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Wednesday, 11 October 2017

गुस्ताखी माफ: देखना है जोर कितना बाजुए ‘साहिल’ में है

देखना है जोर कितना बाजुए साहिल में है
हम अभी से क्या बताएं,ऐ भारत के सरजमी औ आसमां
हम लिखेंंगे 2022 में गरीबी की नई दासतां
ये बात कहां तलक सच है मान लेता ये सारा जहां
पांच साल में क्या हुआ, औ था तुमने क्या-क्या कहा
अब हमें तुम क्या सुनाओगे, गरीबी की नई दासतां
देखना है जोर कितना बाजुए साहिल में है...
बात करते हो गरीबी भारत छोड़ो की
करते हो नोटबंदी औ लगाते हो जीएसटी
पहले नोटबंदी ने मारा,फिर जीएसटी ने रुलाया
बचाखुचा इन्कम टैक्स के हौवा ने हाहा कार मचाया
कौन सुन रहा है गरीबों की दासतां
देखना है जोर कितना बाजुए साहिल में है...
तुमने भले ही चाय बेची हो, गरीबी देखी हो
आज आइना उठा देखो क्या तुम वही मोदी हो
साथी बदल गए, जमाना बदल गया
हम कैसे न माने कि फसाना बदल गया
तुमसे बहुत दूर हो गया गरीबी का रास्ता
देखना है जोर कितना बाजुए साहिल में है...
गरीबी कांग्रेस नहीं, जिसे तुम यूं ही मिटा दोगे
चहेते दौलमंदों को क्या गुरुद्वारे पर बिठा दोगे
उनकी अकूत दौलत को गरीबों में बंटवा दोगे
या फिर कोई 15 लाख का नया जुमला दोगे
अब तुम्हारा पड़ा है गरीबों से ही वास्ता
देखना है जोर कितना बाजुए साहिल में है...
वाह क्या बात है गुजरात के नगीनों करें गुफ्तगू
दयानंद,बापू और पटेल ने बिखेरी उम्दा खुशबू
जां पर खेल कर भारत मां को दिया खासमखास
इसलिए हिंदोस्तां ही नहीं, जमाना करता है याद
एक ने दिया आर्य समाज,दूसरे ने आजादी
तीसरे ने तो अखंड भारत की राह दिखला दी
अब तुम्हारे हिस्से में आया है हिंदोस्तां
देखना है जोर कितना बाजुए साहिल में है...
जुबां पर एक बार फिर ये फरियाद आती है
मोदी जी आप भी इन्हीं हस्तियों के साथी हैं
वतन वही और वही तुम्हारी माटी है
अब तुम देख रहे हो किसका रास्ता
देखना है जोर कितना बाजुए साहिल में है...
अब तुम्हारी बारी है, कुछ करक दिखलाओ
कोरे आंकड़ों से गरीबों का मजाक न उड़ाओ
क्योंकि अब तुम्हारे घर से उठी आवाज मोदी भगाओ
मोदी भगाओ, देश बचाओ, हो गई है हमसे भूल
हमनें क्यों चुना था 2014 में कमल कर फूल
2019 में ही निकालों कुछ नया रास्ता
देखना है जोर कितना बाजुए साहिल में है...
हालांकि तुम्हें याद आ गयी अपनी देहरी और अपना घर
भूले-बिसरे याद आए और पहचान ली तुमने अपनी डगर
फिर भी सभी ओर से आई आवाज, मोदी भाई करलो कुछ जतन
क्योंकि उम्मीद से ज्यादा उम्मीद कर बैठा है वतन
अब तुम ही निकालों गरीबों का कोई नया रास्ता
देखना है जोर कितना बाजुए साहिल में है...

