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Wednesday, 15 July 2020

इंग्लैंड में 32 साल बाद फिर तहलका मचाने को बेताब वेस्ट इंडीज

वेस्ट इंडीज ने टेस्ट सीरीज के पहला टेस्ट सीरीज जीत लिया है और अब वह 32 साल के बाद फिर से इंग्लैंड में इंग्लैंड को हराने के लिए तैयार है। इंग्लैंड और वेस्ट इंडीज के बीच दूसरा टेस्ट मैच गुरुवार से शुरू होने जा रहा है। तीन टेस्ट मैचों की सीरीज का दूसरा मैच मैनचेस्टर ग्राउंड पर खेला जायेगा। अब तक वेस्ट इंडीज के नाम इंग्लैंड में तीन बड़ी जीत दर्ज हैं।
1966 में गारफील्ड सोबर्स ने दिखाया था जलवा
वेस्ट इंडीज के कप्तान गारफील्ड सोबर्स ने अपना आलराउंड खेल का प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड को पानी पिला दिया था। बैटिंग करते हुए उन्होंने 165 रनों की पारी खेली थी। टीम ने 484 रन बनाये थे। उनकी टीम के गेंदबाज लैंस गिब्स ने 37 रनों पर 5 विकेट लेकर इंग्लैंड की टीम को घुटनों के बल बैठा दिया था। इंग्लैंड की टीम कुल 167 ही बना पाई थी। इस तरह से उसे फालोआन का सामना करना पड़ा था। इसी तरह इस मैच में डेब्यू करने वाले कोलिन मिलबर्न ने भी 94 रन देकर पांच विकेट लिये थे। इस तरह से वेस्ट इंडीज ने इंग्लैंड को एक पारी और 40 रनों से हराया था। वेस्ट इंडीज ने यह सीरीज 3-1 से जीत ली थी।
1976 की जीत जबर्दस्त थी
1976 में वेस्ट इंडीज की जीत बहुत ही नाटकीय अंदाज में हुई थी। इंग्लैंड की ओर से डेब्यू करने वाले तेज गेंदबाज माइक सेल्वे ने तूफानी शुरूआत करते हुए वेस्ट इंडीज की सलामी जोड़ी रॉय फ्रेडरिक्स और आल्विन कालीचरण को शून्य पर आउट कर दिया था। इसके साथ ही धाकड़ बल्लेबाज विवियन रिचर्ड को 4 रन पर आउट करके टीम को करारा झटका दिया। इसके बाद गार्डन ग्रीनिज ने शतक बनाते हुए टीम का स्कोर 211 पर पहुंचाया। इसके जवाब में इंग्लैंड की टीम मात्र 71 रनबनाकर आउट हो गई। इसमें माइकल होल्डिंग ने 17 रन देकर पांच विकेट लिये थे। इसके बाद दूसरी पारी में भी गार्डन ग्रीनिज ने शतक बनाया और टीम की ओर से 5 विकेट पर 411 रन बनाये गये और पारी की घोषणा कर दी गई। इसके बाद दूसरी पारी में एंडी राबर्डस ने कहर बरपाते हुए 37 रन पर 6 विकेट लिये और इंग्लैंड को 425 रनों से हरा दिया। इसके बाद 1988 के मैच की सबसे खास बात यह थी कि मैल्कम मार्शल ने 22 रन देकर 7 विकेट चटकाये थे।

इंग्लैंड से भिड़ने के लिए पाक टीम ने बहाया पसीना

पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच अगले माह 5 अगस्त से टेस्ट सीरीज खेली जानी है। इसकी तैयारी के लिए पाकिस्तान की टीम फिलहाल वारेसस्टर में क्वारैंटाइन पीरियड में थी। पाकिस्तान की टीम के कई खिलाड़ी अपने देश से रवाना होने से पहले कोरोना पॉजिटिव आये थे। अब वारसेस्टर में क्वारैंटाइन पीरियड समाप्त होने के बाद टीम के खिलाड़ी डर्बी में पहुंच गये हैं। जहां उन्होंने इंग्लैंड के साथ होने वाली टेस्ट सीरीज के लिए अपनी तैयारी के लिए ट्रेनिंग की शुरूआत कर दी है। द डॉन की रिपोर्ट के अनुसार डर्बी से पाकिस्तान की टीम मैनचेस्टर एक अगस्त को रवाना होगी जहां 5 अगस्त से पहला टेस्ट मैच खेला जायेगा। 29 सदस्यीय टीम फिलहाल  दो चार दिवसीय मैच खेल कर अभ्यास करेगी। पहला इंट्रा स्क्वायड मैच 17 जुलाई से 20 जुलाई तक खेला जायेगा। इसके लिए अभ्यास बुधवार से शुरू हो गया है।इसके बाद दूसरा इंट्रा स्क्वायड मैच 22 से 27 जुलाई को खेला जायेगा। इसके बाद 29 और 30 जुलाई को प्रैक्टिस सेशन चलेगा और उसके बाद एक अगस्त को टीम मैनचेस्टर के लिए रवाना होगी जहां 5 अगस्त से ओल्ट ट्रैफर्ड में पहला टेस्ट मैच खेला जायेगा। 

