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Sunday, 5 February 2017

ये हैं 13 मुस्लिम देश जहां बैन है ट्रिपल तलाक

भारत में टिपल तलाक पर इस समय भारी बहस छिड़ी हुई है। उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों के चुनाव के समय भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को छेड़ दिया है। भाजपा को उम्मीद है कि इस मुद्दे को उठाकर वह मुस्लिम महिलाओं के वोट को अपने पक्ष में कर सकती है। केन्द्रीय कानून मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता रवि शंकर ने रविवार को एक जनसभा में यह संकेत दिए हैं कि उत्तर प्रदेश में चुनाव के बाद केन्द्र सरकार ट्रिपल तलाक पर उचित कदम उठाएगी। उनका इशारा था कि सुप्रीम कोर्ट की रजामंदी से केन्द्र सरकार इस विवादित मुद्दे पर बैन लगा सकती है।
भारत में ये विवादित मुद्दा फिलहाल बहस में है जबकि विश्व के 13 मुस्लिम देश इस पर पहले से ही बैन लगा चुके हैं। ये देश हैं टर्की, ट्यूनिशिया, अल्जीरिया, इराक,इरान, इन्डोनेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मिस्र, जार्डन, मोरक्को, यमन और सूडान। 

राज्यसभा में जीत के लिए यूपी जीतना जरूरी:मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अलीगढ़ की जनसभा में जनता के समक्ष अपनी सरकार की मजबूरी गिनाते हुए कहा कि राज्यसभा में मेरी सरकार को जिताने के लिए यूपी में बहुमत की सरकार जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज कुछ राजनीतिक दल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव जीतने के लिए नहीं एक हुए हैं बल्कि उन्हें यह चिंता सता रही है अगर यूपी में भाजपा जीत गई तो मोदी सरकार राज्यसभा में बहुमत में आ जाएगी तो उनके लिए भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं बचेगी। उन्होंने कहा कि आज हमारी सरकार विपक्ष के नाटकीय बहुमत के आगे हार जाती है। इस कारण हम जनता से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले नहीं कर पाते और कोई फैसला करते भी हैं तो उन्हें कानून के रूप में नहीं बदल पाते हैं। उन्होंने जनता से कहा कि इसलिए यूपी में भाजपा का जीतना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब कोई महत्वपूर्ण बिल सरकार राज्यसभा में लाती है तो विपक्षी दल उसमें टांग अड़ा देते हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल राज्यसभा में विरोध करते हैं और अन्य विरोधी दल सदन से अनुपस्थित रहकर सरकार का संकट बढ़ा देते हैं।
राज्यसभा में वर्तमान समय में 245 सीटों में से भाजपा के पास 56 सीटें हैं और उसके गठबंधन की सीटें कुल 74 हैं जबकि कांग्रेस के पास 60 सीटें औंर उसके गठबंधन के पास 125 सीटें हैं। इसके अलावा अन्य छोटे दलों,निर्दलीयों और मनोनीत सदस्यों की संख्या 45 हैं। ये दल यूपीए के इशारे पर चलते हैं। आगामी 2018 में 70 सीटों पर चुनाव होने हैं। इन द्विवार्षिक चुनाव में उत्तर प्रदेश में 10 सीटों पर चुनाव होने हैं। 

भ्रष्टाचारियों सावधान, 1 अप्रैल से खैर नहीं

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नोटबंदी और कैशलेस इंडिया बनाने का अभियान अब धीरे-धीरे रंग दिखा रहा है। वो दिन दूर नहीं जब कोई भी दस रुपये की रिश्वत लेने से भी हिचकेगा। यह पहेली या कहानी नहीं बल्कि हकीकत है। सरकार ने भ्रष्टाचारियों और कालेधन पर शिकंजा कसने के लिए एक अप्रैल से 3 लाख से अधिक नकदी लेन-देन को अवैध करार दिया है और शत-प्रतिशत जुर्माना लगाने का निर्णय लिया है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार नोटबंदी और कैशलेस लेनदेन के अभियान के बाद से बड़े पैमाने पर कालाधन पकड़ा गया था। सरकार यह चाहती है कि अब फिर से कालाधन न बनने पाए। बेहिसाबी और बेनामी नकदी को अक्सर कार व बंगला व सैर-सपाटे में नकद खर्च करते हैं। सरकार ने अपनी नजर इस ओर गड़ाए रखने का संकेत दिया है। इसका असर उन लोगों पर होगा जो रिश्वत या कालाबाजारी से नकदी कमाते हैं और फिर उसे ऐशो आराम के खर्चे से ठिकाने लगाते हैं। इस तरह की कमाई करने वाले तो पकड़े जाएंगे और इस तरह के लेन-देन से जुड़े कारोबारी भी पकड़े जाएंगे। उदाहरण के तौर पर कार,बस अथवा भारी वाहन बेचने वाले डीलर नगदी में काम नहीं कर पाएंगे और जो इस तरह के कार्य करेगा पकड़ा जाएगा। इसी तरह से प्रापर्टी से जुड़े कारोबारियों पर भी शिकंजा कसा जाएगा। नोटबंदी के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक जनसभा में कहा था कि अब यह नहीं चलने वाला कि जमीन खरीद के लिए टेबल के ऊपर से कुछ और और टेबल के नीचे से कुछ और लिया-दिया जा रहा है। प्रापर्टी की खरीद में थोड़ी सी रकम का चेक दिया जा रहा है बाकी की भारी भरकम राशि का रोकड़ा नगद दिया जा रहा है। इससे यह लग रहा है कि प्रापर्टी की खरीद-फरोख्त से जुड़े कारोबारियों को राहत नहीं मिलने वाली। 