मोदी जी नारे से गरीबी भारत नहीं छोड़ सकती

संभल कर रहिये ये पब्लिक है सब कुछ जानती है

मई 2014 में जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केन्द्र में सत्तारूढ़ हुए थे तब देश की सवा करोड़ जनता को यह विश्वास था कि यह सरकार उनके खाते में कालेधन का 15-15 लाख रुपया डालेगी। जब भाजपा की ओर से मात्र जुमला बताया गया तो लोगों को काफी धक्का लगा। इसके बाद भी लोगों ने विश्वास किया कि यह सरकार ईमानदार और गरीबों की समर्थक है। इसलिए नोटबंदी जैसा सख्त कदम भी आसानी से पचा गए कि इससे बड़े लोगों की शामत आएगी। पता चला कि उलटा हो गया और गरीबों के सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया। नंबर दो के काम खत्म तो आमदनी भी खत्म और जब आमदनी खत्म तो उनके आश्रित रहने वाले कामगारों की नौकरी भी खत्म। मतलब इसकी गाज गरीबों पर ही गिरी। 8 नवंबर 2016 के इस आर्थिक भूकंप की मार से अभी उबर भी नहीं पाए थे कि जीएसटी का बवाल सिर पर आ गिरा वह भी 28 प्रतिशत टैक्स का। एक चौथाई से अधिक टैक्स का। इस झटके ने दरिद्रनारायण के शरीर से एक और चिथड़ा उतार लिया। अब फिर से छोटे व्यापारी और कल कारखाने वालों ने अपने मातहतों के समक्ष हाथ खड़े कर दिये। इसका नतीजा यह हुआ कि आम आदमी सडक़ पर आ गया। पेट्रोल पर केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच चल रहे बंदरबाट के खेल से आम आदमी कराह उठा। आम आदमी तो छोडिय़े छोटे मझोले कारोबारी अपने लेन-देन से इतने तनावग्रस्त हो गए कि आत्महत्या जैसा घातक कदम उठाने को मजबूर हो गए हैं। अब मोदी जी ने  संघ प्रचारक नानाजी देशमुख की जन्मशती और जयप्रकाश नारायण की जयंती पर भारत गरीबी छोड़ो का नारा बुलंद करते हुए अपने लिए 2019 की जमीन तैयार करने की पटकथा लिखनी शुरू कर दी है। मोदी जी उत्तर प्रदेश के हजारों स्कूलों में मध्यान्ह भोजन यानी मिड डे मील जिसे एमडीएम भी कहा जाता है, का अन्न नहीं पहुंचा है आप गरीबी हटाने की बात कर रहे हैं। यह असंभव बात है। देश को कांग्रेस मुक्त आपने नहीं कांग्रंस ने खुद बनवाया है। आपको शायद यह गलतफहमी हो गई है कि आपने देश को कांग्रेस मुक्त का नारा दिया और देश कांग्रेस मुक्त हो गया। मोदी जी ऐसे ही गरीबी भारत छोड़ों का नारा देने और कुछ सरकारी आंकड़ों के दिखाने भर से काम नहीं चलने वाला। गुजरात और महाराष्ट्र के निकाय चुनाव के भरोसे न बैठिये। गुजरात तो आपका गढ़ है। वहां विधानसभा चुनाव में आपको सफलता एक बार मिल भी सकती है लेकिन गरीब तो पूरे देश में हैं और वोटिंग के दिन वह गरीब नहीं जनार्दन यानि मालिक बन जाता है, आपके किस्मत की रेखा वहीं तय करेगा। इस बात को सोच कर चेतिये वरना जब इंदिरा गांधी को कोइ्र नहीं बचा सकता तो आप तो अभी पांच साल की पहली पारी पूरी करके मैदान में आने वाले हैं। ये जनता जनार्दन है। आपसे पूरे पांच साल का हिसाब लेगी। पास फेल तो वह सीधे चुनाव में करेगी। नाना देशमुख की जयंती पर  पीएम ने कहा कि नानाजी देशमुख और लोकनायक जेपी ने मातृभूमि की सेवा की। दोनों महापुरुषों ने अपना जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गांवों और शहरों को समान सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शहर को गांवों के लिए मार्केट बनना चाहिए। पीएम ने कहा कि दीपावली के दीये गांव के कुम्हार से खरीदें। उन्होंने कहा कि 18000 गांव ऐसे थे जो कि 18वीं शताब्दी में जी रहे थे वहां पर बिजली भी नहीं थी। हमने लालकिले से 1000 दिन में इन गांवों में बिजली देने का बीड़ा उठाया, अब तक 15,000 गांवों में बिजली पहुंचा चुके हैं। हमारी सरकार मुफ्त में बिजली कनेक्शन दे रही है। पीएम मोदी ने कहा कि देश में कमी संसाधनों की नहीं बल्कि सुशासन की है। ग्रामीण विकास के लिए सुशासन का प्रयास जारी है. आने वाले दिनों पर ग्रामीण विकास पर सरकार का ज्यादा जोर होगा. जिन राज्यों में ज्यादा गरीबी है, वहां मनरेगा का काम कम हो रहा है। जिन राज्यों में सुशासन है, वहां मनरेगा का काम ज्यादा हुआ है।मोदी ने आगे बताया कि देश में गरीबी भारत छोड़ो अभियान चलाया जा रहा है और 2022 तक इसको पाने की कोशिश होगी। मोदी ने कहा कि टिंबर की खेती लोगों के लिए काफी फायदेमंद हो सकती है। कार्यक्रम में मोदी ने शौचालय बनाने और गंदगी को खत्म करने की भी बात की। प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में केवल वोट का अधिकार नहीं है, बल्कि जनता की भागीदारी भी काफी जरूरी है। सरकार हर योजना की समीक्षा कर रही है। 

नाबालिगों का विवाह ही क्यों?

शर्मनाक: 27प्रतिशत शादियां नाबालिगों की ही होती हैं

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अन्तर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है कि नाबालिग पत्नी के साथ संबंध बनाना रेप माना जाएगा। साथ ही कोर्ट ने सरकार से बाल विवाह  रोकने को कहा है। अब सवाल उठता है कि ये स्थिति क्योंआई कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष ऐसा वाद क्यों पहुंचा कि नाबालिग पत्नी के साथ संबंध बनाने पर अपराध है या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट से इतर आज बालिका दिवस भी है। इस अवसर पर हमें यह जानकर शर्म आती है कि आज भी देश में जितनी शादियां होतीं हैं उनमें से 27 प्रतिशत शादियां नाबालिग कन्याओं की होती हैं। कहा जाता है कि कथित रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान,मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड जैसे राज्यों में बाल विवाह की सबसे अधिक प्रथा प्रचलित है। जब ये आंकड़े सरकार के सामने आते हैं। तो सरकार क्या करती है। जब सुप्रीम कोर्ट को यह मालूम है कि अक्षय तृतीया के दिन इन राज्यों में बड़ी संख्या में सामूहिक रूप से बाल विवाह होते हैं। सरकार को चाहिए कि कानूनी सख्ती करने के साथ ही जागरुकता लाए। मैं कहता हूं कि सरकार बनाने के लिए और चुनाव जीतने के लिए आप वोटरों को अपनी पार्टी के प्रति जागरुक कर सकते हैं तो देश के भविष्य के लिए आप क्या नहीं कर सकते हैं। सिर्फ इच्छा शक्ति होनी चाहिए। हम 21 वीं शताब्दी में जी रहे हैँ , जहां गांव का अनपढ-अशिक्षित व्यक्ति भी आपको एंड्रायथ फोन धड़ल्ले से चलाता मिल जाएगा। उसे डंडे से हांकने की आवश्यकता अब नहीं रह गई है अब आवश्यकता है उसे समझाने  और उसके फायदे की बात बताने की है ताकि ऐसी नौबत ही न आए कि नाबालिगों के साथ किसी तरह का अत्याचार हो। 

