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Sunday, 14 September 2014

इंडीविजुअल कैसे इनकम टैक्स में अपना रेजीडेंशियल स्टेटस जानें

इंडीविजुअल कैसे इनकम टैक्स में अपना रेजीडेंशियल स्टेटस जानें
इनकम टैक्स में सर्वप्रथम करदाता को अपना रेजीडेंशियल स्टेटस जानना चाहिए।
आयकर अधिनियम 1961 की धारा 6 में इंडिविजुअल को तीन कैटेगरी में विभाजित किया गया है
(1). रेजीडेंट (आर)
(2). नाट ऑर्डिनरी रेजीडेंट (एन ओ आर)
(3). नान-रेजीडेंट (एन आर)
रेजीडेंट :
यदि कोई व्यक्ति गत वर्ष में 182 दिन या उससे अधिक भारत में रहा हो अथवा गत वर्ष में 60 दिन तथा उससे पूर्व के चार वर्षों में 365 दिन या उससे अधिक भारत में किसी भी स्थान पर रहा हो। वह व्यक्ति रेजीडेंट कहलाता है।
नाट आर्डिनरी रेजीडेंट:
यदि व्यक्ति रेजीडेंट की दो शर्तें (182 दिन से अधिक , 60 दिन गत वर्ष, उससे पूर्व 4 वर्षों में 365 दिन) में से कोई एक पूरी करे तथा (1). गत वर्ष से पूर्व के 10 वर्षों में से 2 वर्ष तथा
(2). गत वर्ष से पूर्व के 7 वर्षों में से 729 दिन से अधिक भारत में किसी भी स्थान रहा है तो वह व्यक्ति नाट आर्डिनरी रेजीडेंट  कहलाता है। उपरोक्त में से कोई भी एक पूरी शर्त करे अथवा दोनों।
नान रेजीडेंट
वह व्यक्ति जो भारत में 182 दिन तथा गत वर्ष में 60 दिन व उससे पूर्व के चार वर्षों में 365 दिन या उससे अधिक दिन भारत में किसी भी स्थान पर नहीं रहा हो। वह मूलत: 182 दिन से कम दिन भारत में रहा हो। अत: वह नान रेजीडेंट कहलाता है।
यदि कोई विदेशी व्यक्ति भारत में 182 दिन तक या उससे अधिक रहता है तो वह भारत में इनकम टैक्स के लिए उत्तरदायी है।
शर्त: इंडियन ओरिजन: इंडिविजुअल के माता-पिता या दादा-दादी (पैरेंटस या ग्रांड पैरेंटस ) अविभाजित भारत में जन्में हों।
Advise of Consultant Atul Sharma, ICA

खतरनाक बीमारी है हाइपरटेंशन या ब्लड प्रेशर


ग्रेटर नोएडा। यह बहुत ही खतरनाक बीमारी है। ओर इससे होने वाली बीमारियां इस प्रकार हैं: इसकी वजह से दिल की बीमारी जैसे कि कारोनरी हर्ट डिजीज, कन्जेस्टिव हर्ट फैल्यूरए इसचीमिक और हीरेजिक स्ट्रेक किडनी फेल्यूर और पेरी फरेव, आरटीरियल बीमारियां हैं।
शुरुआती दौर में इसमें कोई खास बीमारी के लक्षण नहीं दिखते हैं और बाद में इसमें सर दर्द होने लगता है। यह सरदर्द सुबह के समय पाया जाता है ओर सर के पीछे हिस्स में ज्यादा तकलीफ होती है। साथ ही इसमें घबड़ाहट, चक्कर आना, दिल धड़कना, कमजोरी लगना, और साथ में सेक्सुअल वीकनेस आ जाती है।
जब मरीज डॉक्टर के पास आता है तो वह घबड़ाया हुआ होता है क्येंकि उसका दिल तेजी से धड़कता है। इसके बाद उसको 5-10 मिनट के लिए अच्छे कमरे में चुपचाप आराम करने को कहते हेँ जिसें उसको थोड़ी तबियत अच्छी हो जाती है औ उसके बाद उसका ब्लड प्रेसर देखते हेँ।
 सिस्टोलिक हाइपर टेंशन
यह बीमारी दुनिया भर में पाई जाती है। ओर इससे मरने वालों की संख्या करीब छह प्रतिशत है। सिस्टोविक  ब्लडप्रेसर मनुष्यों में ज्यादा होता है औरतों के मुकाबले। ओर 60 साल और उसके ऊपर की आयु में सिस्टोविक ब्लड प्रेसर औरतों को ज्यादा होता है, मनुष्यों के मुकाबले। युुवाओं और मनुष्यों में 55 साल तक डाइस्टोविक प्रेशर बढ़ता है और इसके बादयह कम होने लगता है। सिस्टोविक और डायस्टोविक ब्लड प्रेसर में 40 का अंतर होता है। जैसे कि ऊपर वाला अगर 120 है तो नीचे वाला 80 होना चाहिए। इसके बढऩे के कई कारण है।  जैसे कि ज्यादा शरीर का वजन होना। अधिकतर यह लोग नाारमल वजन से करीब 20 प्रतिशत ज्यादा वजन के होते हैं।
साथ में नमक ज्यादा खाने से भी ब्लड प्रेसर बढ़ जाता है। साथ में कैल्शियम और पौटेशियम कम लेने से भी ब्लड प्रेसर बढ़ जाता है। इसके अलावा शराब,दिमागी स्ट्रेस और कम घूमना-फिरना भी इस बीमारी के लिए जिम्मेदार है। परिवार में अगर ब्लड पे्रसर है तो 55 साल के बाद इनमेें से 3.8 प्रतिशत लोगों को जल्दी ब्लड पे्रसर हो जाता है।
इस बीमारी का पता लगाने केलिए प्रापर हिस्ट्री बहुत जरूरी है। पारिवारिह हिस्ट्री जिससे कि परिवार में और किसी को तकलीफ है या दिल की बीमारी है।
साथ में खाना-पीना,क्या फैटीज चीजें या नमक ज्यादा लेते हें।यदि वजन बढ़ रहा है तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। साथ में पेशाब में तकलीफ य गुर्दे की बीमारी है । साथ में दिल की घबड़ाहट, चक्कर आना, नींद बार-बार उचटना,दिन में सुस्ती बनी रहना। कभी-ेकभी इसमें अचानक अन्धापन होजाता है। छाती में दर्द, हर्ट फेल्यूर और सेक्सुअल इच्छा कम हो जाती है।
ब्लड प्रेसर इसके होने से एथेरोक्वोरासिस होती है जिससे कि हर्ट फैल्यूर दिल की बीमारियां, धमनियों की बीमारी हो जाती है। इस बीमारी की वजह से दिल की बीमारियां ज्यादा होती है और इसकी वजह से सबसे ज्यादा दिल की बीमारियां होती है। इसक वजह से लेफ्ट वेन्ट्रिकल बढ जाता है। आक्री कार्डियक हर्ट फेल्यूर होता है।
हाइपरटैंशन की वजह से ब्रेन इनफारकशन होता हे ओर इसी के साथर शरीर में लकवा हो जाता है यह दोनो हाथों पैरों में हो सकता है याफिर आधे हिस्से में होता है।
प्राइमरी किडनी की बीमारियां ब्लड प्रेसर की वजह से होती है
इलाज: यदि ज्यादा वजन है तो उसकों कम करना, घी और चर्बी वाली चीजों को न लें, नमक कम लें, साथ में सुबह-शाम टहलना, समय पर सोना, इन सबको करने से ब्लड प्रेसरमें बहुत असर पड़ता है। यदि आराम न मिले तो फिर  डॉक्टर की सलाह ले लें।
डॉ. बीएन सचान
बीएससी एमबीबीएस
एक्स पीएमएस
रोशन हास्पिटल, ग्रेटर नोएडा