Saturday, 11 July 2020

खुलासाः विकास दुबे का कितना बड़ा था गैंग

कानपुर के छोटे से गांव से दुबई, थाईलैंड में फैले काले साम्राज्य में कई दिग्गज हस्तियों के नाम 

कानपुर महानगर से मात्र 35 से 40 किलोमीटर पश्चिम में बसे ढाई हजार की बस्ती वाले बिकरू गांव में जन्मे विकास दुबे एकदम देहाती टाइप का आदमी देखने में लगता था लेकिन उसके बारे में यह जानकर सभी चौंक रहे हैं कि उस देहाती गुंडे का साम्राज्य देश में तो दिल्ली, मुंबई को छोड़िये दुबई और थाईलैंड में भी फैला था। उसके गैंग में शामिल लोगों की संख्या का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस उसके गैंग के 2500 फोन को सर्विलांस पर लगाये हुए है। उसके बाद भी कोई खास जानकारी हाथ नहीं आ रही है। अब यदि उज्जैन से कानपुर तक विकास दुबे को लाने वाली एसटीएफ टीम के दावों को मानें तो विकास दुबे के गैंग में अनेक चौंकाने वाले लोग भी शामिल थे। एसटीएफ के दावे के अनुसार उसके गैंग में उत्तर प्रदेश के दो मंत्री, 11 विधायक, 50 पुलिस अधिकारी, जिनमें दो आईपीएस और कई पीपीएस भी शामिल थे।
नेताओं और अफसरों को कैसे फंसाता था
जानकार लोगों की बात मानें तो यह कहा जा रहा है कि अपराध की दुनिया में अपना दबदबा बनाये रखने के लिए विकास ने शुरू से ही पुलिस अधिकारियों, विधायकों, मंत्रियों को अपने जान में फंसाने का काम करता रहता था। इसका फायदा पुलिस के स्थानीय अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए उठाता था। यही नही उसके संबंध प्रदेश के कुछ आला अधिकारियों से भी थे, जो उसकी जमीनी विवाद में खुलेआम मदद करते थे। विकास दुबे शातिर दिमाग का मालिक था, जितना बड़ा अफसर या राजनीतिज्ञ उतनी बड़ी रिश्वत का इंतजाम करता था। मीडिया रिपोटों का यकीन मानें तो विकास दुबे फार्म हाउस, बंगला, फ्रलैट और प्लाट तक की रिश्वत देता था। नकदी में तो वह कभी कंजूसी करता ही नहीं था क्योंकि उसे मालूम होता था कि किस अफसर से कितनी तक की कमाई की जा सकती है।

Friday, 15 May 2020

लाॅकडाउन को भेद कर शुरू होने जा रहा है क्रिकेट, पहला मैच 22 मई से यहां पर होगा

कोरोना वायरस की महामारी से ग्रसित पूरा विश्व अब धीरे-धीरे नार्मेलसी की ओर लौटने की कोशिश कर रहा है। इस महामारी से खत्म हुई खेल प्रतियोगिताएं धीरे-धीरे नये रंग ढंग में शुरू होने लगीं हैं। दक्षिण कोरिया और जर्मनी में तो खेल प्रतियोगिताएं शुरू हो गईं हैं। अब क्रिकेट प्रतियोगिताएं भी जल्द शुरू होने जा रही हैं। सबसे पहले ये प्रतियोगिता वेस्ट इंडीज में 22 मई से शुरू होने जा रही है। इसके अलावा इंग्लैंड ने भी अपने खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए अभी से प्लानिंग करनी शुरू कर दी है। वहीं भारतीय टीम के कोच रवि शास्त्राी ने भी बीसीसीआई को सलाह दी है कि पहले घरेलू क्रिकेट शुरू किया जाये। इसके बाद ही अंनरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर ध्यान दिया जाये। इसके साथ ही आईपीएल की सम्भावनाएं एक बार फिर से जाग गईं हैं। 