Tuesday, 10 October 2017

‘छोटी कुर्सी’ के लिए छिड़ी महाभारत और ‘बड़ी कुर्सी’ के लिए क्या...

समाजवादी पार्टी की ओर से पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आजकल अपनी राजनीति चमका रहे हैं। इसके दो कारण है। पहला तो वह 2019 में अपनी पार्टी को अच्छे परिणाम दिलाना चाहते हैं। समाजवादी पार्टी में यह परंपरा है कि चुनाव से दो वर्ष पूर्व मैदान में उतर कर अपने समर्थकों और मतदाताओं को मनाने की कोशिशें करते रहो चुनाव अपने आप जीत जाओगे। उनकी यह बात सही है। अब उन्होंने कहा कि बड़ी कुर्सी छीन लेंगे। ठीक है छोटी कुर्सी के लिए परिवार में महाभारत के हालात है तो बड़ी कुर्सी के लिए क्या होगा? कभी इस पर विचार करोगे और एक बार मान भी लिया कि अच्छी इमेज और पढ़े लिखे युवा होने के नाते आपको बड़ी कुर्सी छीनने में कामयाबी मिल भी गई तो उस पर किसे बिठाओगे टीपू भइया। सारा देश देख रहा है कि कोई ऐसा चेहरा तो सामने आए जो इस कांटों भरी बड़ी कुर्सी पर बैठने को तैयार हो। रही बात कांग्रेस की तो उसकी दशा तुम्हारे सामने ही है। क्योंकि इसी सभा में अखिलेश ने कहा कि कांग्रेस के साथ गठजोड़ तो जारी रखेंगे। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने सहारनपुर के तीतरों में एक जनसभा को संबोधित करते हुए बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने हमसे छोटी (सीएम) की कुर्सी छीनी है लेकिन हम उनसे बड़ी (पीएम) की कुर्सी छीनेंगे। इसके इतर अखिलेश ने ईवीएम की गड़बड़ी की ओर इशारा करते हुए बीजेपी पर आरोप लगाया कि हम विधानसभा चुनाव में हारे नहीं बल्कि हमें धोखे से शिकस्त दी गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी यशपाल सिंह की जयंती के मौके पर सहारनपुर में जुटी भीड़ को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी समाज को बांटने का काम करती है, जातिवाद की राजनीति करती है। एसपी सुप्रीमो अखिलेश ने कहा कि 'अब हम भी जातिवाद की राजनीति करेंगे। हमने विकास की राजनीति की थी लेकिन हमें वोट नहीं मिला इसी वजह से अब जातिवाद की राह पर चलना होगा।

भाजपा ने फिर पीट दिया...