आपके साप्ताहिक सितारे

दिनांक 14 सितंबर से 20सितंबर तक
 भारतवर्ष में अधिकतर लोग अपने पूर्वजों की आत्माओं का आवाहन करते हैं और उनकी प्रिय वस्तुओं को दान कर उन्हें प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इसके अलवा गंगा स्नान एवं जल तर्पण करके भी लोग अपने पितरों को प्रसन्न करते हैं। ऐसा करने से लोग समृद्धिशाली बनते हैं। ऐसी स्थिति में यदि अपने भविष्य की स्थितियों को जानकर कोई कदम उठाएंगे तो वह आपके जीवन में चार चांद लग जाएंगे। इसी मान्यता के तहत हम आपको अगले सप्ताह के आपके ग्रह चाल के हाल बता रहे हैं। 

मेष: दैनिक कार्यभार की चिंता बढ़ सकती है। उच्चाधिकारी से सावधान रहना होगा। नई योजना में ऊर्जा व पूंजी का निवेश हो सकता है। स्वास्थ्य की चिंता बढ़ सकती है। अपनी समस्याओं का हल स्वयं ढूंढें। शुभ रंग- लाल। उपाय: जलता दीपक जल में प्रवाहित करें।
वृष: किसी परिचित से मनमुटाव की स्थिति आ सकती है। देव-दर्शन का योग है। मेहनत के चलते सेहत का ख्याल रखें। यह सप्ताह आपके लिए सामान्य फलदायी है। वाहन चलाते समय सावधानी बरतें। शुभ रंग-सिल्वर। उपाय: सोमवार को दूध दान करें।
मिथुन:नये मेहमान के आगमन पर प्रसन्नता बढ़ेगी। चालू योजनाएं कठिनाई से पूर्ण होंगी। शत्रुओं से सचेत रहें। साझेदारों से मनमुटाव हो सकता है। मित्रों से सहयोग मिलेगा। शुभ रंग-ब्ल्यू। उपाय: शनिदेव के सामने तेल का दीपक जलावें।
कर्क :दिनचर्या अव्यवस्थित हो सकती है। अचानक धन लाभ का संयोग बन रहा है। पुराने विवाद का पटाक्षेप होगा। बड़े अधिकारियों से सहयोग मिलेगा। देव दर्शन से लाभ होगा। शुभ रंग-स्कारलेट। उपाय: मंगलवार को गुड़ का सेवन करें।
सिंह: विवादास्पद प्रकरण समाप्त हो सकता है। ईष्र्यालु साथियों से सावधान रहें। ग्रह चाल का प्रभाव मध्यम रहेगा। जमा खाता बढ़ेगा। सांसारिक सुख साधन उपलब्ध होंगे। शुभ रंग-नीला। उपाय: तुलसी पत्र एवं कालीमिर्च का सेवन करें।
कन्या: गृह प्रपंच से अन्तर्मन क्षुब्ध रह सकता है। पुराने रोगों से छुटकारा मिलेगा। सुख सामग्री प्रचुरता से मिलेगी। भगवत भक्ति के मार्ग प्रशस्त होंगे। अपने धैर्य को कम न होने दें। शुभ रंग-पीला। उपाय: सुर्यदेव की आराधना करें।
तुला: कुछ समय बेमतलब की समस्याओं में बीतेगा। गुप्त षडय़ंत्रकारी सक्रिय हो सकते हैं, सचेत रहें। शीघ्रता में कोई बड़ा निर्णय न लें। सेहत का ध्यान अवश्य रखें। प्रेम प्रसंग के चक्कर में न पड़ें। शुभ रंग-लाल। उपाय: श्रीगणेश जी को लाल पुष्प की माला पहनाएं।
वृश्चिक: ग्रह चाल भाग्य विकास में बाधक है। संयोग-वियोग क्षोभ का कारण बन सकता है। उच्चाधिकारी की घनिष्टता का लाभ उठाएं। आलस्य का त्याग करें। दिनचर्या को सुव्यवस्थित रखें। शुभ रंग-हरा। उपाय: कनेर का पुष्प गुरु प्रतिमा पर चढ़ाएं।
धनु:नवीन कार्य की योजना बन सकती है। दोस्तों से मतभेद चल सकता है। इस सप्ताह लाभ खर्च बराबर रहने की उम्म्ीद है। अपनी महत्वपूर्ण योजना को समय से पूर्व सार्वजनिक न करें। सामाजिक मान प्रतिष्ठा के प्रति सजग रहें। शुभ रंग-लाल- उपाय: गुलाब के फूल भगवान को अर्पित करें।