Wednesday, 25 March 2020

कोराना वायरस कुदरत का अल्टीमेटम है, अमेरिकी वैज्ञानिक ने दी चेतावनी

कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में तहलका मचा रखा है। दुनिया के सभी देषों में यह वायरस मौत बरसा रहा है और सम्पूर्ण विष्व के वैज्ञानिक इस नन्हें से वायरस पर काबू पाने के लिए कोई वैक्सीन नहीं बना पाये हैं। लगभग पांच माह बाद भी इस वायरस को लेकर अटकलें लगाई जा रहीं हैं कि ये जैविक हथियार है या वायरस है। इससे निपटने के लिए वैक्सीन कैसे बनेगी और कौन बनायेगा।तमाम रिसर्चर यह नहीं पता लगा पा रहे हैं कि कोरोना परिवार का यह खतरनाक वायरस मानव में कैसे पहुंचा। अब अमेरिका के वैज्ञानिक ने यह चेतावनी जारी कर दी है कि कोरोना वायरस के माध्यम से कुदरत ने खतरनाक संदेष भेजा है और मानव को एक तरह से अल्टीमेटम दिया है कि यदि अगर अभी भी तुमने कुदरत के साथ अपनी दखल बंद नहीं की तो इससे भी खतरनाक महामारी धरती में इंसानों के बीच फैल सकती है। अमेरिकी पर्यावरण विभाग के प्रमुख इनगर एंडरसन ने कहा कि आज मानव ने कुदरत के क्षेत्र में अनेक तरह से इतना दखल बढ़ा दिया है कि अब धरती अब अपनी सुरक्षा करने में असमर्थ महसूस कर रही है और मानव का यही रवैया जारी रहा तो धरती का विनाष बहुत ही निकट ही समझो। एंडरसन ने कहा कि कोविड-19 एक तरह की स्पष्ट चेतावनी है कि अगर अभी नहीं संभले तो जंगली जानवरों से होने वाली इससे भी भयानक बीमारियों का इंसान को सामना करना पड़ सकता है, जो इंसान के वष में नहीं होगा; उन्होंने कहा कि आज की सभ्यता आग से खेल रही है; आज के इंसान की जीवनषैली ऐसी हो गई है कि वह मानव को विनाष की ओर ले जा रही है। उन्होंने कहा कि आज हम आधुनिकता और बढ़ती आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए वनों को काटा रहे हैं, खेती को समाप्त कर रहे हैं, इससे जंगली जानवरी इंसान के करीब आ रहे हैं क्योंकि उनके रहने का ठिकाना इंसान उजाड़ रहा है और वे इंसानों की ओर बढ़ रहे हैं; इसलिए ये महामारी जल्दी जल्दी धरती पर आ रहीं है क्योंकि जंगली जानवरों से संक्रमण की बीमारियां फैलतीं हैं। उन्होंने इबोला, बर्ड फ्लू, स्वाइन फ्लू, मेर्स, सार्स, वेस्ट निले वायरस, जीका वायरस का जिक्र करते हुए कहा कि यह सभी वायरस जानवरों से ही इंसान में पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि यदि इंसान को इन महामारियों के प्रकोप से बचना है तो सबसे पहले धरती के बढ़ते तापमान पर अंकुष लगाये और वन्य जीवन के साथ खिलवाड़ करना बंद कर दे। संयुक्त राष्ट्र के इन्वायरमेंट प्रोग्राम की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर एंडरसन का कहना है कि दुनिया में लगने वाले जानवरों के बाजारों को समाप्त कर देना चाहिये। उन्होंने हाल ही आॅस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी भयानक आग को भी इसी का नतीजा बताया है।

Sunday, 25 August 2019

धर्म-मर्म: गरीब अमीर क्यों नहीं बन पाता, ईश्वर उसकी मदद क्यों नहीं करते?

