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Saturday, 19 November 2016

घटने लगी प्रापर्टी की दरें :नोट बंदी की घोषणा का असर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गत आठ नवम्बर को 500 और 1000 के नोट बंद किए जाने से भले ही देश में अफरातफरी की खबरें फैलीं होंं। सुप्रीम कोर्ट दंगे की आशंका जता रही हो लेकिन इसके अच्छे परिणाम गरीबों एवं मध्यम वर्ग के पक्ष में आने लगे हैं। महाराष्ट्र में प्रापर्टी की दरें 35 प्रतिशत तक गिर गईं हैं। सिक्के का दूसरा पहलू यह अवश्य है कि प्रापर्टी के विक्रेताओं को अवश्य ही नुकसान हो रहा होगा लेकिन वक्त की नजाकत को देखते हुए वही प्रापर्टी बेचने का फैसला करेगा जो आने वाले समय में अपनी प्रापर्टी बचाने की जुगत न कर पाएगा। उसे यही आशंका है कि कहीं मोदी जी 30 दिसंबर तक प्रापर्टी के लिए कोई नया कानून न ले आएं।
जानकार सूत्रों ने बताया कि तीन साल से आसमान छू रही प्रापर्टी की कीमतों में अचानक 35 प्रतिशत की गिरावट आ गई है। पुणे के इंस्पेक्टर जनरल आफ रजिस्ट्रेशन एण्ड कंट्रोलर आफ स्टैम्प के कार्यालय के आंकड़ों पर नजर डालने पर यही निष्कर्ष निकलता है कि महाराष्ट्र में प्रापर्टी की दरों में 35 प्रतिशत की मंदी आ गई है। इन आंकड़ों के अनुसार पूरे महाराष्ट्र में प्रापर्टी का रजिस्ट्रेशन आठ नवंबर से पहले से 35 प्रतिशत कम दरों पर किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नोट बंदी की घोषणा किए जाने के साथ ही मुंबई, पुणे और नासिक में प्रापर्टी की कीमतें प्रभावित हुईं हैं।
 पुणे के इंस्पेक्टर जनरल आफ रजिस्ट्रेशन एण्ड कंट्रोलर आफ स्टैम्प एन रामास्वामी ने संवाददाताओं को जानकारी दी कि महाराष्ट्र में महीने के आठ दिनों में पहले जहां 5,297 प्रापर्टी की खरीद-बिक्री की रजिस्ट्री होती थी वहं अब 9 नवम्बर से 17 सितम्बर के सप्ताह में घटकर मात्र 3,461 रजिस्ट्रियां हुईं हैं। श्री रामास्वामी ने बताया कि अप्रैल से अक्टूबर तक औसतन 6,409 बयनामें किए जाते थे। उन्होंने बताया कि अप्रैल से अक्टूबर तक का औसत राजस्व 64 करोड़ रुपये प्रतिदिन मिलता था। अब नवम्बर माह में प्रतिदिन औसत मात्र 31.22 रुपये का ही राजस्व मिल पा रहा है। महाराष्ट्र के वित्त मंत्री सुधीर मुनगान्तिवार ने कहा कि नोट बंदी का असर सभी सेक्टरों पर पड़ रहा है। रियल इस्टेट डेवलपर्स रुनवाल ग्रुप के निदेशक संदीप रुनवाल, लाइसेस फोरास के मैनेजिंग डाइरेक्टर पंकज कपूर, जोन्स लांग ला सेल इंडिया के चेयरमैन एण्ड कंट्री हेड अनुज पुरी ने एक स्वर से स्वीकारा है कि नोट बंदी के कारण प्रापर्टी के दाम तेजी से गिर रहे हैं और खरीददारों में भारी कमी आ रही है।