मकर:आशानुसार सप्ताह श्रेष्ठ रहेगा। गृहस्थी की समस्याओं का निवारण सूझबूझ से करें। विलासिता की वस्तुओं पर अपव्यय न करें। किसी बड़े समारोह में हिस्सा ले सकते हैं। जीवन साथ्ी की भावनाओं का आदर करें। शुभ रंग- सफेद। उपाय: गुरुवार को केसर का तिलक करें।
कुंभ: चल-अचल संपत्ति के प्रति सचेत रहें। करीबी रिश्तेदारों से भी बच के रहें। व्यावसायिक निर्णय लेने में सावधानी बरतें। पारिवारिक जीवन पर ध्यान दें। अपनी महत्वाकांक्षाओं को अधिक महत्व न दें। शुभ रंग-लाल। उपाय:मंगलवार को श्रीहनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें।
मीन:आर्थिक मामलों में सतर्क रहें। यात्रा करते समय अनजान व्यक्ति पर विश्वास न करें। विरोधियों के समक्ष अपनी कमजोरी को प्रकट न करें। वर्तमान में परिश्रम का फल भविष्य में अवश्य मिलेगा। आर्थिक तंगी एवं मध्यम स्वास्थ्य का भी योग है। शुभ रंग-बैँगनी। उपाय: विटामिन ई युक्त भोजन लें।
डॉ. सिद्धनाथ तिवारी
आयुर्वेदज्ञ एवं ज्योतिषज्ञ
मोबाइल :नं. 9213382493

पितृपक्ष: इस तरह पाएं पूर्वजों का आशीर्वाद

हिंदू धर्म को मानने वाले श्राद्धपक्ष में पूर्वजों का आशीर्वाद पाने के लिए तर्पण व उपाय करते हैं। वर्तमान समय में जीवन भागदौड़ से भरा है। इसलिए कई लोगों के लिए यह संभव नहीं हो पाता कि वे पितरों के लिए तर्पण आदि कर पाएं। ऐसे में हमारे शास्त्रों में कुछ छोटे.छोटे उपाय बताए गए हैं। ये उपाय ऐसे हैंए जो किसी भी व्यक्ति की कुण्डली में शनि, राहुए सूर्य और गुरु ग्रहों की युति और उनके साथ अन्य ग्रहों के बुरे प्रभावों से बने पितृदोष को भी दूर करते हैं।
ये उपाय सुखीए सफल और वैभवशाली जीवन की राह आसान बनाने वाले माने गए हैं।
जानिए ये खास उपाय : श्राद्ध पक्ष में गरीब बच्चों को सफेद मिठाई का दान करें।
-देवता और पितरों की पूजा स्थान पर जल से भरा कलश रखकर सुबह तुलसी या हरे पेड़ों में चढ़ाएं।
-भोजन से पहले तेल लगी दो रोटी गाय को खिलाएं।
-चिडिय़ा या दूसरे पक्षियों के खाने.पीने के लिए अन्न के दानें और पानी रखें।
-पिता, गुरु व उम्र में बड़े लोगों का अपमान न करें। उनकी खुशी के लिए हरसंभव कोशिश करें।
-सफेद कपड़ों व सफेद रूमाल का दान करने से भी पितृ दोष दूर होता है।
-अनाज और फलों का दान करने से भी पितृ देवता खुश होते हैं।
-हनुमानजी के मंदिर में नियमित रूप से घी का दीपक जलाएं।
 -शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर दूध अर्पित करें। उसके बाद 5 लीटर दूध गरीब बच्चों में बांटे। यह उपाय पूरे 16 दिन करें। जिन लोगों को भी पितृ दोष है उन्हें इस उपाय को करने से बेहतर परिणाम मिलेंगे।
-हर शनिवार को पीपल या वट की जड़ों में दूध चढाएं।
 -रोज तैयार भोजन में से तीन भाग गाय, कुत्ते और कौए के लिए निकालें और उन्हें खिलाएं।
 -किसी तीर्थ पर जाएं तो पितरों के लिए तीन बार अंजलि में जल से तर्पण करना न भूलें।
-रोज माता-पिता और गुरु के चरण छूकर आशीर्वाद लेने से पितरों की प्रसन्नता मिलती है।
-जिस भी व्यक्ति की पुण्यतिथि है उसकी पसंद का पकवान बनाकर गरीबों को दान करें।
खतर