हम अर्थ युग में जी रहे हैं। इसलिए अर्थ ही मूल स्त्रोत होने के साथ ही जीवनाधार है लेकिन सर्वाधार नहीं है। जिसके पास अर्थ यानी धन अधिक है, उसी को सुखी और संपन्न माना जाता है। हमारे इस अर्थसंक्रमित समाज में ऐसे ही धनी-मानी व्यक्तियों को मान-सम्मान मिलता है। जिस व्यक्ति के पास धनाभाव होता है,उसे उपेक्षित माना जाता है। वह व्यक्ति स्वयं को दुर्भाग्यशाली मानता है और इसके लिए ईश्वर के आश्रय होकर अनेक अपेक्षाओं को पाल लेता है। अपेक्षाएं पूर्ण न हो पाने पर ईश्वर को कोसता है। यहां तक तो हो गई आपकी सामान्य बात लेकिन धर्म-मर्म की बात यह है कि गरीब यानी धनाभाव का शिकार व्यक्ति ईश्वर का सबसे प्रिय होता है। वह पूजन-भजन करे या न करे। ईश्वर की कृपा हर क्षण उसके साथ रहती है। अब आप पूछेंगे कि यह कैसे सत्य हो सकता है। इसे तरह से समझिये कि आपके दो संतान हैं। एक संतान आपकी बात मानती है और दूसरी संतान आपकी बात नहीं मानती है। आपको जब भी कोई कार्य कराना होगा तो किससे कहेंगे। बात मानने वाले से या न बात मानने वाले से। निश्चित रूप से बात मानने वाले से ही आप अपने कार्य को करने को कहेंगे। यदि कार्य करने में कोई उसे परेशानी आएगी तो आप उसकी हर संभव मदद भी करेंगे लेकिन कार्य पूरा करने को कहेंगे। इस तरह से आपने अपनी संतानों में एक पात्र व्यक्ति खोजा। आप चाहेंगे कि यह पात्र व्यक्ति इसी तरह आपके सब काम पूरे न हो जाएं तब तक वह इसी तरह बना रहे। इसके लिए उसे आप अनुशासन का पाठ भी पढ़ा सकते हैं। अनुशासन में उसे कठोर अभ्यास भी करा सकते हैं ताकि वह हमेशा आपके काम आने के वक्त किसी तरह की कमजोरी का शिकार न हो जाए। इसी तरह से परमपिता हम सबका पिता है और वह अपने कार्य उन लोगों से कराने का संदेश देता है जो उसकी बात मानते हैं। बस सोचने का तरीका अलग है। यह ब्रह्मवाणी का संदेश है कि आप उसकी नजरों में पात्र हैं और आपसे वह अपने काम कराना चाहता है। इसलिए वह अपने अनुशासन की पाठशाला में आपको संसाधनों से सीमित कर देता है। हम अर्थ युग में हैं तो हमेंं अर्थ से अनुशासित करता है वरना श्री राम और श्रीकृष्ण भी हमारे जैसे मानव ही थे लेकिन उन्हें पात्र समझ कर ही उनसे इतना काम कराया कि वह आज पूज्य हो गये। उनके जीवन को गंभीरता से विचार करेंगे तो आज के गरीब से भी अधिक कष्टकारी जीवन उन्होंने बिताया है। 