सिरदर्द से निजात दिलाने वाले ये हैं योगासन

सिरदर्द से परेशान हैं तो दवाइयों का नहीं, योग का सहारा लीजिए। सिर दर्द को भगाने के लिए योग के कटिचक्रासन,उत्तपादासन,वज्रासन,मकरासन और ताडासन से मिलता है पूरा आराम।  
कटिचक्रासन:सबसे पहले दोनों पैरों में लगभग एक फीट की दूरी रखकर सावधान की मुद्रा में खड़े हो जाएं। अब दोनों हाथों को कंधों के समानान्तर फैलाते हुए हथेलियां भूमि की ओर रखें। फिर बायां हाथ सामने से घुमाते हुए दाएं कंधे पर रखें। फिर दायां हाथ मोडक़र पीठ के पीछे ले जाकर कमर पर रखिए। अब गर्दन को दाएं कंधे की ओर घुमाते हुए पीछे ले जाएं। कुछ देर इसी अवस्था में रहें। अब गर्दन को सामने लाते हुए क्रमश: हाथों को समानान्तर रखते हुए इसी क्रिया को दोनों तरफ से कीजिए।
उत्तपादासन:सबसे पहले जमीन पर एकदम सीधा लेट जाएं। आपके दोनों हाथ आपके शरीर से सटे होने चाहिए। एक से दो मिनट तक इसी प्रकार शांत मुद्रा में लेटे रहें। अब गहरी सांस लेकर दोनों पैरों को सीधा ऊपर की ओर उठाएं। लेकिन पैर उठाते समय सिर जमीन से नहीं उठाना है। पैरों को 90 डिग्री के कोण पर छत की ओर ले जाएं। कुछ क्षण रूकने के पश्चात् धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में आ जाएं।
वज्रासन:दोनों पैरों को सामने की तरफ फैलाकर बैठ जाएं। अब दोनों पैर के घुटने को कुछ इस प्रकार मोडक़र बैठें कि आपके पैरों के पंजे पीछे और उपर की ओर हो जाएं। तथा नितम्ब दोनों एडय़िों के बीच आ जाएं। ध्यान रहे कि दोनों पैर के अंगूठे एक-दूसरे के मिले हुए हों। अब आंखें बंद करते हुए शरीर केा ढीला छोड़ें। आपके हाथ घुटनों पर रखे होने चाहिएं। इस अवस्था में गहरी सांस लें व छोड़ें। इससे आपको काफी आराम मिलेगा व माइग्रेन की समस्या भी दूर होगी।
मकरासन:पेट के बल लेटकर अपनी ठोड़ी को भूमि पर टिकाएं। आपके दोनों हाथ कमर से सटे हुए और हथेलियां ऊपर की ओर होनी चाहिएं। साथ ही दोनों पैर भी एक-दूसरे से सटे हुए हों। अब दोनों हाथों को इस प्रकार ऊपर उठाते हैं कि उसकी कैंची जैसा आकार बन जाए। इस स्थिति में अपने सिर को हाथों के बीच रखें।
ताडासन:सर्वप्रथम दोनों पैरों को आपस में मिलाकर सीधे खड़े हो जाएं और दोनों हथेलियों को अपने बगल में रखें। अब दोनों हथेलियों की उंगलियों को मिलाकर सिर के उपर ले जाएं। ध्यान रहें कि आपकी हथेलिया सीधी व शरीर स्थिर हो। अब गहरी सांस भरते हुए हाथों को उपर की ओर खींचिए व पैरों की एड़ी को भी ऊपर उठाएं। आप पैरों की उंगलियों पर शरीर का संतुलन बनाए रखें। इस स्थिति में आपको कंधों व छाती में खिंचाव महसूस होगा। कुछ देर इस स्थिति में रहने के बाद सांस छोड़ते हुए हाथों को वापिस सिर के ऊपर ले जाएं।

कम्प्यूटर से हुए सिरदर्द में योगासन से मिलेगी राहत


दिनभर कंप्यूटर पर बैठे रहने की आदत ने आपको सिरदर्द तोहफे में दिया है। आप ऑफिस में घंटों कंप्यूटर पर बैठकर जब वापिस घर पर सिरदर्द  लेकर आते हैं। ऐेसे में आपके स्वभाव में न सिर्फ चिड़चिड़ापन आता है। सिरदर्द से परेशान हैं तो दवाइयों का नहीं, योग का सहारा लीजिए। सिर दर्द को भगाने के लिए योग के कटिचक्रासन,उत्तपादासन,वज्रासन,मकरासन और ताडासन से मिलता है पूरा आराम। 