Sunday, 7 September 2014

आपके साप्ताहिक सितारे

दिनांक 8 सितंबर से 14 सितंबर तक
आज का युग अर्थ युग है और हर एक व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की समस्याओं से ग्रस्त है। इस आधुनिक जीवनशैली में इंसान अपनी समस्याओं से निजात पाने के लिए ईश्वरीय विज्ञान का सहारा लेना चाहता है। ऐसे व्यक्तियों की हम थोड़ी सी मदद करने का प्रयास कर रहे हैं । अगले सप्ताह उनके साथ क्या होने की संभावना है और होने वाली प्रमुख समस्याओं और उनसे बचाव के उपाय बता रहे हैं। यह सब ज्योतिष विज्ञान और नक्षत्रीय चाल पर आधारित फलादेश है।

मेष: क्रोध से बचें। अपनी योजनाओं को गुप्त रखें। जीवन साथी की भावनाओं का आदर करें। वाहन खरीदने की योजना बन सकती है। प्रतियोगिता में विजयी होंगे। शुभ रंग-क्रीम। उपाय: गुरुवार को चने की दाल दान करें।
वृष: लंबी दूरी की यात्रा हो सकती है। सेहत का ध्यान रखना होगा। शुभ समाचार मिल सकता है। सामाजिक, धार्मिक कार्यो में हिस्सा लेने का अवसर मिल सकता है। आयात-निर्यात फायदेमंद हो सकता है। शुभ रंग-ब्ल्यू। सावधानी:
मिथुन:स्वाथ्य के प्रति सचेत रहें। पारिवारिक कहासुनी संभव हो सकती है। यह सप्ताह आपके लिए सामान्य फलदायक है। पुराने रोग,ऋण से मुक्ति मिल सकती है। अचानक शुभ समाचार भी मिल सकता है। शुभ रंग-हरा। उपाय: रविवार को गरीबों को भोजन दें।बुधवार को उधार न दें।
कर्क :व्यक्तिगत समस्याओं को स्वयं सुलझावें। माता-पिता की सेहत की चिंता हो सकती है। धार्मिक यात्रा का विचार हो सकता है। धन-ऐश्वर्य की वृद्धि से शत्रुओं को ईष्र्या हो सकती है। शुभ रंग-अम्बर। उपाय: सोमवार को सफेद कपड़े पहनें।
सिंह: आर्थिक स्थिति में सुधार के योग प्रबल हैं। बच्चों की शिक्षा की चिंता हो सकती है। मधुरता के चलते कटुता का अनुभर हो सकता है। पुराने मित्र से अचानक भेंट हो सकती है। भूुमि,भवन और वाहन के लेन-देन में फायदा हो सकता है। शुभ रंग नारंगी। उपाय:शुक्रवार को चीनी दान दें।
कन्या: क्रिया कलापों में अभिरुचि कम रहेगी। परिवार में मांगलिक कार्यक्रम के योग हैं। सेहत पर मौसम का प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। संदिग्ध व्यक्ति से मित्रता न करें। प्रेम प्रसंग का चक्कर भी चल सकता है। शुभ रंग-गुलाबी।उपाय: गुरुवार को केला दान करें।
तुला: स्वाथ्य से संबंधित परेशानियां बढ़ सकतीं हैं। भाई-बहन की ओर से सहयोगात्मक व्यवहार बढ़ सकता है। व्यक्तित्व में निखार आएगा। आय - व्यय का संतुलन ठीक रहेगा। शुभ रंग - पीला। उपाय: शनिवार को तेल दान करें।
वृश्चिक: महत्वपूर्ण कार्यों को दूसरे पर न छोड़ें। पड़ोसियों से मत
भेद उभर सकते हैं। किसी खास उपलब्धि से मन प्रसन्न हो सकता है। मन की नवीन योजनाएं साकार हो सकती हैं। उच्चाधिकारी से वाद-विवाद हो सकता है। शुभ रंग-ब्ल्यू। उपाय: बुधवार को मूंग की दाल दान करें।
धनु:मनोरंजन के साधनों के प्रति रुझान बढ़ेगा। लंबी दूरी की यात्रा भी हो सकती है। विरोधियों से सावधान रहना होगा। इस सप्ताह में जनसंपर्क बढ़ सकता है। किसी अनजान व्यक्त् िसे फायदा भी हो सकता है। शुभ रंग - लाल। उपाय: मंगल को सात्विक भोजन करें।
मकर:यह सप्ताह सुखदायक होगा। विरोधी पक्ष से सावधान रहना होगा। धर्म और अध्यात्म का मार्ग सदबुद्धि देगा। निम्रस्तरीय संपर्क से लाभ भी संभव है। नाम और दाम दोनो ंमें लाभ मिल सकता है। शुभ रंग-स्कारलेट। उपाय: शुक्रवार को चावल दान करें।
कुंभ: संपत्ति के प्रति सावधानी बरतनी होगी। वाणी पर संयम रखना होगा। ग्रह चाल अनुकूल रहेगी। आमोद-प्रमोद में समय व्यतीत होगा। दूरदराज की यात्रा का संयोग बन सकता है। शुभ रंग - ब्ल्यू। उपाय: रविवार को सूय नमस्कार करें।
मीन:स्वास्थ्य संबंधी परेशाली आ सकती है। लोगों के बहकावें से बचें। रोग-चिंता व परेशानी आ सकती है। प्रियजन मिलन से खुशी हो सकती है। आर्थिक तंगी भी आ सकती है। कोई नई योजना भी बन सकती है। शुभ रंग- लाल। उपाय: सोमवार को शिवलिंग पर दूध चढ़ाएं।
डॉ. सिद्धनाथ तिवारी
आयुर्वेदज्ञ एवं ज्योतिषज्ञ
मोबाइल :नं. 9213382493 