अब क्या करेंगे कांग्रेस के युवराज

कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केक गढ़ गुजरात के बड़ोदरा में अजीबोगरीब बयान दिया। उन्होंने कहा कि 2014 में भाजपा ने हमे इतना पीटा कि हमारी आंखें खुल गईँ। साथ ही यह भी कहा कि हम सत्ता में आएंगे तो सबसे पहले महंगाई पर काबू पाएंगे। वहां उपस्थित किसी ने पूछा कि आपके पास महंगाई रोकने का क्या फार्मूला है तो इसके जवाब मेकं उन्होंने कहा कि पेट्रोल की कीमतें सबसे पहले कम करें क्योंकि यही महंगाई की जड़ हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जो आप कपड़े पहन रहे हैँ, खा पी रहे है या कोई भी वस्तु बाजार से खरीद रहे हैं उसमें पेट्रोल की कीमतों की बहुत बड़ी भूमिका है। सोशल मीडिया में यह भी टिप्पणी आई कि राहुल गांधी अपने कांग्रेस शासित राज्यों में महंगाई को रोकने के लिए पेट्रोल कीमतें कम करने को कहें। पंजाब में सबसे अधिक महंगाई है। उसके लिए राहुल कुछ करेंगे। अभी यह बात चल ही रही थी कि अचानक दिन में खबर आई कि गुजरात और महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में भाजपा की जबर्दस्त विजय हुई है और कांग्रेस सिमट कर रह गई है। महाराष्ट्र में हाल ही में हुए ग्राम पंचायत चुनावों में दमदार जीत के बाद बीजेपी के लिए विधानसभा चुनाव से पहले गुजरात से भी अच्छी खबर आई है। यहां स्थानीय निकाय चुनाव में बीजेपी ने बड़ी जीत दर्ज की है। बीजेपी ने 7 में से 5 सीटें जीत ली है। कांग्रेस की सीटें घटकर आधी रह गई।इससे पहले महाराष्ट्र में पहले चरण के मतदान रिजल्ट में बीजेपी ने करीब 50 फीसदी सीटों पर कब्जा जमा लिया। 7 अक्टूबर को हुए 3,884 ग्राम पंचायत चुनावों में से 2,974 पंचायत के नतीजे मंगलवार को घोषित हुए जिसमें बीजेपी को 1457 सीटों पर जीत मिली। महाराष्ट्र पंचायत चुनाव में मिली इस बड़ी जीत पर पीएम नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को बधाई दी है और इसके लिए महाराष्ट्र की जनता का शुक्रिया अदा किया है। ग्राम पंचायत चुनावों में दूसरी पार्टियां बीजेपी से काफी पीछे हैं। इसमें कांग्रेस को 301 सीटें मिली हैं। वहीं 222 सीटों पर शिव सेना ने कब्जा किया है। एनसीपी ने 194 सीट पर बाजी मारी है। इस पर यह भी तंज आया कि भाजपा ने फिर पीट दिया। अब कांग्रेस के युवराज क्या फिर से भाजपा को यह कहते हुए धन्यवाद देंगे कि महाराष्ट्र और गुजरात तुम ले जाओ हम यूपी के निकाय चुनाव में इसका बदला लेंगे। राहुल जी तैयार रहिये यूपी में निकाय चुनाव अगले माह के अंत में होने वाले हैं। 

Monday, 9 October 2017

राहुल को पीएम बनने के लिए पहले आत्मविश्वास ढूंढना होगा

मोदी के सामने ब्रह्मास्त्र चलाना आसान नहीं, यूपी में पीके फार्मूला ने कांग्रेस में फूंकी थी जान

राहुल गांधी पीएम बननें और 2019 में कांग्रेस को सत्ता में लाने के लिए गुजरात में पूरी दमखम लगा रहे हैं। इस बीच यह खबर मिली कि उन्हें मोदी को हराने के लिए एक अमेरिकी कंपनी रूपी ब्रह्मास्त्र मिल गया है। पहले यह परंपरा थी कि ब्रह्मास्त्र उसे ही दिया जाता था जो इसको चलाने में पारंगत होता था। अब पहले ब्रह्मास्त्र को चलाने की विद्या राहुल को सीखनी होगी वरना यूपी जैसा ही हश्र होगा। चुनाव से पहले जब कांग्रेस ने पीके को कमान सौंपी थी। पीके ने अपना फार्मूला अपनाया था, जिसने शुरुआती  चरण में 27 वर्ष से मृतप्राय पड़ी कांग्रेस में जान फूंक दी थी। फिर अचानक कांग्रेस ने सपा से समझौते की बात छेड़ दी और समझौता किया तो उसका हश्र सामने आ गया। अब पहले राहुल गांधी आत्म विश्वास पैदा करें और लोगों पर विश्चास करना सीखें तभी कुछ बात बन सकती है। यही मौका है कि राहुल गुजरात को सीढ़ी बनाकर आगे बढें और अगले साल कई राज्यों में चुनाव हैं यदि आज से कमर कस कर कुछ काम करें तो बात बन सकती है और जिस तरह से आम जनता मोदी के शासन के तीन साल में ऊब गई है उसका फायदा मिल सकता है वरना कोई भी ब्रह्मास्त्र राहुल को पीएम की गद्दी तक नहीं पहुंचा सकता।