Friday, 23 August 2019

पाकिस्तानी मीडिया का रिएक्शन: मोदी भारत के लिए खतरा क्यों हैं।

कश्मीर में धारा 370 हटाने से पाकिस्तानी मीडिया प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति क्या विचार रखता है। यह आलेख उसकी एक झलक है। जियो न्यूज से संबंधित पत्रकार मजहर अब्बास का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर प्रहार करता यह आलेख दन्यूज डॉटकाम डॉट पीके में प्रसारित किया गया है। अंग्रेजी भाषा में प्रसारित इस आलेख का हूबहू हिन्दी अनुवाद भारतीयों की जानकारी के लिए पेश किया जा रहा है। कोई आश्चर्य नहीं कि आम तौर पर यह माना जाता है कि धार्मिक कट्टरता समाज के लिए एक खतरा है क्योंकि आम आदमी का शोषण करना और संभावित परिणामों को जाने बिना उसकी फिलॉसफी को लागू करने के लिए सभी प्रकार के साधनों को अपनाना आसान है। यह तब और खतरनाक हो जाता है जब इसे भारत के मामले में भी चुनावी समर्थन मिलता है, जहाँ नरेन्द्र मोदी जैसा पूर्व आरएसएस [राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ] का कार्यकर्ता दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का प्रधानमंत्री बन जाता है और वह भी अपने दूसरे कार्यकाल में अधिक बहुमत के साथ पद पर आता है। यह अपने आप में यह दर्शाता है कि भारतीय समाज नेहरू के धर्मनिरपेक्ष भारत को पीछे छोड़ कर मोदी के हिंदुत्व की ओर बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री पद के लिए पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार के रूप में मोदी का नामांकन गुजरात में मुसलमानों के साथ अत्याचारों के साथ-साथ उनके आर्थिक सुधारों में उनकी विवादास्पद भूमिका थी। उनके कट्टरपंथी विचारों और भाजपा के भीतर कुछ डिक्टेटरशिप की आवाजों के कारण पार्टी ने उन्हें इस तरह का पद दिए जाने का विरोध किया था। लेकिन, अंत में, कट्टरपंथी मानसिकता कामयाब हो गई।
चुनावों में भाजपा की बैक-टू-बैक सफलताओं को कांग्रेस और उसके सहयोगियों जैसे धर्मनिरपेक्ष दलों की विफलता करार दिया गया था। अपने पहले कार्यकाल में, मोदी ने भाजपा, आरएसएस और शिवसेना के उग्रवादी समूहों का समर्थन किया और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर हिंदुत्व की विचारधारा का प्रसार किया। मुसलमान, सबसे बड़ा अल्पसंख्यक होने के नाते, इसका शिकार बन गया। उन्होंने पड़ोसी पाकिस्तान और इसके साथ सीमा पार आतंकवाद के साथ सीमा तनाव का भी फायदा उठाया। भाजपा ने पाकिस्तान और मोदी के खिलाफ अपना प्रचार प्रसार करने के लिए भारत के इलेक्ट्रॉनिक और कॉपोर्रेट मीडिया के एक बड़े हिस्से का सफलतापूर्वक उपयोग किया, जब दूसरे कार्यकाल के लिए मोदी को नामांकित किया गया, तो अधिक आक्रामक हो गये और अनुच्छेद 370 और 35 को समाप्त करके जम्मू और कश्मीर को भारत का हिस्सा बनाने का वादा किया।
नरेंद्र मोदी जैसे किसी व्यक्ति की बात आने पर मानवीय दुख मुश्किल से कम होते हैं। अगर गुजरात नरसंहार उन्हें दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का प्रधानमंत्री बना सकता है, तो जम्मू में अपना दूसरा कार्यकाल हासिल करने के बाद उन्होंने जो किया वह कभी आश्चर्य में नहीं आया। उन्होंने न केवल 370 और 35-ए को समाप्त कर दिया, बल्कि कश्मीरियों के प्रतिरोध को कुचलने के लिए बड़े पैमाने पर सैन्य बल का इस्तेमाल किया।
आज, वह न केवल विश्व शांति के लिए बल्कि भारतीय समाज के लिए जम्मू-कश्मीर में अपनी ताजा क्रूर कार्रवाई के बाद भारतीय समाज के लिए एक सुरक्षा जोखिम बन गए हैं, जिन्होंने भारत और पाकिस्तान को परमाणु युद्ध के करीब ला दिया है। यहां तक कि भारत समर्थक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने महसूस किया है कि मोदी अपने चरमपंथी दर्शन को लागू करने में बहुत दूर चले गए हैं।
परमाणु युद्ध बहुत संभव है जब इसका परमाणु बटन ऐसे व्यक्ति के हाथों में हो जिसे मानव दुखों के लिए कोई सम्मान और चिंता नहीं है। जो कुछ भी वह महसूस नहीं करता है वह भारत पर युद्ध का संभावित नतीजा है, या हो सकता है कि वह दोनों देशों के लाखों लोगों की मौत के लिए तैयार हो।
शायद उन्होंने सोचा था कि एक बार जब वह अनुच्छेद 370 और 35-ए को खत्म कर देंगे, तो दुनिया कुछ चिंताओं को व्यक्त करने के बाद, भारत की स्थिति को स्वीकार कर लेगी क्योंकि दुनिया ने सीमा पार आतंकवाद के भारत के कथनों को स्वीकार कर लिया है। लेकिन, इस बार की प्रतिक्रिया अलग थी और दुनिया के लगभग सभी मानवाधिकार निकाय, अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारों के महासंघ और प्रमुख विश्व शक्तियों ने भारतीय-अधिकृत कश्मीर में मानव अधिकारों की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की।
इसके अलावा, भारत के भीतर प्रतिक्रिया ने भी मोदी को आश्चर्यचकित किया क्योंकि न केवल विपक्षी दलों ने उनकी कार्रवाई को लोकतंत्र और भारतीय संविधान की हत्या के रूप में वर्णित किया, बल्कि कई शक्तिशाली स्वतंत्र आवाजों ने मोदी को परमाणु युद्ध के करीब लाने के लिए देश को जिम्मेदार ठहराया।           