शीश झुका कर लिया आशीर्र्वाद

ग्रेटर नोएडा(डीएलई)। आईटीएस डेंटल कॉलेज में शिक्षक दिवस के अवसर पर संस्थान के सभी छात्र-छात्राओं ने अपने शिक्षकों के सम्मान में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। सभा के मुख्य अतिथि सेंट स्टीफन हॉस्पिटल, नई दिल्ली के चिकित्सा अधीक्षक आमोद कुमार ने छात्रों को उनके उज्जवल भविष्य हेतु आर्शीवाद देते हुए कहा कि कोई भी शिष्य जब अपने गुरू के पास जाता है तो बिल्कुल कच्चे घड़े की तरह होता है, उसे उस विषय मे कोई ज्ञान नही होता है जिनकी शिक्षा लेने वह गुरू के पास जाता है। एक अच्छा शिक्षक उसे धीरे-धीरे सभी चीजों के से अवगत कराते हुए उसे पूर्ण बनाता है। बिना अच्छे गुरू के कभी कोई भी व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में सफल नही हो सकता है। संस्थान के निदेशक कर्नल डॉ अनमोल एसण् काल्हा ने छात्र-छात्राओं को गुरू की महत्ता समझाते हुए कहा कि गुरू का किसी भी छात्र के जीवन में सबसे अधिक महत्व होता है। किसी भी छात्र का सर्वागीण विकास गुरू के बिना संभव नही है। संस्थान के प्रधानाचार्य डॉ पुनीत आहुजा ने छात्र- छात्राओं के उज्जवल भविष्य के लिए आशीर्वाद देते हुए कहा कि आज दौर में हो सकता है कि इंटरनेट, टेक्नोलोजी, पुस्तकों और अन्य साधनो से आपको किसी विषय विशेष में जानकारी हासिल हो जाए लेकिन बिना सच्चे गुरू के आप उसका सही उपयोग नही कर सकते। अच्छे शिक्षक को परिभाषित करते हुए डॉ आहुजा ने छात्रों को बताया कि अच्छा शिक्षक वही होता है जो छात्र-छात्राओं के शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी सिखाए। संस्थान के छात्र-छात्राओं द्वारा अपने गुरूओ के सम्मान में कविता, नुक्कड़ नाटक तथा अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये। इस अवसर पर सभी छात्र.छात्राओं ने अपने सभी गुरूओ को नमन करते हुए उनका आशीर्र्वावाद लिया तथा उनके द्वारा सिखाए गए राह पर चलने की शपथ ली।