क्या कांग्रेस को 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए ब्र्रह्राास्त्र मिल गया है? रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस कैंब्रिज ऐनालिटिका नाम की उस चर्चित कंपनी के संपर्क में है जिसने पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डॉनल्ड ट्रंप को जितवाने में अहम भूमिका निभाई थी। दरअसल, कैंब्रिज ऐनालिटिका कन्ज़्यूमर्स के इंटरनेट डेटा का विश्लेषण करके यह पता लगाने का काम करती है कि लोगों को क्या पसंद-नापसंद है, लोगों के लिए मुद्दे क्या हैं ताकि नेता उसी हिसाब से अपनी रणनीति तैयार कर सकें। इस विश्लेषण में ऑनलाइन सर्च, ईमेल और यहां तक की शॉपिंग वेबसाइट्स को भी खंगाला जाता है।  2014 के लोकसभा चुनाव में जब यह बात सामने आई कि बीजेपी सोशल मीडिया को भी ध्यान में रखकर चुनावी रणनीति तैयार कर रही है तो राजनीतिक पंडितों ने इसे ज्यादा तवज्जो नहीं दी। उनका मानना था कि भारत की ग्रामीण जनता का इससे कोई सीधा ताल्लुक नहीं है, लेकिन बीजेपी की शानदार जीत ने यह साबित किया कि मतदाताओं के समूह की पहचान करने और फिर उन्हें ध्यान में रखते हुए चुनावी रणनीति बनाने में इंटरनेट का भारी योगदान रहा। बीजेपी और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोशल मीडिया पर काफी ऐक्टिव रहते हैं और उसके जरिए उन्होंने कई बड़े अभियान भी चलाए हैं। स्मार्ट ऑनलाइन कैंपेन के जमाने में अब पुरानी चुनावी रणनीतियां और तरीके उतने कारगर नहीं रहे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कैंब्रिज ऐनालिटिका के सीईओ अलेग्जेंडर निक्स ने अगले लोकसभा चुनाव में यूपीए के लिए चुनावी रणनीति बनाने के सिलसिले में विपक्ष के कई नेताओं से मुलाकात की है। कंपनी ने कांग्रेस को एक प्रेजेंटेशन भी दिया है जिसमें वोटरों को ऑनलाइन साधने की रणनीति को विस्तार से बताया गया है।
बता दें कि कैंब्रिज ऐनालिटिका का लोहा आज पूरी दुनिया मान रही है। कंपनी ने न सिर्फ अमेरिका में ट्रंप की जीत में बड़ा रोल निभाया, बल्कि ब्रेग्जिट को लेकर हुए जनमत संग्रह में भी कमाल दिखाया। ऐनालिटिका ने ब्रेग्जिट के पक्ष में कैंपेन चलाया था जिस पर ब्रिटेन की जनता ने भी मुहर लगाई। दुनियाभर की कई राजनीतिक पार्टियां आज कंपनी के संपर्क में हैं। माना यह जा रहा है कि अगर सही वोटरों को टारगेट कर के ट्रंप जैसे उम्मीदवार चुनाव जीत सकते हैं तो फिर अन्य लोग भी जीत सकते हैं। बता दें कि अमेरिकी चुनाव की शुरुआत में ट्रंप को काफी कमजोर माना जा रहा था। अपने चुनावी अभियान में ट्रंप ने विदेशी कामगारों को लेकर सख्त रवैया अपनाया था, लेकिन फिर भी वह हिंदुओं को लुभाने में कामयाब रहे। बताया जाता है कि यह रणनीति कंपनी के उस डेटा पर आधारित थी जिसमें बताया गया था कि कुछ अहम राज्यों में हिंदू वोटर्स अपना पाला बदल सकते हैं। यह कंपनी की सुझायी रणनीति ही थी कि ट्रंप ने भारतीय वोटरों को लुभाने के लिए हिंदी में विज्ञापन जारी किए। वर्जिनिया में ट्रंप की बेटी एक हिंदू मंदिर में दीपावली मनाती नजर आईं और ट्रंप यह कहते देखे गए कि वाइट हाउस में भारतीयों और हिंदू समुदाय का एक सच्चा दोस्त पहुंचेगा। अभी तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाए जाने वाले ऑनलाइन अभियानों की कोई काट विपक्ष नहीं ढूंढ पाया है। मोदी की सीधे वोटरों तक पहुंचने की कला और बीजेपी चीफ अमित शाह की चुनावी रणनीति, मतदाता की इच्छाओं के विश्लेषण के आधार पर ही तैयार होती है। अभी तक इस मोर्चे पर कमजोर माने जाने वाले विपक्ष ने भी अब इसी रास्ते पर आगे बढऩे का फैसला किया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या कैंब्रिज ऐनालिटिका जैसी कंपनी के सहारे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अगले लोकसभा चुनाव में मोदी को हरा पाएंगे? इस सवाल का जवाब शायद वक्त और डेटा ही तय करेंगे।