सावधान: 1 अप्रैल के बाद संभल कर खरीदें कार-बंगला

तीन लाख से अधिक की नकदी लेन-देन होगी अवैध, पूरी धनराशि होगी जब्त

नोटबंदी और कैशलेस सोसायटी अभियान के अलावा कालेधन और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए सरकार के बजटीय प्रावधान के तहत आगामी एक अप्रैल 2017 से तीन लाख से अधिक का लेन-देन अवैध होगा। इसके कालेधन की संज्ञा दी जाएगी और सरकार इस तरह की नगद धनराशि को जब्त कर लेगी। सरकार ने इस जब्ती आदेश को जुर्माना या पेनल्टी करार दिया है। राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने एक न्यूज एजेंसी को दिए आने साक्षात्कार में बताया कि वित्तीय वर्ष 2017-18 के बजट में यह प्रस्ताव किया गया है कि आगामी एक अप्रैल के बाद से 3 लाख से अधिक की नगदी लेनदेन अवैध होगा। इससे अधिक के लेन-देन पर सरकार शत-प्रतिशत जुर्माना या पेनल्टी लगाएगी। यह जुर्माना इस तरह की रकम को पाने वाले पर लगाएगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि किसी व्यक्ति ने 4 लाख रुपये का लेन-देन किया तो उस पर 4 लाख का ही जुर्माना लगाया जाएगा। इसी तरह उसने यदि 50 लाख रुपये का लेन-देन किया तो उस पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। श्री अधिया ने बताया कि ये जुर्माना धनराशि प्राप्त करने वाले पर लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद से कालेधन पर काफी अंकुश लगा है और सरकार चाहती है कि इस पर अंकुश लगा रहे और किसी तरह से कालाधन न पनप पाए। उन्होंने कहा कि लोग अधिकांशत: अपना काला धन लक्जरी आइटमों की खरीद पर लगाते हैं। ये लोग कार,बंगला,घडिय़ा, सैर-सपाटे व अन्य पर खर्च करते हैं। उन्होंने बताया कि दो लाख रुपये से अधिक के लेन-देन पर पैन कार्ड की अनिवार्यता का कानून लागू रहेगा। 

Over 3 lakh cash transaction will be black money from 1st April

Over 3 lakh cash transacted money will be freez

In a bid to check generation of black money, a steep penalty awaits those accepting cash in excess of Rs 3 lakh, beginning April 1, to settle any transaction. A ban on cash transaction of more than Rs 3 lakh has been proposed in the Budget for 2017-18. In an interview to news agency Revenue Secretary Hasmukh Adhia said the penalty for doing cash transaction will be steep and the receiver will have to pay an amount equivalent to the cash received.
"Supposing you do a transaction of Rs 4 lakh in cash, then the penalty would be Rs 4 lakh. If you do a transaction of Rs 50 lakh, penalty would be Rs 50 lakh," he said, adding that the penalty will be levied on the receiver.
So, if someone buys an expensive watch for cash, it is the shopkeeper who will have to pay the tax, he said, adding that the provision is to deter people from doing large cash transactions. Demonetisation brought to account the stock of black money and now the government wants to stop future generation of the same. The government, he said, will track all large cash transactions, and also curb the avenues of conspicuous consumption through cash. People with large sum of unaccounted money usually spend it on holidaying or buying luxury items like cars, watches and jewellery. The new cash curbs will mean that such spending avenues are curtailed, disincentivising people from generating black money. Adhia said that the previously notified rule of quoting PAN for any cash transaction above Rs 2 lakh stays. Finance Minister Arun Jaitley had in his Budget for 2017-18 proposed to insert Section 269ST in the Income-Tax Act to state that "no person shall receive an amount of Rs 3 lakh or more by way of cash in aggregate from a person in a day; in respect of a single transaction; or in respect of transactions relating to one event or occasion from a person". However, the restrictions will not apply to the government, any banking company, post office savings bank or co-operative bank. Adhia said the Budget proposes to levy penalty on a person who receives Rs 3 lakh and above. A panel of Chief Ministers headed by Andhra Pradesh Chief Minister Chandrababu Naidu had in its interim report just days before the Budget recommended a cap on cash transactions beyond a threshold and a tax on payments of over Rs 50,000 as a way of discouraging people from using physical currency.
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Saturday, 4 February 2017