आईटीएस में माता की चौकी का भव्य आयोजन



ग्रेटर नोएडा(डीएलई)। आईटीएस इन्जीनियरिंग कॉलिज, ग्रेटर नोएडा में शनिवार को आईटीएस  के 9वें सत्र के शुभारम्भ के उपलक्ष में एक भव्य माता की चौकी का आयोजन किया गया। यह माता की चौकी संस्था द्वारा आयोजित की जाने वाली 9वीं चौकी है। इस अवसर पर आईटीएस  के विद्यार्थी माता सरस्वती की पूजा-अर्चना करके अपने ज्ञान को बढ़ाने एवं अपना भविष्य उज्जवल करने का आशीर्वाद लेते है। विद्यार्थियों के माता-पिता एवं अभिभावकगण  भी माँ को नमस्कार करके अपने एवं अपने सन्तान की सद्बुद्धि एवं उज्जवल भविष्य की मंगल कामना करते हैं। आईटीएस  द एजुकेशन ग्रुप के प्रत्येक परिसर में अलग-अलग दिवस पर 'माता की चौकीÓ के आयोजन की परम्परा 1995 से चली आ रही है व इसका निर्वाहन इंजीनियरिंग कॉलिज में 2005 से किया जा रहा है। इस अवसर पर माँ दुर्गा के साथ-साथ गणेश जी, शिवजी, कृष्णजी, भगवान राम एवं हनुमान जी की अद्भुत एवं मनमोहक झाकियॉ प्रदर्शित की गयी। एक बृहद आकार के पंडाल में भगवान की सभी मूर्तियों की स्थापना की गयी थी। चौकी का शुभारम्भ आईटीएस  द एजुकेशन ग्रुप के चेयरमैन डा. आरपी चड्ढा, वाइस चेयरमैन श्री अर्पित चड्ढा, सेकेट्री श्री बीके अरोरा, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी श्री सुरेन्द्र सूद, निदेशक डा. विनीत कंसल के द्वारा माता के पूजन एवं आराधना से हुआ। पूजा-अर्चना में आईटीएस के डीन प्रो. संजय यादव, रजिस्ट्रार गगनदीप अरोरा व सभी विभागों के विभागाध्यक्ष ने भी भाग लिया। इस अवसर पर पूरा आईटीएस, ग्रेटर नोएडा परिसर भजन एवं जय माता दी के नारो से गूँज उठा। आईटीएस  की परम्परा है कि प्रत्येक शैक्षणिक सत्र के आरंभ में माता का आशीर्वाद लेने के लिए माता की चौकी का आयोजन किया जाता है।  इस अवसर पर मध्य भोज का भी आयोजन हुआ। मध्य भोज में लगभग तीन हजार लोगों ने भोजन ग्रहण किया। माता की चौकी में सभी आईटीएस के विद्यार्थी, नवागन्तुक विद्यार्थियों के माता-पिता एवं ग्रेटर नोएडा के गणमान्य व्यक्ति सपरिवार आमंत्रित किए गए थे। ग्रेटर नोएडा एवं आस-पास के गणमान्य व्यक्तियों ने भी माता की चौकी में पूजा-अर्चना की एवं मध्य भोज में भी भाग लिया। विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ माता की चौकी में भाग लिया एवं अपने माता-पिता एवं अभिभावकों को सभी प्राध्यापकों एवं प्रबन्ध तंत्र के लोगों से मिलवाया। बीटेक के विद्यार्थियों के ग्रुप ने बताया कि हम लोग माता की चौकी का प्रति वर्ष इंतजार करते हैं क्योंकि हमे इस अवसर पर बहुत सारे लोगो से मिलने का अवसर मिलता है एव ंहमे काफी आनंद का अनुभव होता है। ज्ञात हो कि आईटीएस , ग्रेटर नोएडा में बीटेक, एमटेक, एमबीए एवं एमसीए पाठ्यक्रम मे लगभग 2500 विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। पूर्व वर्ष की भॉति इस वर्ष भी प्रत्येक पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए सीटो से अधिक विद्यार्थियो ने आवेदन किया था। एमबीए पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों की भीड़ रही। बीटेक में भी भारी संख्या में सर्वोत्तम पाए गए विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया। आईटीएस द एजुकेशन ग्रुप अपनी उच्चकोटि की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। गु्रप के विभिन्न  पाठ्यक्रमों मे पूरे देश से विद्यार्थी आते हैं। आईटीएस  के बीटेक व एमबीए पाठ्यक्रमों के सभी विद्यार्थी उद्योग जगत में अच्छे वेतन के साथ कार्य प्रारम्भ करते हैं।
विद्यार्थियों एवं अभिभावको एवं ग्रेटर नोएडा के विशिष्ठ व्यक्तियों की दर्शन के लिए लम्बी कतार से पूजा मंडप खचाखच भरा हुआ था। महिलाओं एवं पुरुषों के लिए अलग-अलग कतारों में लाग माता के दर्शन के लिए उमड  पडे थे। माता के आगोश में पहुॅचकर तथा अपना मस्तक झुकाकर आशीर्वाद लेकर पुजारी  द्वारा तिलक लगवाकर लोग अपने को अभिभूत महसूस कर रहे थे। बीच-बीच में जय माता दी के नारों से मंडप के साथ-साथ पूरा आईटीएस  परिसर गुँजायमान हो रहा था। विद्यार्थियों के अलग-अलग समूह जय माता दी के गानों एवं कीर्तन की धुन पर नृत्य करके आह्लादित हो रहा था। विद्यार्थियों के अभिभावकों से पूछने पर उन्होंने बताया कि इस तरह का पूजामय माहौल उन्होंने अपने जीवन में पहले कभी नहीं देखा था। सभी विद्यार्थी एवं अभिभावक भोज के पहले एवं भोज के दौरान एक दूसरे से मिलकर प्रसन्नचित हो रहे थे। ्रचौकी में आए हुए आईटीएस  के प्राचीन छात्रों के समूह ने बताया कि यह परम्परा आईटीएस  के प्रबन्धतंत्र के गणमान्य व्यक्तियों द्वारा प्रारम्भ की गयी थी। आज आईटीएस  का प्रत्येक विद्यार्थी माता की चौकी में भाग लेने के लिए तत्पर रहता है तथा इस शुभ दिन का इंतजार भी करता है। क्योंकि माँ की पूजा अर्चना के साथ-साथ विद्यार्थियों को अपने वरिष्ठों एवं कनिष्ठों से मिलने का अवसर मिलता है। अपने पुराने दिन को याद करके पूर्व विद्यार्थियों ने बताया कि अपने समय की माता की चौकी को याद करके हम आज भी प्रसन्नचित एवं आह्लादित हो जाते हैं। इच्छा होती है कि हमारे पुराने दिन वापस आ जाए और हम माता  की चौकी में अपने मित्रों के साथ नाचगान करें।
प्राध्यापकों ने बताया कि आईटीएस  के एक-एक विद्यार्थी के मन में माता की चौकी के प्रति उत्साह रहता है। विद्यार्थी पूछते रहते हैं कि इस वर्ष की चौकी का आयोजन किस तिथि को किया जा रहा है। विद्यार्थी पूजा-अर्चना, नाचगान एवं नाना प्रकार के व्यंजन का आनन्द उठाते हैं।