Friday, 18 November 2016

ऐसे अफरा-तफरी की कगार पर पहुंचा देश

राजनीतिज्ञों,नोट माफियाओं, हवाला कारोबारियों के बीच चल रहा है खेल

नोट बंदी के अच्छे निर्णय को किस तरह से बुरा बनाया जा सकता है और उससे देश की स्थिति किस प्रकार बिगाड़ी जा सकती है। इस बात का अंदाजा शायद ही किसी को होगा किन्तु सुप्रीम कोर्ट ने अपने यहां आने वाले मुकदमों और देश में नोट बदलने के लिए हो रही मारामारी को भांप कर सरकार को सलाह दी है कि यदि स्थिति नहीं संभली तो निश्चित रूप से लोग आज सडक़ पर उतर आए हैं उनमें कहीं रोष और असंतोष की भावना भडक़ उठी तो देश में दंगे हो सकते हैं।
मोदी सरकार का निर्णय अच्छा है लेकिन काला धन के कारोबारियों, विपक्षी दलों के राजनीतिज्ञों और हवाला कारोबारियों की सांठगांठ से देश में असंतोष की भावना पनपाई जा रही है। देश का अशिक्षित एवं गरीब तबका इन लोगों के बहकावे में आ सकता है। यहीं इसमें कुछ कारगुजारी बैंक कर्मियों की भी हो रही है। कानपुर जैसे महानगर की अधिकांश बैंकों में लोग सुबह छह बजे से लाइन में लग जाते हैं, जिनकी संख्या सैकड़ों तक पहुंच जाती है। पहले दिन के 11 बजे तक कैश आने का इंतजार किया जाता है। नई करंसी लेकर कैश बॉक्स आता है तो काम बंद हो जाता है, पुरानी करंसी लेकर कैश बाक्स वापस जाता है और दिन में एक बजे ही बैंक में ऐलान कर दिया जाता है कैश खत्म। मात्र 10-15 लोगों को ही कैश मिल पाता है बाकी लोग मोदी सरकार को भद्दी गाली देकर अपने घरों को जाते हैं। एटीएम का हाल तो और भी बुरा है। कैस डालने के कई घंटों पहले लोग लाइन में लग जाते हैं। एक-एक व्यक्ति चार से पांच एटीएम कार्ड लेकर आता है। इस तरह से वहां भी यही हाल हो रहा है। जरूरतमंद जब एटीएम के द्वार पर पहुंचता है तो कैस खत्म हो जाता है।
इस खेल में माफिया जबर्दस्त तरीके से काम कर रहा है। मुहल्ले में खेलने वाले बच्चों, आवारा घूमने वाले बेकार लोगों को लाइन में लगाया जाता है और उनका एजेंट नोट लिए खड़ा रहता है और जैसे ही ये लोग बैंक के कार्यालय के अंदर पहुंचते हैं तो उन्हें भरा हुआ फार्म और नोट दे दिये जाते हैं। इसके बाद काम होने पर उन्हें चंद रुपये कमीशन दे दिये जाते हैं। निर्णय के दस दिन बाद ये एक्सपर्ट लोग पहले से ही बैंक को घेर लेते हैं जिससे जरूरतमंद पैसे पाने से वंचित रह जाता है।

कह गड़बड़ कविराय

नोट बंदी पर रोए कालाधनपति जार-जार
अब कैसे चलेगा भइया मेरा काला कारोबार
माया की बदली माया, मुलायम पड़ गए पस्त
केजरीवाल को लग गए भाई जबरदस्त दस्त
अन्ना बजाएं ताली दोनों अंखियां मीचे
कह गड़बड़ कविराय नहिं देख नेता गिरते इतने नीचे