Hello, fellow citizen, says Pranab

The President Pranab Mukherjee opens the annual “Udyanotsav” of the Mughal Gardens of Rashtrapati Bhavan, in New Delhi on February

अब डॉक्टर बनना हुआ मुश्किल

एमबीबीएस: नीट केवल तीन बार, उम्र केवल 25 साल

हर भारतीय माता-पिता की महती इच्छा होती है कि उसकी संतान बड़ी होकर डॉक्टर या इंजीनियर बने। इसमें भी लोग डॉक्टर को अधिक प्राथमिकता देते हैं। इसी तरह बच्चे भी डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं। सरकार ने अब डॉक्टर बनने के लिए छात्रों को सीमित अवसर देने का निश्चय किया है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एमसीआई से सलाह मशविरा करके यह निर्णय लिया है कि मेडिकल की यूजी एंट्रेंस के लिए सीबीएसई द्वारा प्रायोजित नीट परीक्षा में परीक्षार्थी केवल तीन बार ही बैठ सकेंगे। इसके लिए उनकी आयु की सीमा भी 25 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित श्रेणियों के अभ्यर्थियों के लिए आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट दी गई है। आयु की गणना प्रवेश परीक्षा की तिथि से की जाएगी। प्रवेश परीक्षा के समय आयु 25 वर्ष और 30 वर्ष से अधिक न हो।  किन्तु सभी प्रत्याशियों के लिए तीन अवसर ही दिए गए हैं। इसके अलावा यह भी निर्णय लिया गया है कि आगामी 7 मई 2017 को होने वाली प्रवेश परीक्षा से पूर्व एआईपीएमटी या नीट के माध्यम से जो अभ्यर्थी तीन बार परीक्षा में बैठ चुके हैं, उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी। नए परीक्षार्थियों के लिए परीक्षा के तीन चांस की गणना 2017 की परीक्षा से शुरू होगी।

NEET attempts to three & age limit is 25 yrs

NEET-2017 to be counted as the first attempt 

CBSE will be conducting NEET (UG) on 07.05.2017. It was decided by the Ministry of Health and Family Welfare in consultation with MCI that there shall be an upper age limit of 25 years as on the date of exam with 5 years relaxation for reserved categories and a maximum of 3 attempts for all candidates.
In the information bulletin published by CBSE on its website, it was mentioned that the candidates who have already appeared in AIPMT/NEET on three occasions are not allowed to take this examination.
It is now clarified that since any new regulation takes effect prospectively, NEET-2017 shall be counted as the first attempt for this purpose irrespective of the previous attempts in AIPMT/NEET, subject to the upper age limit. CBSE has been advised to make necessary corrections in the information bulletin and on their website cbseneet.nic.in ¬so that any application is not rejected on this ground. Data pertaining to applications already rejected will be erased so that rejected applications can be filed afresh.

What says Punjab to the Heavy turnout

Big change likely, who will be winner congress or AAp?