हेल्थ : खतरनाक है इबोला वायरस

कहां से आया और कैसे फैला, विशेषज्ञ भी नहीं बच सके इसकी मार से 
ग्र्रेटर नोएडा (डीएलई)।आजकल सुर्खियों मे आया इबोला वा्रयरस दक्षिण अफ्रीका से आने वालों के साथ भारत में आ रहा है।
यह वायरस बहुत ही खतरनाक है और इससे बहुत तेज बुखार होता हे और यह जानलेवा होता है। इस बीमार के होने से अचानक सरदर्द, शरीर में दर्द और बुखार हो जाता है। इसके साथ ही बीमारी के दौरान शरीर में दाने पडऩे शुरू हो जाते हैं। जो कभी भी वहां से खून निकलने लगता है और मरीज (ह्यद्धशद्म)शाक में चला जाता है।
यह बीमारी एक मरीज से शुरू होती है और चारों तरफ फैल जाती है। अधिकतर इस बीमारी के चपेट में वह लोग आते हैं जो रोगग्रस्त लोगों के आस-पास रहते हैँ।
इबोला वायरस की चार जातियां पाईं जातीं हैं। उनके नाम इस प्रकार है:- (1) जैके, (2) सूडान, (3) कोट डी इवायर और चौथी रेस्टान है। रेस्टान वायरस की बीमानी फिलीपीन्स से दूसरे देशों में फैली है।
इस बीमारी का सबसे पहले पता 1967 में जर्मनी में उस समय पता पलगा जब कुछ बन्दर (ब्ल्यू मंकी) यूगांडा से जर्मनी रिर्स के लिए लाए गए थे। इस कार्य में 25 संबंधित विशेषज्ञ अपनी सेवाएं दे रहे थे। उनमें से सात लोगों की मृत्यु हो गई थी। यह कार्य करने वाले उनके बड़ी नजदीक रहते थे। जो बचे थे उनें एक पत्नी इस बीमारी से ग्रसित हो गई थी। जांच करने पर पता चला कि आदमी के वीर्य में यह वायरस मिला था।
फिर 1999 में कांगों में सोने की खान में काम करने वालों के मारबर्ग वायरस का पता लगा था और यह बहुत ही खतरनाक था। साथ के लोगों को सफाई करने को कहा गया। यह भी इबोला जाति का वायरस है। फिर मारबर्ग वायरस से 2004-2005 में 258 केस अंगोला में मिले जो कि इबोला वायरस से मिलते जुलते थे। इससे करीब 90 प्रतिशत लोग मर गए थे। इसके बाद 1976 में 550 केस जायरे और सूडान में इबोला वायरस के मिले। यह बीमारी आदमी से आदमी को मिली थी क्योंकि वहां पर गंदी सिरिंज से इंजेक्षन दिया गया और सफाई नहीं रखी गई।
कांगो में 317 केस मिले जिनमें से 88 प्रतिशत लोग इसी इबोला वायरस से मर गए थे। यह वाकया 1995 का है। यहां पर यह पाया गया कि उनमें सफाई नहीं अपनाई गई और खाने-पीने में भी सावधानी नही बरती गई। एक साथ पानी पीना और खाना बीमारी फैलने का बहुत बड़ा कारण बना। फिर अंतरराष्ट्रीय सहायता से उन्होंने वहां अस्पताल बंद करवाए। नांक से फैलने वाली यह बीमारी बंद हो गई। फिर गाम्बिया में यह बीमारी 1994-2003 के बीच घने जंगलों में मिली। 1996 में एक डाक्टर दक्षिण अफ्रीका और एक नर्स इबोला वायरस से बचाने के लिए अच्छी इन्सेन्टिव केयर के बाद भी नहीं बचाए जा सके।उनमें भी यह वायरस मिला। वर्ष 2000-2001 में सूडान इबोला वायरस ने 224 लोगों की यूगांडा में जान ले ली। 1989 में रेस्टन इबोला वायरस की रिसर्च के लिए कुछ बंदर फिलीपींस से अमेरिका लाए गए थे उनमें से यह बीमारी मिली थी। बाद में इन बंदरों को मारा गया। इबोला वायरस चमगादड़ में रहता है। उनसे यह बीमारी मनुष्यों में फैलती है। इबोला वायरस से ग्रस्त रोगी के पसीने और उसके साथ पानी पीने से फैलती है। इनका इनक्यूवेशन समय 3-16 दिनों के बीच होता है। इसमें मनुष्य को बुखार, सरदर्द, शरीर दर्द, जी मिचलाना, और उलटी होती है। बुखार के साथ-साथ दस्त भी आने लगते हैँ।
छाती में भी दर्द होने लगता है और खांसी भी परेशान करने लगती है। इसके अलावा अंग्रेजों की खाल में से ऊपर दाने दिखाई देने लगते हैं। इन दानों से खून निकलने लगता है। किसी-किसी को बहुत ज्यादा खून की उलटी होने लगती है। साथ ही चेहरे और गर्दन पर सूजन आ जाती है। लीवर बढ़ जाता है और गले मेें खरास हो जाती है। इसके बचाव के लिए अभी जो वैक्सीन बनीं वह मनुष्यों पर कारगर नहीं हो पाई है। उपचार से बेहतर होगा कि जहां तक हो सके इस बीमारी से खुद को बचाएं।
डॉ. बी.एन. सचान
बीएससी. एमबीबीएस. एक्स पीएमस
रोशन हास्पिटल, ग्रेटर नोएडा।