Sunday, 8 October 2017

स्ट्रीट फ़ाइट के साथ होम फाइट के लिए तैयार रहिए मोदी जी!

बीबीसी के अनुसार नरेंद्र मोदी की कई ख़ूबियों में से एक ख़ूबी ये है कि वो ज़रूरत पडऩे पर बेखटके प्रधानमंत्री की गरिमा वाला चोला उतार फेंकते हैं और फिर अपना पुराना स्ट्रीट फ़ाइटर वाला चोला पहन लेते हैं जिसे पहनकर उन्होंने अब तक भारतीय जनता पार्टी के भीतर और बाहर के विरोधियों को परास्त किया है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक साधारण प्रचारक से देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे हैं। लेकिन मोदी जी इस बार फाइट अपने घर से शुरू हो गई है। यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी बाहर के नहीं बल्कि आपके घर के ही लोग हैं। अभी तो यह शुरुआत हुई है।
लोकसभा चुनाव जीतने और प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने शायद ही फिर कभी युवराज कहकर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का मखौल उड़ाया हो पर पिछले हफ़्ते हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनावों के लिए अपनी पार्टी के प्रचार अभियान की शुरुआत करते हुए उन्होंने फिर से राहुल गांधी का मज़ाक उड़ाने के अंदाज़ में उन्हें युवराज कहा और कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष और युवराज सहित पूरी कांग्रेस पार्टी ज़मानत पर है.
स्ट्रीट फ़ाइटर वाला चोला पहनते ही मोदी अपने विरोधियों को जोकरों की जमात में बदलने की कोशिश करते हैं ताकि उन पर हमला बोलना आसान हो जाए और सुनने वाले के दिमाग़ में मोदी-विरोधियों की यही थेथरी छवि बन जाए। तो दिल्ली में 49 दिन तक सरकार चलाने वाले अरविंद केजरीवाल एके-49 कहलाए गए, राहुल गांधी युवराज हो गए. पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का दायरा मोदी ने अल्पसंख्यकों तक सीमित कर दिया था। इस कड़ी में ताज़ा नाम भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी का भी जुड़ गया है जिन्हें इशारे-इशारे में मोदी ने महाभारत के शल्य की उपाधि से विभूषित कर दिया।
मोदी ने कहा कि महाभारत के शल्य की तरह कुछ मु_ी भर लोग हमेशा हताशा की बात करते हैं और कहते हैं — कुछ भी ठीक नहीं होगा। इन लोगों को हताशा फैलाने से रात को अच्छी नींद आती है।  पर नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के हर तीसरे वाक्य पर ताली बजाने वाले कंपनी सेक्रेटरीज़ को ये नहीं बताया कि नकारात्मकता फैलाने वाले शल्य को दुर्योधन ने एक चाल के ज़रिए महाभारत में कौरवों का पक्ष लेने के लिए तैयार किया था। जब शल्य को इस छल का अंदाज़ा हुआ तब उन्होंने युधिष्ठिर को वचन दिया कि वो युद्ध में कर्ण को हतोत्साहित करते रहेंगे। शरीर से कौरवों के पक्ष में लड़ेंगे पर मन और दिमाग़ से पाण्डवों का साथ देंगे।
शल्य को मालूम था कि कौरव महाभारत का युद्ध नहीं जीत पाएंगे और वो युद्ध के दौरान कर्ण को लगातार यही सच बता रहे थे। पर कर्ण को शल्य का सच पसंद नहीं आया।
किसी भी युग, देश, काल और परिस्थितियों में तमाम बाधाओं को पार कर, अपने विरोधियों को परास्त कर एक ख़ास मुक़ाम तक पहुंचे कर्ण को फ़ैसलाकुन क्षणों में शल्य का सच निराशाजनक ही लगता है।
गुजरात से दिल्ली की ओर क़दम बढ़ाने के साथ ही नरेंद्र मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे बुज़ुर्ग नेताओं के साथ-साथ यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी जैसे बीजेपी के नेताओं को भी हाशिए पर डाल दिया था। इससे पहले गुजरात में तो उन्होंने आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद के कुछ लोगों के लिए भी कई दरवाज़े बंद कर दिए. मोदी का सितारा बुलंद था और उनके हर फ़ैसले को लीक से हटकर और बोल्ड माना जाता था। इसलिए दबे सुरों में थोड़ी बहुत आलोचना हुई पर इससे ज़्यादा कुछ नहीं कहा गया। पर फिर आई आठ नवंबर 2016 की शाम जब नरेंद्र मोदी ने एक बोल्ड फ़ैसला लेकर ऐलान कर दिया कि आधी रात के बाद से 500 और 1000 के नोट लीगल टेंडर नहीं रह जाएंगे। अगले कुछ महीने पूरा हिंदुस्तान बैंको के आगे लाइन लगाकर खड़ा था और ख़ुश होकर सोच रहा था मोदी जी ने अमीरों को भी हमारी तरह लाइन में खड़ा कर दिया है. मोदी ने नोटबंदी को वर्ग संघर्ष में बदल दिया. हालांकि, अमीर किसी को भी बैंकों की लाइन में खड़े नहीं दिख रहे थे.
जब लोगों में ये शंका घर करने लगी कि कहीं ऐसा तो नहीं कि सिर्फ़ वो ही लाइन में लगा दिए गए हैं अंबानी और अडानी नहीं — तो गांधीनगर से ख़बर आ गई कि प्रधानमंत्री मोदी की नब्बे वर्ष की मां हीराबेन तक बैंक की लाइन में खड़ी हुई हैं।
चारों ओर मोदी-मोदी के नारे गुंजायमान होने लगे पर विपक्ष ने मोदी के इस फ़ैसले पर हमला बोला तो मोदी ने जापान की यात्रा से लौटते ही तुरंत वहीं पुराना स्ट्रीट फ़ाइटर वाला चोला ओढ़ा और गोवा में बेहद तरल आवाज़ में कहा कि मेरे विरोधियों का बस चले तो वो मुझे ङ्क्षज़िदा जला दें।
फिर आया जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स जिसको मोदी गुड एंड सिंपल टैक्स कहते हैं. पर जिसकी जेब से जीएसटी जाता है वो समझने लगा कि ये कितना गुड और कितना सिंपल टैक्स है. आधी रात को संसद के दोनों सदनों का संयुक्त सत्र आहूत करते जीएसटी को दूसरी आज़ादी की तरह पेश किया गया. ये कई दूसरे इवेंट्स की तरह एक और इवेंट था जिसे देखकर राष्ट्रभक्तों के सीने गर्व से फूल गए। पर जैसा कि इवेंट मैनेजमेंट। करने वाले जानते हैं कि इवेंट संपन्न होने के कुछ समय इसका नशा उतर जाता है और उत्तेजना ख़त्म हो जाती है, इस इवेंट का असर बहुत दिनों तक नहीं रहा. गुजरात में व्यापारी लाखों की संख्या में सडक़ों पर उतर आए। यहां व्यापारियों ने ेजगह-जगह होर्डिंग्स लगाकर मोदी भगाओ देश बचाओं के नारे लगा दिए। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में किसान बेचैन होने लगे  उन्हें उनकी फ़सल की लागत तक नहीं मिल रही थी।
काला धन पता नहीं कहां बिला गया क्योंकि प्रतिबंधित नोट का 99 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा लोगों ने बैंकों में जमा करा दिया. नोटबंदी के बावजूद हिंदुस्तान से आतंकवाद की जड़ें नहीं उखड़ पाईं और न कश्मीरी पत्थरबाज़ ही बाज़ आए। और जब ये बात सामने आई कि अर्थव्यवस्था के विकास की दर 5.7 प्रतिशत तक गिर गई तब लोगों ने अपने नेज़े-भाले सान पर चढ़ाने शुरू कर दिए. महाभारत हर बार घर के भीतर ही लड़ा जाता रहा है.
इस बार भी नरेंद्र मोदी की नीतियों पर हमला ख़ुद उनकी पार्टी के सुब्रह्मण्यन स्वामी जैसे पुरोधाओं ने किया। आरएसएस से जुड़े एस. गुरुमूर्ति जो मोदी के परम समर्थकों में हैं -भी अर्थव्यवस्था के उत्तरोत्तर ख़स्ताहाल को नजऱअंदाज़ नहीं कर सके। अरुण शौरी तो लंबे अर्से से मोदी सरकार को ढाई लोगों की सरकार कहते आ रहे हैं — एक मोदी ख़ुद, एक बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और आधे अरुण जेटली। पर जब यशवंत सिन्हा ने इंडियन एक्सप्रेस में खुला लेख लिखकर जेटली को सीधे-सीधे और मोदी को थोड़ा इशारे से कठघरे में खड़ा किया तो लड़ाई कुरुक्षेत्र के मैदान में आ गई और मोदी जवाब देने को मजबूर हुए। मोदी ने सिन्हा को परोक्ष रूप से शल्य कहा तो बहुत से लोगों ने कोने में रखी महाभारत की धूल झाडक़र उसे पढऩा शुरू कर दिया. यशवंत सिन्हा ने भी नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी पर कटाक्ष करने के लिए महाभारत का ही सहारा लिया और एक समारोह में कहा - कौरव सौ भाई थे पर सिर्फ़ दो प्रसिद्ध हुए: दुर्योधन और दुशासन।
बीते साढ़े तीन बरस में यही सबसे बड़ा अंतर आया है. तब नरेंद्र मोदी एक स्ट्रीट फ़ाइटर की तरह अपने विरोधियों को सरेआम चारों खाने चित्त करते थे तो कहीं से कोई आवाज़ नहीं आती थी. अब यशवंत सिन्हा मोदी को उन्हीं की तरह, उन्हीं के मुहावरे में जवाब देकर राष्ट्रीय बहस का रुख़ मोड़ दे रहे हैं।  मोदी जी आपको स्ट्रीट फाइट के साथ होम फाइट के लिए भी तैयार रहना होगा।