In Punjab heavy turnout says,”new votes go the new party. New party is Aam Aadmi Party.Although one reason of heavy votes is one hour extra time, But now comes a views about new votes. If new votes indicate about new party then AAP leader why objected about extra time. Punjab’s voter signaling about anti govt attitude.If it is true, it is clear of big change it state. It’s indication that new party to be come in power.
Despite overcast and cold conditions, the Assembly polls in Punjab saw a voter turnout of 78.62% on Saturday.“Voter turnout was 78.62% with Mansa district witnessing the highest polling at 87.34%, while the least polling was seen at 71.9% in SAS Nagar (Mohali),” a spokesperson for Punjab Chief Electoral Officer told The Hindu. The State recorded 78.57% polling in 2012.
Rasing the issue of fewer hours of voting in Punjab, Delhi Chief Minister and AAP leader Arvind Kejriwal tweeted saying: “As per EC notification, polling time in Goa from 7 a.m. to 5 p.m. but in Punjab, it is from 8 a.m. to 5 p.m. (one hr less). Why?”
AAP leader Sanjay Singh met the Chief Electoral Officer and raised the issue with him, saying that it was a discrimination with Punjabis. “Voters in large number have failed to cast vote,” he said. Political analysts say though the polling turnout was good, it is likely to be little less than the 2012 Assembly polls, when 78.57 % of voters had exercised their franchise.
“It is a good turnout, but interestingly, a lower turnout than last Assembly elections hints that by and large this election has been bipolar instead of being triangular,” Pramod Kumar, director of the Institute for Development and Communication, Chandigarh told, The Hindu.

मिनी आम चुनाव: आओ नोटा का परसेंट बढ़ाएं

मतदान जरूर करें,अपनी जिम्मेदारी निभाएं

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनाव को लोकतंत्र का पर्व बताया है। उन्होंने इसलिए कहा है कि जब से देश आजाद हुआ तब से हमारे देश में किसी भी चुनाव में 75 परसेंट से ज्यादा वोट नहीं पड़ा है। अपवाद के रूप में कभी ही इससे अधिक वोट पड़ा हो। वोट न करने वाले सबसे अधिक इस बात की दुहाई देते हैं कि जब उनके पसंद का प्रत्याशी चुनाव में खड़ा नहीं होता है तो वो क्यों अपना समय बरबाद करके वोट दें। उनका कहना सही है क्योंकि चुनाव लडऩे वाली पार्टियां अपने प्रत्याशी जनता के ऊपर थोप देतीं हैं। वे प्रत्याशी वोट लेने के समय तो मगरमच्छ के आंसू बहाते हुए अनेक उपाय करते हुए जनता को गुमराह करते हैं। हारने वाले गायब हो जाएं तो बनता है लेकिन जीतने वाले तो ऐसे गायब हो जाते हैं जैसे गधें के सिर से सींग। यदि उनके पास कोई जाए तो फिर वे वीवीआईपी बन जाते हैं यानी वे वेरी वेरी इनविजबिल परसन बन जाते हैं। लाख कोशिश करने के बाद नहीं मिल पाते हैं। तब जनता स्वयं को ठगा सा महसूस करती है। उस समय उसे अपने प्रतिनिधि की वोट मांगने वाली भूमिका याद आती है। प्रतिनिधि के न मिलने पर कार्यालय का चक्कर काटने वाली जनता में से कुछ तो ये धमकी दे आती है कि अबकी बार वोट मांगने आएंगे तब हम भी अपनी ताकत दिखा देंगे। पूरे देश का ऐसा हाल हो या न हो लेकिन उत्तर प्रदेश का ऐसा हाल जरूर है। इसीलिए हर बार चुनाव में यहां निजाम बदल जाता है। एक बाद बसपा तो एक बार सपा और एक बार त्रिशंकु यानी सभी दल त्रिशंकु महाराज की तरह स्वर्ग यानी सत्ता के रास्ते में उलटे लटके रहते हैं। इसके बाद दलबदल और खरीद-फरोख्त,रिश्वतखोरी का जो गोरखधंधा चलता है, उससे जनता की आंखे फटी रह जातीं हैं और वहीं से लोगों का दिल फट जाता है कि वोट देना बेकार है। हमने बसपा के खिलाफ भाजपा को वोट दिया और बाद में वही भाजपा और सपा ने मिलकर सरकार बना ली। तो हमारे वोट का मतलब क्या रह गया ? इस समस्या के पांव पसारते ही उसका भी समाधान निकाला गया है। इस समाधान का नाम है नोटा। नोटा यानी नाट आफ द एबव। यानी इनमें से नहीं। इसका सीधा मतलब यह है कि चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों में से कोई भी पसंद नहीं। हालांकि यह नकारात्मक है लेकिन चुनाव आयोग ने इसे भी मान्यता दी है। अब उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों के चुनाव के लिए मतदान शुरू होने वाले हैं। अब हमको यह चाहिए कि मतदान के दौरान घर बैठकर तमाशा न देखें, घर से बाहर निकलें और पोलिंग बूथ जाएं और अपना वोट दें। आपको कोई प्रत्याशी न हो हो नोटा का बटन दबाओ। इसीलिए कह रहे हैं कि आओ नोटा का परसेंट बढ़ाएं।