मुख्यमंत्री भी हैं। ऐसे में योगी आदित्यनाथ को सबसे पहले अपना घर संभालना चाहिये कि केरल,हरियाणा और गुजरात को संभालना चाहिए। कहावत कहीं गयी है एक को साधे सब मिले सब साधे सब जाए। यानी पहले एक को संभालों तो कम से कम एक तो मिले। सब संभालने के लिए भागदौड़ भी करोगे और हाथ कुछ भी न आएगा। प्रदेश की जनता योगी से कितनी अपेक्षाएं रख रहीं थी वह पूरी हुई कि नहीं यह देखना चाहिए।
सबसे बड़ी बात यह है कि प्रदेश के राज्यपाल नामनाईक जो पहले, भाजपा के पदाधिकारी भी रह चुके हैँ, वह भी कह चुके हैं कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था की स्थिति ठीक नहीं है, इसे सुधारो। हाल ही में कानपुर विश्वविद्यालय में अपने कार्यक्रम से पूर्व पत्रकारों से बाचतीत में उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून- व्यवस्था की स्थिति ठीक नहीं है। योगी शासन में भी यही कर रहा हूं और अखिलेश सरकार में भी कहता था।

Saturday, 30 September 2017

बीएचयू के छात्रों के लिए बुरी व अच्छी खबर

बीएचयू में हाल में ही जो बवाल हुआ उससे वहां के छात्रों के लिए बुरी और अच्छी खबर दोनों ही हैं। छात्राओं के विरोध प्रदर्शन से तो ये जाहिर होता है कि वहां के छात्रों ने अपनी मनमानी की अत्ती ही कर दी थी वरना इतना बड़ा हंगामा नहीं होता। दूसरी बात यह है कि वहां के छात्रों की इमेज देश-विदेश के लोगों में क्या बनी होगी । इस बात की कल्पना करने से एक पक्ष तो यह सामने आता है कि बदनाम हुए तो नाम न होगा क्या? दूसरा कि मुफ्त में हुए बदनाम। अब पहले पहलू को लेते हैं देश-विदेश में कुछ भी प्रतिक्रिया हो या न हो लेकिन सभ्य भारतीय समाज में अवश्य ही बीएचयू के छात्रों की छवि एक अभद्र इंसान की उभरी होगी। अपने आस-पास में कोई बीएचयू का छात्र नजर आते ही लोग सतर्क हो जाएंगे कि अपनी बहू-बेटियों को बचाओ ये बीएचयू का छात्र है कभी भी कुछ भी कर सकता है। यह तो हुई बुरी खबर।
अच्छी खबर क्या होगी? पहले ही हम अनजाने में हुई गलती की माफी मांग लेते हैं, फिर भी आइए इस पर संक्षिप्त विचार करते हैं। पाश्चात्य सभ्यता से जुड़े खुले विचारों के समर्थक लोगों और यूं सीधे-सीधे कहिये कि लिव इन या इस तरह के संबंधों के उत्सुक वर्ग में इन छात्रों की छवि आकर्षक व्यक्तित्व की तरह होगी। इससे अधिक कुछ भी कहना उचित नहीं।

Tuesday, 15 August 2017

जीएसटी मानें गरीबों से टैक्स है क्या?

देश में गरीब न हों तो न सरकार चले न कारोबार, सब भूखों मर जाएं

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस की 70 वीं वर्षगांठ के अवसर पर राजधानी नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए जीएसटी यानी गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स की तारीफ की है उसकी हकीकत आप जानना चाहेंगे। यह टैक्स गरीबों पर सीधी मार है। कोई भी बिजनेस मैन या कारोबारी अथवा मीडियेटर अपनी जेब या अपने प्रोडक्ट के रेट कम करके या अन्य किसी तरह का समझौता करके यह टैक्स नहीं भरने वाला बल्कि इस टैक्स पर अपना खर्चा जोडक़र आम जनता या कहें सीधे उपभोक्ता से वसूलेगा। यह उपभोक्ता गरीब भी है। उदाहरण के लिए एक जुलाई से लागू हुए जीएसटी के बाद जब उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में एक उपभोक्ता के घर पर एलपीजी सिलेंडर आया तो उसके बिल पर केन्द्र सरकार की ओर से 13.85 और राज्य सरकार की ओर से 13.85 रुपये का जीएसटी अतिरिक्त लगा हुआ था। यह भार प्रधानमंत्री की उज्जवला स्कीम के तहत मुफ्त एलपीजी कनेक्शन पाई उस महिला के परिवार को भी देना होगा जो गरीबी की रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहा है।
दूसरा उदाहरण एक छात्र द्वारा बैँक की प्रतियोगिता के लिए कोचिंग का है। यह छात्र अगस्त में एक कोचिंग में दाखिला लेने गया तो उससे छह हजार रुपये लिए गए तो उसे जब रसीद दी गई तो उस पर जीएसटी के 915 रुपये लगे थे। अब बताइए कि ये दोनो उदाहरण किस अमीर परिवार को टारगेट किया गया है। बैंक की परीक्षा में बैठने वाला एक गरीब छात्र ही होगा। प्रतियोगिता के युग में कोचिंग का सहारा लेना आवश्यक हो गया है।
इन दो उदाहरणों के बाद यह साफ हो जाता है कि जीएसटी की सफलता का ग्राफ जितना ऊंचा होगा। उपभोक्ता का शोषण उतना ही होगा। बाकी का अनुमान आप स्वयं लगाइए।