कौन था नीरो

नीरो रोम का सम्राट् था। उसकी माता ऐग्रिप्पिना, जो रोम के प्रथम सम्राट् आगस्टस की प्रपौत्री थी, बड़ी ही महत्वाकांक्षिणी थी। उसने बाद में अपने मामा सम्राट् क्लाडिअस प्रथम से विवाह कर लिया और अपने नए पति को इस बात के लिए राजी कर लिया कि वह नीरो को अपना दत्तक पुत्र मान ले और उसे ही राज्य का उत्तराधिकारी घोषित कर दे। नीरो को शीघ्र ही गद्दी पर बैठाने के लिए ऐग्रिप्पिना उतावली हो उठी और उसने जहर दिलाकर क्लाडिअस की हत्या करा दी।
रोम निवसियों ने पहले तो नीरो का स्वागत और समर्थन किया क्योंकि वह पितृ परंपरा से ही नहीं मातृ परंपरा से भी सम्राट् आगस्टस का वंशज था। शुरु में उसने अपने गुरु सेनेका से प्रभावित होकर राज्य का शासन भी अच्छी तरह से किया किंतु शीघ्र ही उसके दुर्गुण प्रकट होने लगे। सन्? 55 में उसने अपने प्रतिद्वंद्वी ब्रिटेनिकस को, जो क्लाडिअस का अपना पुत्र होने के कारण, राज्य का वास्तविक दावेदार था, जहर देकर मरवा डाला और चार वर्ष बाद खुद अपनी माता की भी हत्या करा दी। फिर उसने अनी पत्नी आक्टेविया को भी मरवा डाला और अपनी दूसरी स्त्री पापीया को क्रोधाविष्ट होकर मार डाला। उसने एक तीसरी स्त्री से विवाह करना चाहा पर उसने इनकार कर दिया और उसे भी मौत के घाट उतार दिया गया। इसके बाद नीरो ने एक और स्त्री के पति को मरवा डाला ताकि वह उसे अपनी पत्नी बना सके। धीरे धीरे उसके प्रति असंतोष बढऩे लगा। एक षडय़ंत्र का सुराग पाकर उसने अपने गुरु सेनेका को आत्महत्या करने का आदेश दिया। इसके सिवा और भी कई प्रसिद्ध पुरुषों को मृत्युदंड दे दिया गया।
सन् 64 में रोम नगर में अत्यंत रहस्यमय ढंग से आग की लपटें भडक़ उठीं जिससे आधे से अधिक नगर जलकर खाक हो गया। जब आग धूधू कर के जल रही थी नीरो एक स्थान पर खड़े होकर उसकी विनाशलीला देख रहा था और सारंगी बजा रहा था। यद्यपि कुछ लोगों का ख्याल है कि आग स्वयं नीरो ने लगवाई थी पर ऐसा समझने के लिए वस्तुत: कोई आधार नहीं है। आग बुझ जाने के बाद नीरो ने नगर के पुनर्निमणि का कार्य आरंभ किया और अपने लिए 'स्वर्ण मंदिर' नामक एक भव्य प्रासाद बनवाया। असह्य करभार, शासन संबंधी बुराइयों तथा अनेक क्रूरताओं के कारण उसके विरुद्ध विद्रोह की भावना बढ़ती गई। स्पेन के रोमन गवर्नर ने अपनी फौजों के साथ रोम पर हमला बोल दिया जिसमें स्वयं नीरो को अंगरक्षक सेना भी शामिल हो गई। नीरो को राज्य से पलायन करना पड़ा। इसी बीच सिनेट ने उसे फाँसी पर चढ़ा देने का निर्णय किया। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने आत्महत्या कर ली।