Wednesday, 2 May 2018

बच्चियों के साथ रेप व उनकी हत्या क्या यही है विकसित भारत

टीवी चैनल,चैनल समाचार पत्र व सरकारी विज्ञापन के द्वारा अपनी पीठ थपथपाकर आम जनता के बीच हर सरकार प्रचार कर करती है कि भारत विकसित हो रहा है। हम इक्कीसवीं सदी में चल रहे हैं। भारत ने बहुत तरक्की कर ली है। ये भारत की तरक्की देश के प्रत्येक कोने शहर,कस्बों व गांवों में छोटी-छोटी नाबालिग बच्चियों के साथ रेप, दरिंदगी,उनकी हत्या की खबरों से लोग हैरान,दुखी व गुस्से में हैं। लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि हमारी बच्चियों की रक्षा कौन करेगा? क्या अपने देश, अपने समाज, अपने मोहल्ले में भी बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं तो बच्चे कहां जाएं। माता-पिता कि भाई किस पर करें भरोसा। अगर हम इसके बारे में विचार करेंगे तो ये विकृतियां आर्इं कहां से तथा कैसे होगी दूर यह मानसिकता। याद रहे कि रेप व हत्या की शिकार 90 प्रतिशत से ज्यादा घटनाएं अशिक्षित व गरीब परिवारों में हो रहीं हैं। हकीकत तो यह है कि समाज से नैतिक शिक्षा तथा सात्विक विचारों का पूरी तरह से खात्मा हो चुका है।  आज टीवी,फिल्म,विज्ञापन,मॉल संस्कृति आदि सभी माध्यमों में महिला को उपभोग की वस्तु बना दिया गया है। स्कूल-कॉलेजों में भारतीय संस्कृति समाप्त हो रही है। उसका अंजाम हमारे बच्चे भुगत रहे हैं। दूसरा कारण है कि कमजोर कानून भारतीय संविधान में कानून तो बहुत बनाये गये हैं लेकिन उनमें लीकेज भी बहुत हैं जिसका फायदा आपराधिक प्रवृत्ति के लोग उठाते रहे हैं। पहले लोग गांव की बेटी को अपनी बेटी मानते थे, मोहल्ले की बेटी को अपनी बेटी, शहर की बेटी को अपनी बेटी होती थी। वर्तमान स्थिति बहुत भयावह है। लोग पैसा कमाने,राजनीति करने तथा अपने अन्य भौतिक सुखों में संलिप्त हैं। स्कूलों में शिक्षा का स्तर गिर रहा है। लोगों के दिमाग में नकारात्मक विचारों के पर्सेन्टेंज बढ़ गया है। इसमें गुनाहगार हम सभी लोग हैं। याद रखों एक दिन हमारा भी जरूर आ सकता है। इस लेख के माध्यम से मेरी राजनीतिक दलों से गुजारिश है कि सदन में कठोरतम कानून लाकर 6माह के अन्दर अपराधी को मौत की सजा सुनायी जाए। कम से कम 14वर्ष से कम की बच्चियों के मामले मेें यह निश्चित हो।