Monday, 14 August 2017

2019 में चुनाव होने वाले हैं तो 2022 पर ज्यादा जोर क्यों?

प्रधानमंत्री मोदी के न्यू इंडिया के मिशन से उठे कई सवाल

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के 70 वें स्वतंत्रता दिवस पर अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाने के साथ ही 2022 तक न्यू इंडिया पर ज्यादा जोर देकर नया राजनीतिक पैंतरा चल रहे थे। राजनीतिज्ञों के बीच एक सवाल यह कौंध रहा है कि जब 2019 में देश में आम चुनाव होने जा रहे हैं तो पीएम मोदी 2022 पर ज्यादा जोर क्यों दे रहे हैं। क्या मोदी 2019 में नजदीकी जीत के बाद मध्यावधि चुनाव की संभावनाएं देख रहे हैं? हालांकि उन्होंने 1 जनवरी 2018 से चुनाव प्रचार करने के संकेत देते हुए कहा कि वह 18 साल के युवाओं से लेकर रोजगार व कारोबार करने वाले युवाओं को साथ लेकर चलेंगे। प्रधानमंत्री का इशारा नए वोटरों को अपने पाले में करने का था। इसके अलावा उन्होंने कश्मीर और आतंकवादियों के कांधे से भी एक तीर छोड़ा है। इस मुद्दे से हिन्दू वोटर जहां एक ओर झुकेंगे और दूसरी और मुस्लिम व अन्य धर्मों के मतों का ध्रुवीकरण हो सकता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कश्मीरियों को कश्मीर में चली आ रही परंपरागत राजनीति से बाहर आने का संकेत दिया है और उन्हें हर तरह की सहायता देने का आश्वासन दिया है। साथ ही उन्होंने यह चेतावनी दी है कि यदि वे देश की मुख्य धारा में वापस आ जाएं वरना सरकार अपनी पूरी शक्ति से उनका दमन करने से पीछे नहीं हटेगी। साथ ही कालाधन और आयकर वंचकों को कड़ा संदेश देने के साथ ही गरीबों की हर तरह की मदद करने का भी आश्वासन दिया।

काला धन और भ्रष्टाचार पर नकेल कसी:मोदी

नोटबंदी के समय तो लोग कह रहे थे कि मोदी अब गया

एक लाख आयकर वंचक पकड़े गए, पौने दो लाख हवाला कंपनियां पकड़ीं गईं

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए कहा कि जब नोटबंदी की बात आई दुनिया को आश्चर्य हो रहा था। यहां तक लोग कह रहे थे कि अब मोदी गया। आज भ्रष्टाचार पर नकेल लगाने में हम एक के बाद एक कदम उठाने में सफल हो रहे हैं। लोगों को कालाधन को मुख्यधारा में लाना पड़ा। अभी एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि तीन लाख करोड़ रुपये बैंकिग सिस्टम में आए हैं, जो कभी नहीं आते थे। बैंकों में जमा किए गए करीब 2 लाख करोड़ रुपये संदेह के दायरे में हैं और उनको जवाब देना पड़ेगा। श्री मोदी ने कहा कि काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी।  उन्होंने कहा कि कुछ तो ऐसी शेल कंपनियां थीं जिनके एक ही पते पर कई-कई कंपनियां चलती थीं। हमने उन पर कार्रवाई की। प्रधानमंत्री ने कहा कि नोटबंदी के बाद जब डेटा माइनिंग की गई तो 3 लाख ऐसी कंपनियां पाईं गईं जो सिर्फ हवाला का कारोबार करती थीं। उनमें से पौन 2 लाख कंपनियों पर ताले लटक गए। उन्होंने कहा कि 1 लाख लोग ऐसे सामने आए हैं जिन्होंने कभी इनकम टैक्स का नाम भी नहीं सुना था, लेकिन आज उन्हें इनकम टैक्स जमा करना पड़ रहा है। नए करदाताओं की संख्या इस साल दोगुनी से भी ज्यादा हुई है। 18 लाख से ज्यादा ऐसे लोगों को पहचाना गया है जिनकी आय उनके हिसाब-किताब से ज्यादा है। सरकार बनने के बाद हमने पहला काम किया था एसआईटी बनाने का। हमने काला धन सरेंडर कराया है। जो काला धन छिपा था उसे हम मुख्यधारा में लाने में सफल रहे।