नीरो की तरह योगी भी जलते उत्तर प्रदेश को छोड़ कर बंसी बजा रहे हैंं?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आजकल रोम के सम्राट नीरो की भूमिका निभा रहे हैं। पूरा प्रदेश आपराधिक घटनाओं से जल रहा है परन्तु वे भाजपा के संकटमोचक बने हुए हैं। कभी केरल, कभी हरियाणा तो कभी गुजरात की ओर रुख कर रहे हैं। यहां उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ गैंगरेप, विस्फोट से हिल रही है तो पड़ोसी शहर कानपुर महानगर भी विस्फोट और दंगों से सुलग रहा है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा की बात ही कहने की नहीं है। अब एक दिल दहलाने वाली घटना मुजफ्फरनगर में हुई जहां एक महिला के साथ चार-पांच बदमाशों ने पति और बच्चे को गन प्वाइंट पर लेकर गन्ने के खेतों में गैंगरेप किया।
हालांकि वह पार्टी के सदस्य हैं, पदाधिकारी है और लंबे समय तक सांसद भी रहे हैं और अब देश की राजनीति दिशा तय करने वाले राज्य के मुख्यमंत्री भी हैं। ऐसे में योगी आदित्यनाथ को सबसे पहले अपना घर संभालना चाहिये कि केरल,हरियाणा और गुजरात को संभालना चाहिए। कहावत कहीं गयी है एक को साधे सब मिले सब साधे सब जाए। यानी पहले एक को संभालों तो कम से कम एक तो मिले। सब संभालने के लिए भागदौड़ भी करोगे और हाथ कुछ भी न आएगा। प्रदेश की जनता योगी से कितनी अपेक्षाएं रख रहीं थी वह पूरी हुई कि नहीं यह देखना चाहिए।
सबसे बड़ी बात यह है कि प्रदेश के राज्यपाल नामनाईक जो पहले, भाजपा के पदाधिकारी भी रह चुके हैँ, वह भी कह चुके हैं कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था की स्थिति ठीक नहीं है, इसे सुधारो। हाल ही में कानपुर विश्वविद्यालय में अपने कार्यक्रम से पूर्व पत्रकारों से बाचतीत में उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून- व्यवस्था की स्थिति ठीक नहीं है। योगी शासन में भी यही कर रहा हूं और अखिलेश सरकार में भी कहता था।

Saturday, 30 September 2017

बीएचयू के छात्रों के लिए बुरी व अच्छी खबर

बीएचयू में हाल में ही जो बवाल हुआ उससे वहां के छात्रों के लिए बुरी और अच्छी खबर दोनों ही हैं। छात्राओं के विरोध प्रदर्शन से तो ये जाहिर होता है कि वहां के छात्रों ने अपनी मनमानी की अत्ती ही कर दी थी वरना इतना बड़ा हंगामा नहीं होता। दूसरी बात यह है कि वहां के छात्रों की इमेज देश-विदेश के लोगों में क्या बनी होगी । इस बात की कल्पना करने से एक पक्ष तो यह सामने आता है कि बदनाम हुए तो नाम न होगा क्या? दूसरा कि मुफ्त में हुए बदनाम। अब पहले पहलू को लेते हैं देश-विदेश में कुछ भी प्रतिक्रिया हो या न हो लेकिन सभ्य भारतीय समाज में अवश्य ही बीएचयू के छात्रों की छवि एक अभद्र इंसान की उभरी होगी। अपने आस-पास में कोई बीएचयू का छात्र नजर आते ही लोग सतर्क हो जाएंगे कि अपनी बहू-बेटियों को बचाओ ये बीएचयू का छात्र है कभी भी कुछ भी कर सकता है। यह तो हुई बुरी खबर।
अच्छी खबर क्या होगी? पहले ही हम अनजाने में हुई गलती की माफी मांग लेते हैं, फिर भी आइए इस पर संक्षिप्त विचार करते हैं। पाश्चात्य सभ्यता से जुड़े खुले विचारों के समर्थक लोगों और यूं सीधे-सीधे कहिये कि लिव इन या इस तरह के संबंधों के उत्सुक वर्ग में इन छात्रों की छवि आकर्षक व्यक्तित्व की तरह होगी। इससे अधिक कुछ भी कहना उचित नहीं।