Thursday, 17 November 2016

अब कैसे होगा घर-घर मोदी

नोट बंदी के फैसले से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अब देश के घर-घर में तो पहुंच गए हैं। अब उनकी योजना कामयाब हुई तो घर-घर मोदी, झर-झर मोदी होगा। यानी घर-घर खुशहाल होगा और सभी के काम चुटकी बजाते ही होंगे। यही नहीं दूरस्थ गांवों में बैठे किसानों के काम भी आसानी से होंगे। बस थोड़ा सा धैर्य रखना होगा। नोट बंदी के फैसले पर दुनिया पर के लोग अपनी-अपनी राय दे रहे हैं। इसी तरह से भारत में 500 और 1000 के नोट बंद होने पर दुनिया के सबसे अमीर आदमी बिल गेट्स क्या सोचते हैं? बीबीसी संवाददाता जस्टिन रोलैट ने बिल से इस बारे में उनकी राय जानी।
बिल गेट्स ने भारत सरकार के नोटबंदी के फ़ैसले को कागज़ी मुद्रा से डिज़िटल लेन-देन की ओर एक कदम बताया। बिल गेट्स ने कहा कि अगर लोग ये देखें कि डिज़िटल दुनिया में लेन-देन करना ज़्यादा महंगा नहीं है, तो वो कागज़ की मुद्रा से उस तरफ़ बढ़ेंगे। मैं जानता हूं कि सरकार आधार कार्ड और बैंक अकाउंट खोलने जैसे कदम उठाकर उस ओर बढ़ रही है।
गेट्स ने आगे कहा कि मेरा अनुभव यही है कि गांवों में आप चाहे जितने बैंक खोल लें, जब तक इंटरनेट के माध्यम से लेन-देन करना शुरू नहीं करेंगे, उस पैसे को किसानों तक पहुंचाना मुश्किल ही रहेगा। फोर्ब्स 2016 की लिस्ट में बिल गेट्स दुनिया के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में पहले नंबर पर थे। बता दें कि आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 के पुराने नोट बंद करने का ऐलान किया था। इस ऐलान के बाद से लोगों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