2022 तक हमें न्यू इंडिया बनाना है: मोदी

दिव्य और भव्य भारत के सपने को लेकर सभी देशवासी चलें

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए अपना राजनीतिक भाषण दिया और 2019 के चुनावों में अपनी जीत तय मानकर 2022 की तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि एक दिव्य और भव्य भारत के सपने को लेकर सभी देशवासी चलें। इसी विचार के साथ मैं आजादी के मतवालों को प्रणाम करता हूं। उन्होंने कहा कि न्यू इंडिया में हम सब मिलकर ऐसा देश बनाएंगे जहां महिलाओं को अपने सपने पूरे करने की आजादी होगी। श्री मोदी ने कहा कि हम ऐसा भारत बनाएंगे जहां भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद से कोई समझौता नहीं होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में भारत को बढ़ाने का सबसे ऊर्जावान क्षेत्र है हमारा पूर्वी भारत है। अथाह सामर्थ्य वाला क्षेत्र है। हमारा पूरा ध्यान बिहार, बंगाल, उत्तर प्रदेश, असम, नॉर्थ ईस्ट वाले हमारे राज्य हैं। पीएम श्री मोदी ने कहा कि आज आजादी का 70 और 2022 में आजादी का 75 साल मनाएंगे। 1942 से 47 के बीच देशवासियों ने अंग्रेजों के नाक में दम किया। अंग्रेजों को भारत छोडक़र जाना पड़ा। अभी पिछले सप्ताह ही क्विट इंडिया मूवमेंट के 75 साल पूरे हुए। यह वर्ष है जब चंपारण आंदोलन की शताब्दी मना रहे हैं। लोकमान्य तिलक जी ने सार्वजनिक गणेश उत्सव परंपरा को प्रारंभ किया था उसके भी इस साल 125 साल पूरे हो रहे हैं:।

Thursday, 3 August 2017

हम हिन्दू नहीं ‘आर्य’ हैं ऐसे। वेद-पुराणों ने बतलाए जैसे

हमारे देश में ‘हिन्दू’ शब्द पर काफी चर्चा होती रहती है। हिन्दू शब्द को धर्म में कैसे बदला गया। इसका प्रयोजन क्या था, इस बात का न तो प्रमाण ही मिलता है और न ही कोई महत्वपूर्ण बात ही मिलती है। पुराने ग्रंथों और महापुरुषों के जीवनकाल की घटनाओं को ध्यान से देखें तो हिन्दू शब्द कहीं भी नहीं आता है। हां आर्य शब्द अवश्य ही सभ्यता के उदय के बाद से आया है। इस बात के जगह-जगह प्रमाण भी मिलते हैं। इन प्रमाणों को एक जगह पर प्रदर्शित करने वाली एक महत्वपूर्ण कविता अथवा आप इसे भजन भी कह सकते हैं, अवश्य आपके समक्ष आर्य समाज सूरजपुर ग्रेटर नोएडा के 20 वर्षों तक प्रधान रहे पं. महेन्द्र कुमार आर्य यहां प्रस्तुत कर रहे हैं।
हमारा प्राचीन नाम हिन्दू नहीं।
कहीं भी हिन्दू नाम लिखा नहीं पाया।।
यवन काल से पहले का किसी पुस्तक में प्रमाण नहीं।
वेद,शास्त्र उपनिषद ब्राह्मण ग्रन्थों दरम्यान नहीं।
रामायण और महाभारत बतलाता कोई पुराण नहीं।
जैन, बौद्ध ग्रन्थों के अन्दर मिलता कहीं निशान नहीं।
नाटक और किसी कोषों में जिकर कहीं नहीं आया।।
कहीं भी हिन्दू नाम लिखा नहीं पाया।।
नाम आर्य पढ़ो वेद में जगह-जगह पर आया कि ना।
आर्यवाच: इस प्रकार कई ग्रन्थों में दर्शाया कि ना
शुरू सृष्टि ें आर्यों ने आर्यावत्र्त बसाया कि ना
संकल्प में भी आर्यों ने यह आर्यावत्र्त सुनाया कि ना
आर्य ब्राह्मण कुमारयो:लेख लिखा यह पाया कि ना।
मनुस्मृति पढ़ो मनु ने साफ-साफ दर्शाया।।
कहीं भी हिन्दू नाम लिखा नहीं पाया।।
वाल्मीकि रामायण अयोध्या काण्ड साफ बतलाय रहा
गीता में कृष्ण अर्जुन को आर्य कह समझाय रहा
युधिष्ठिर विजय काव्य पढ़ देखो नाम आर्य आय रहा
आर्य: ईश्वरपुत्र: यह निरुक्तकार सुनाय रहा।
काशी विश्वनाथ मन्दिर पर लिखा आर्य पाय रहा।
राष्ट्रम् आर्यस्य च उत्तमम् भविष्य पुराण जताय रहा
जैनियों का तत्वार्थ सूत्र नाम आर्य गाय रहा
आर्यों से जो भिन्न मनुष्य वह दस्यु नीच कहाया।
कहीं भी हिन्दू नाम लिखा नहीं पाया।।
संवत् 1937 काशी का सुनो हवाला जी
सावन बदी पण्डित शामिल चुने हुए थे आला जी
हमारा हिन्दू नाम नहीं यह साफ-साफ कह डाला जी
स्वामी विशुद्धानन्द बाल शास्त्री ने भी नहीं टाला जी
जिन्होंने स्वामी दयानन्द संग किया गड़बड़ झाला जी
उन्हीं लोगों ने नाम आर्य हर्षित हो अपनाया।।
कहीं भी हिन्दू नाम लिखा नहीं पाया।।
अमर कोष में आर्य शब्द का अर्थ श्रेष्ठ बतलाया है
पर्यायवाची सभ्य सज्जन साधु कुलीन कहाया है
काला काफिर गुलाम हमें नीचों से नीच ठहराया है
दयानन्द ने कही दया सोतों को आन जगाया है
सत्य सनातन वेद प्रथा का फिर से भान कराया है
ताराचन्द दिए बना आर्य हिन्दू नाम छुड़ाया है।
कहीं भी हिन्दू नाम लिखा नहीं पाया।।