राहुल गांधी अभी दिल्ली दूर है

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी पार्टी के लिए निरंतर काम कर रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं कि वह सरल स्वभाव के मालिक हैं तथा प्रयोग पर प्रयोग कर रहे हैं लेकिन लगता है कि अभी उनके राजनीति के सितारे साथ नहीं दे रहे हैं। इसके कई कारण है जैसा कि कांग्रेस पार्टी के पुराने सिपहसालार अब काम करने को तैयार नहीं हैं वो चाहते हैं कि इंदिरा,राजीव की तरह गांधी नाम के सहारे सत्ता हासिल की जाए। वस्तुत: बात ये है कि कांग्रेस के स्वर्णिमकाल जो कि लगभग 60 वर्ष के लगभग रहा। उसने इन नेताओं को आलसी व कामचोर बना दिया है। जनता के बीच जाकर संवाद करना उन्हें समय खराब करना जैसा लगता है तथा इन सीनियर नेताओं के चक्कर में युवा पीढ़ी अधेड़ अवस्था में पहुंच चुकी है। आज कांग्रेस की काम करने वाली युवा पीढ़ी का हौसला पस्त हो चुका है। कांग्रेस सिमटती जा रही है। इसके बावजूद वो चेतने को तैयार नहीं है। राहुल को हिन्दुओं के प्रति अपनी विचारधारा में दिल से बदलाव लाना होगा क्योंकि अब वक्त बदल चुका है अब आपको गांधी टाइटल का लाभ नहीं मिलेगा। आज का युवा काम चाहता है, युवा चाहते हैं कि सिर्फ मुसलमानों को ही महत्व न दे कांग्रेस हिन्दुओं को भी जोड़कर चले। दूसरे जिस बात ने उनका सबसे ज्यादा नुकसान किया है वो है सोशल मीडिया,सोशल मीडिया ने उनकी छवि कम बुद्धि के पप्पू की बना दी है।इसका भी राहुल को कुछ इंतजाम करना होगा तथा ज्यादा से ज्यादा युवाओं के भरोसे को जीतना होगा। युवाओं को मौका देना होगा। युवाओं के प्रोग्राम लाने होंगे। कांग्रेस को अपडेट करना होगा। दूसरे जो मुद्दे कांग्रेस के नेता उठायें उनमें सच्चाई हो, तार्किक हों, सिर्फ मीडिया द्वारा बनाये माहौल से कोई निर्णय न लें। पहले मुद्दे को सही जांच करें। 1 या 2 घंटे के उपवास से काम नहीं चलने वाला है।
अगर प्रधानमंत्री ने वित्त मंत्री अरुण जेटली को साधकर टैक्स व अन्य मदों में व्यापारी वर्ग को कुछ रिलीफ दे दिया तथा युवाओं को रोजगार देकर माहौल बना दिया तो राम मंदिर, पाकिस्तान,जम्मू-कश्मीर,हिन्दुत्व तो भाजपा की ताकत हैं ही। इसकी काट भी राहुल गांधी को ढूंढनी होगी। राहुल को समझना होगा कि भारत को युवा धर्म तथा सुरक्षा को पहले स्थान पर रखना, विकास के बाद में मुद्दे बहुत हैं। बलात्कार, बेरोजगारी,जातिवाद,शिक्षा, महिला सुरक्षा, बीमार व गरीबों को इलाज, भ्रष्टाचार, जनसंख्या  इन पर गंभीरतापूर्वक विचार करने वाली योग्य टीम को लगायें।  उसके बाद 2019 में कुछ संभावना बन सकती है। अपने गठबंधन वाले दलों को अपनी मजबूती भी दिखानी होगी। उन्हें बताना होगा कि कांग्रेस ही भाजपा का केन्द्र में विकल्प बन सकती है। समस्या ये भी है कि कांग्रेस की सीनियर कहें या पुरानी पीढ़ी के नेता राहुल गांधी को अपना मानना ही चाहते हैं । उनकी सोच है कि राहुल गांधी को आज भी अनुभवहीन हैं लेकिन उन्हें समझना होगा कि ईमानदारी से किया गया प्रयास कभी बेकार नहीं जाता है। जता सबको देखती है। राहुल गांधी निरन्तर मेहनत कर रहे हैं लेकिन उनको जो अपेक्षित सहयोग पार्टी नेताओं से मिलना चाहिये था वो मिल ही नहीं रहा है। कांग्रेस के पुराने नेताओं की खाल बहुत मोटी हो चुकी है वो अभी भी अपने को सरकार में समझते हैं। राहुल के जो लोग कांग्रेस छोड़कर जा चुके हैं उन्हें वापस बुलाना होगा तथा भाजपा व अन्य दलों के असंतुष्ट हैवीवेट जनाधार वाले नेताओं उचित समय देकर उनको पार्टी भी जोडकर 2019 के चुनावमें उनका इस्तेमाल करना होगा।
उपवास की गंभीरता को समझें