तपेदिक एक राष्ट्रीय आपदा है : डॉ. हर्षवर्धन

 ईमेल संग्रह से लड़ी जाएगी बीमारी से जंग
नई दिल्ली(डीएलई)। सरकार और देश के सभी डॉक्टरों के बीच कनेक्टिविटी कायम करने के लिए एक ईमेल संग्रह तैयार करने की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य संसाधनों को एकत्र करना है, ताकि बीमारियों के बोझ को कम किया जा सके। सरकारी डॉक्टरों के साथ-साथ प्राइवेट प्रैक्टिस करने वालों को भी इसके दायरे में लाया जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉण् हर्षवर्धन ने शनिवार को यहां प्रथम राष्ट्रीय तपेदिक दवा प्रतिरोधक सर्वेक्षण का शुभारंभ किए जाने के मौके पर इस आशय की घोषणा करते हुए कहाए ईमेल संग्रह बनाने से खासकर तपेदिक के खिलाफ राष्ट्रीय जंग लडऩे में मदद मिलेगीए जिसके बारे में सूचना देना आवश्यक है। इससे सभी स्वास्थ्य अधिकारियों,सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं हेल्थ केयर प्रदान करने वालोंए जन स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं और हेल्थ केयर प्रोफेशनलों को तत्काल संबंधित सूचनाएं भेजी जा सकेंगी।डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि ष्इस ईमेल संग्रह का इस्तेमाल सभी डॉक्टरों को नए चिकित्सा ज्ञान और आईसीएमआर तथा अन्य संगठनों के अनुसंधानों से अवगत कराने में किया जा सकता है। तपेदिक रोगियों का इलाज करने वाले डॉक्टरों को अगर इलाज के कारगर तरीकों से अवगत करा दिया जाए तो इससे संबंधित मरीज लाभान्वित हो सकते हैं। मंत्री ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन  और यूएसएआईडी के सहयोग से यह सर्वेक्षण कराया जाएगा, जिसमें अब तक के सबसे ज्यादा सैंपल 5214 होंगे। इसमें 24 राज्यों की 120 टीबी यूनिटों को कवर किया जाएगा। जिन रोगियों के बीच सर्वेक्षण कराया जाएगा उनमें पहली बार इसकी गिरफ्त में आने वाले लोगों के साथ.साथ दोबारा इलाज कराने वाले रोगी भी शामिल होंगे। 13 तपेदिक रोधी दवाओं के विरुद्ध उनके प्रतिरोध स्तर का आकलन किया जाएगा। डॉ हर्षवर्धन ने तपेदिक पर मंत्रालय के मीडिया अभियान को फिर से लांच किया।
उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि ज्यादातर लोग तपेदिक के बजाय कैंसर एवं एड्स बीमारियों को लेकर अधिक जागरूक हैं। इस मौके पर भारत में डब्ल्यूएचओ की कंट्री प्रतिनिधि डॉण् नाता मेनाब्डे, डब्ल्यूएचओ के तपेदिक कार्यक्रम के डॉ. मातेओ जिग्नॉल, यूएसएआईडी की कार्यालय प्रमुख डा ् नैंसी गॉडफ्रे, स्वास्थ्य सचिव श्री लव वर्माए स्वास्थ्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव सी के मिश्रा, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ जगदीश प्रसाद, संयुक्त सचिव अंशु प्रकाश, केंद्रीय तपेदिक डिवीजन के डीडीजी डॉ् आर एस गुप्ता, केंद्रीय तपेदिक डिवीजन के अतिरिक्त डीडीजी डॉ के एस सचदेव एवं मंत्रालय तथा भागीदार एजेंसियों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। 

अब गांव-गांव में जन-जन तक पहुंचना चाहते हैं मोदी

शिक्षक दिवस पर देश के किशोंरों से रूबरू होने के बाद अब रेडियो पर जनता के सामने हाजिर होंगे पीएम
नई दिल्ली (डीएलई)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अब देश के दूर-दराज में रहने वाले हरेक व्यक्ति से रूबरू होना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने अब रेडियो के माध्यम से बातचीतक करने की योजना बनाई है। इसके लिए उन्होंने देश की जनता से ही राय मांगी है। शिक्षक दिवस पर देश के करोड़ों छात्रों को सीधे संबोधित करने के बाद मोदी अब रेडियो जैसे गांवों में सुलभ  साधन के माध्यम से जनता से संवाद स्थापित करने जा रहे हैं। अगर सब कुछ ठीक रहा तो बहुत जल्द ही प्रधानमंत्री एक निश्चित अंतराल पर देश भर की जनता के साथ रेडियो पर लाइव बातचीत करते सुने जाएंगे।  हाल ही में इस बारे में केंद्र सरकार की वेबसाइट मॉय गॉव पर जनता से सुझाव मांगे हैं।
 प्रधानमंत्री ने रेडियो पर संदेश के लिए लोगों से सुझाव मांगे हैं। लोग मॉयगोव वेबसाइट पर अपने विचार भेज सकते हैं। रेडियो पर इस संवाद प्रक्रिया को शुरू करने से पहले मोदी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि जनता उनसे किन मुद्दों पर, कितनी देर और कितने अंतराल पर बात करना चाहती है। अभी तक जनता की तरफ से जो सुझाव आए हैंए उसके मुताबिक ज्यादातर लोग हर तीन महीने पर मोदी के साथ रेडियो पर संवाद स्थापित करना चाहते हैं। अवधि तय करने के लिए अभी और प्रतिक्रियाओं का इंतजार किया जा रहा है। एक महीने से लेकर तीन महीने के बीच मोदी और जनता के बीच रेडियो पर संवाद हो सकता है।
प्रधानमंत्री बनने के बाद रेडियो पर मोदी का यह पहला संदेश होगा। वैसे प्रधानमंत्री ने पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के मौके पर स्कूली छात्र.छात्राओं को संबोधित किया था, जिसे देशभर में देखा गया। इससे पहले वह 15 अगस्त के अवसर पर लालकिले की प्राचीर से भी देश को संबोधित कर चुके हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रधानमंत्री का संदेश रेडियो पर कब प्रसारित किया जाएगा। लेकिन इस कार्यक्रम का विषय काफी विस्तृत होगा। इसमें ताजा तरीन किसी अहम मुद्दे से लेकर राष्ट्र के समक्ष चुनौतियों या किसी अन्य लोक महत्व के मुद्दे को शामिल किया जा सकता है।
कार्यक्रम की रूपरेखा पर भी अभी फैसला नहीं किया गया है। लेकिन यह पक्का है कि यह राष्ट्र के नाम प्रसारण नहीं होगाए बल्कि जनता और प्रधानमंत्री के बीच एक खुली चर्चा होगी।