प्रस्तुति महेन्द्र कुमार आर्य
सम्पर्क:9910550037

...उस दिन देश में अपने आप रामराज आ जाएगा

हमारे देश में रामराज्य बहुत ही प्रसिद्ध है। जब भी किसी अच्छे शासन देने अथवा प्रत्येक व्यक्ति के सुख-दुख का ध्यान रखने की बात की जाती है तो यही कहा जाता है कि रामराज्य लाया जाएगा। रामराज्य की यही विशेषता थी कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी चाहत-जरूरत की वस्तु आसानी से सुलभ हो जाती थी। प्रत्येक व्यक्ति सुखी था। चोरी-जारी आदि अपराध नहीं थे। कोई दुखी नहीं था। स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए आंदोलन के दौरान जब देश का नौजवान अपने प्राणों की बलि दे रहा था तब महात्मा गांधी ने कहा था कि आजादी मिलने के बाद देश में रामराज लाया जाएगा। यही विचारधारा आर्य विचारकों से युक्त राजनीतिक दलों की भी  रही है किन्तु आज देश में क्या हो रहा है, क्या यही राम राज्य है,क्या इससे रामराज कभी आ पाएगा। इन बातों पर विचार प्रस्तुत करते हुए आर्य समाज सूरजपुर के लगभग 20 वर्ष तक प्रधान रहे पं. महेन्द्र कुमार आर्य यह प्रेरणागीत प्रस्तुत कर रहे हैं।
महात्मा गांधी के वचनों को कैसे लाया जाएगा।
आज देश में जो हो रहा,क्या इससे रामराज आएगा।।
मैं बतलाता हूं कि अब कैसे रामराज देश में आएगा।
जिस दिन वेद के मन्त्रों से, धरती को सजाया जाएगा।
उस दिन मेरे देश में रामराज का त्यौहार मनाया जाएगा।।
खेतों में सोना उपजेगा, झमेगी डाली-डाली।
वीरानों की कोख से जिस दिन पैदा होगी हरियाली।।
दीन अनाथों के घर-घर में होगी जिस दिन खुशहाली।
विधवाओं के सूने मस्तक पर चमक, उठेगी जब लाली।
दीनों की कुटिया में जिस दिन दीप जलाया जाएगा।।
उस दिन देश में रामराज अपने आप आ जाएगा।।
जिस दिन काले बाजारों में, धन के चोर नहीं होंगे।
मदिरा के सौदाई जिस दिन,धन के चोर नहीं होंगे।।
अण्डे मांस के खाने वाले, रिश्वतखोर नहीं होंगे।
जिस दिन सच कहने वालों के दिल कमजोर नहीं होंगे।
भूखे बच्चों को जिस दिन,भूखा न सुलाया जाएगा।।
उस दिन देश में रामराज अपने आप आ जाएगा।।
जिस दिन वीर शहीदों की,कुर्बानी की पूजा होगी।
देश के हिम में सब कुछ दे गई उस रानी की पूजा होगी।।
उधम, भगत,सुभाष को जब कुर्बानी की पूजा होगी।
ऋषि दयानन्द के सपनों को साकार बनाया जाएगा।।
उस दिन रामराज देश में आपने आप आ जाएगा।।
प्रस्तुति महेन्द्र कुमार आर्य