राहुल को धरातल पर रहकर समझना होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक मजबूत जीवट वाले नेता हैं। इस समय उनका स्वर्णकाल चल रहा है, दूसरा आरएसएस,विहिप,बजरंग दल तथा अन्य हिन्दूवादी संगठनों की फौज है, जो जमीनी स्तर पर काम करके भाजपा के लिए माहौल बनाती रही है। कांग्रेस के सहयोगी दलों को भी साधना होगा। जिग्नेश, हृदयेश पटेल जैसे बरसाती ..... से बचना होगा। कांग्रेस को अपने संगठन के सेवादल, महिला मोर्चा, युवा कांग्रेस और सबसे महत्वपूर्ण छात्र संगठन को ऊर्जा देनी होगी। तुष्टिकरण व जातिवाद की राजनीति छोड़कर राष्ट्रवाद की बात करनी होगी। हवाई बयानबाजी से बचें। पूर्व की कुछ घटनाएं उनका पीछा छोड़ने को तैयार नहीं। फटा कुर्ता पहनकर बैंक की लाइन लगना, जमीन के अभियोगी प्रस्ताव को फाड़ना तथा मैं बोलूंगा तो भूकम्प आ जायेगा, चाय वाले, पकौड़े वाले इन बयानों से बचना होगा। इसमें पार्टी की छवि जनता में गंभीर नहीं रहीं है। इनका मखौल बनाती है तो विपक्ष को बैठे बिठाये मुद्दा मिल जाता है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता हों या प्रदेश स्तर के प्रवक्ता उनमें टीवी पर डिबेट के दौरान आत्म विश्वास की कमी साफ झलकती है।
भगवा व हिन्दू आतंकवाद पर कांग्रेस क्लीन बोल्ड?
सुप्रीम कोर्ट ने स्वामी असीमानन्द, साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, कर्नल पुरोहित को मस्जिद व ट्रेन बमकांड से बरी कर कांग्रेस की हवा ही निकाल दी है। वास्तव में कांग्रेस के नेता केन्द्र सरकार के समय में सत्ता के मद में चूर होकर बयानबाजी कर रहे थे हिन्दू आतंकवाद, भगवा आतंकवाद इन शब्दों को ईजाद करने वाले कांग्रेस के कमांडेंट बैक मार चुके हैं। चाहे वो पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिल, सुशील शिंदे, दिग्विजय सिंह आदि नेताओं ने अपने हिन्दू आतंकवाद व भगवा आतंकवाद का सम्बोधन करके अपने पैरों पर स्वयं कुल्हाड़ी मार ली। इन आरोपों से भारत का बहुसंख्यक वर्ग नाराज हो गया जिसका नुकसान उन्हें 2014 के लोकसभा चुनाव में करारी हार के रूप में भुगतना पड़ा और अब जिसका इन हिन्दूवादी नेताओं को सभी आरोपों से मुुक्त कर कोर्ट ने कहा कि हिन्दू आतंकवाद या भगवा आतंकवाद कुछ नहीं है। आज बेकसूर ठहराये गये उन हिन्दूवादी नेताओं का जो समय जेलों में बीता जो-जो उन पर अत्याचार किये गये उनका कोई मुआवजा कोर्ट या सरकार उनको देगी। यह सही भी है कि अगर ये लोग बगैर अपराध किये जेल में रखे गये तो इन लोगों को  कोर्ट केन्द्र सरकार को मुआवजा देने का आदेश दें तथा झूठे आरोप लगाने वालों को भी कोई सब मिल सके।
कांग्रेस को बदलना होगा अब जनता बदल चुकी है
कांग्रेस के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी को दोबारा स्थापित करने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। वह गम्भीर व्यक्तित्व के स्वामी हैं तथा पार्टी को दोबारा खड़ा करना चाहते हैं लेकिन राहुल को पार्टी के सलाहकारों व चिन्तकों को बैठकर गम्भीरतापूर्वक मंथन करना होगा। वर्तमान युवाओं की समस्याओं को समझना होगा। इसबात को समझ जाना चाहिए कि आप 50, 60 या 70 के दशक की राजनीति अब नहीं कर सकते। सबसे बड़ी कमी कांग्रेस पार्टी की ये है कि पार्टी के सीनियर नेता कभी भी किसी आंदोलन अथवा धरना प्रदर्शन में गंभीर नहीं दिखाई देते। पार्टी के हैवीवेट नेता ही पार्टी की कमजोरी बन चुके हैं। चाहे वे मणिशंकर अय्यर हों अथवा कोई और राहुल गांधी को युवा टैलेंट को जिम्मेदारी देनी होगी तथा समय-समय पर अच्छे कार्यों के लिए युवाओं की पीठ थपथपानी होगी। एक परिवर्तन जो सामने आया है उसका लाभ निश्चित ही कांग्रेस पार्टी को मिलने जा रहा है, वह है राहुल जी का हिन्दुत्व के प्रति प्रेम तथा मन्दिरों व धार्मिक स्थलों पर जाकर बहुसंख्यक हिन्दुओं के मन में अपनी जगह बनानी कांग्रेस पार्टी को मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति के कारण यह हस्र होना ही था। आपको यह समझना ही होगा कि आप राजनीति  कर रहे हैं जहां का हिन्दू समाज भारत का रीढ़ रहा है और है भी हिन्दू समाज ने हमेशा सभी धर्मों का सम्मान किया है तथा सभी धर्मों को फलने फूलने का मौका दिया है लेकिन भारत की पहचान हिन्दू धर्म से है, हिन्द शब्द से ही हिन्दुस्तान बना है। मेरे इस लेख से हिन्दुओं को बढ़ावा न देकर कांग्रेस पार्टी के कर्णधारों को यह समझाना है कि आप हिन्दुओं को अलग करके मुस्लिम-मुस्लिम करके आगे राजनीति न कर पाओगे अब आपको सभी धर्मों को बराबर चश्मे से देखना होगा तथा समाज हित व राष्ट्रहित के मुद्दों को उठा कर जमीनी राजनीति करनी होगी। अब भठूरे खाकर उपवास नहीं चलेगा जनता जागरुक हो चुकी है।