मोदी जी! सुनो जनता जनार्दन के मन की बात

नोट बंदी के फैसले के लिए पूरा देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मुक्त कंठ से सराहना कर रहा है। चंद राजनीतिज्ञ अपने निजी स्वार्थ के चलते इस मुद्दे को राष्ट्रपति के समक्ष उछाल रहे हैं जबकि राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने फैसला आने के साथ ही प्रधानमंत्री को इस साहसिक कदम उठाने की प्रशंसा की थी। प्रतिक्रिया में जैसा सपा नेता मुलायम सिंह यादव कह रहे थे कि मोदी सरकार को चाहिए था कि वे देश को कम से कम एक सप्ताह की मोहलत देती। यदि एक दिन की भी मोहलत मिलती तो देश की सारी बैंकें काले धन से भर जातीं। आम आदमी तो दर-दर भटकने को विवश होता और देश में भारी अफरा-तफरी मच जाती।
नोट बंदी का फैसला जिस तरह से लागू किया गया वह भी तारीफेकाबिल है। फैसले के रुख से पता चलता है कि बहुत कम लोगों ने इस फैसले को बहुत ही कम समय में लिया है। इसलिए नोट बदलने की व्यवस्थाएं उतनी पर्याप्त नहीं हो पाईं जितनी देश की जनता को जरूरत थी, इसलिए आम जनता को थोड़ी बहुत परेशानी हुई, फिर जनता सरकार के फैसले के साथ अडिग है।
प्रधानमंत्री जी, आपके इस फैसले को एक बार पुन: सलाम। इसके साथ ही देशवासियों विशेषकर साधारण एवं मध्यम वर्ग के समक्ष एक यक्ष प्रश्न यह है कि आज की बढ़ती महंगई के दौर में सरकार द्वारा दी जा रही सीमा 2.50 लाख रुपये में वर्ष भर जेल मैनुअल के अनुसार पांच सदस्यों के एक परिवार का गुजारा किस प्रकार हो। इस प्रश्न पर गंभीरता से विचार करने के साथ राहतकारी कदम उठाने होंगे तभी देश की जनता के साथ इंसाफ होगा।
आज जरूरत इस बात की है कि सरकार ईमानदारी से बढ़ती महंगाई के वास्तविक स्तर को नापे और उसके अनुसार एक परिवार के पांच सदस्यों के मानक का साधारण,मध्यम और लक्जरी बजट बनाए और उसका औसत निकाल कर आयकर सीमा का नए सिरे से निर्धारण करे, तब सख्ती की जाए तो आम जनता को कोई परेशानी नहीं होगी।
अब आईए देखते हैं कि सरकार द्वारा प्रति परिवार को वार्षिक खर्च की सुविधा दी गई है, उसमें हम कैसे गुजारा कर सकते हैं।
2.50 लाख रुपये के हिसाब से प्रत्येक परिवार को मासिक खर्च लगभग 20 हजार 833 रुपये मिलता है। इसके हिसाब से प्रतिदिन लगभग 691 रुपये का खर्च हाथ में आता है। मात्र 691 रुपये में मुंबई, दिल्ली, चेन्नई,कोलकाता, बंगलुरु, चंडीगढ़,गुडग़ांव,नोएडा, लखनऊ सहित देश के प्रमुख महानगरों में एक परिवार का सुबह के टूथ ब्रश-पेस्ट से लेकर रात्रि के दूध तक का खर्चा चल सकता है? यह प्रश्न बहुत ही गंभीर और विचारणीय है।
अब तस्वीर का दूसरा पहलू देखें कि वर्तमान समय में एक साधारण एवं मध्यम परिवार का दैनिक,मासिक और वार्षिक खर्च कितना हो सकता है?
आईए सबसे पहले दिन की शुरुआत टूथ-ब्रश और पेस्ट के खर्चे से करते हैं। पूरे परिवार के लिए एक माह में कम से कम 200 ग्राम का एक टूथ पेस्ट और पांच टूथ ब्रश व अन्य हैंड वाश आदि का खर्च कम से कम 300 रुपये प्रतिमाह आएगा। कुल खर्च 10 रुपये
इसके बाद साधारण परिवार के नाश्ते पर नजर डालें। तीन बच्चों के लिए दूध का खर्च 36 रुपये। दो वयस्कों के लिए चाय या कॉफी का खर्च 30 रुपये। ब्रेड व स्नैक्स का खर्च 50 रुपये। कुल 116 रुपये।
अब देखते हैं भोजन का बजट किस प्रकार बनता है? थाली में दाल,रोटी,सब्जी और चावल तो होने ही चाहिए। दाल-250 ग्राम लगभग 30 रुपये, सब्जी कम से कम 30 रुपये और रोटियां भी लगभग 30 रुपये, चावल भी लगभग 30 रुपये और ईंधन लगभग 20 रुपये। बर्तन आदि का खर्च इसमें शामिल नहीं है। कुल 140 रुपये।
एक दिन में दो बार नाश्ता व दो बार भोजन तो आम बात है। इसलिए उपरोक्त दोनों राशियों को दोगुना करके पूरे दिन का खर्चा निकाला जा सकता है। इस तरह से पूरे दिन का खर्च आया 532 रुपये। अब माह का खर्च आएगा
एक परिवार के पांच लोगों के लिए पहनने के कपड़े, बिस्तर,फर्नीचर का सालाना खर्च इस प्रकार होगा। जेल मैनुअल के अनुसार दो जोड़े कपड़े अर्थात पूरे परिवार को कम से कम दस जोड़े कपड़ों की आवश्यकता होगी। सोने के लिए कम से कम दो से तीन बेड, सर्दियों के लिए गर्म बिस्तर, गर्म कपड़े आदि। इस पर साल भर में कम से कम 60 हजार रुपये का खर्च आएगा। माह का पांच हजार ।
मोदी जी! आपने जो खर्चा दिया था वह तो इसी दाल-रोटी में बहुत खींचतान के बाद खत्म हो गया। अब आप बताइये कि आम जीवन में काम आने वाले संसाधन, फ्रिज,एसी,कूलर,टीवी,वाशिंग मशीन,मिक्सी आदि कहां से लाए जाएं? बिजली का खर्च कहां से आए? रहें कहां,आवास का खर्च कहां से लाएं? शिक्षा, जो व्यवसाय का रूप ले चुकी है, इसका भारी-भरकम खर्च कहां से आए? सबसे महंगा स्वास्थ्य यानी चिकित्सा का खर्च कहां से आए? सरकारी अस्पताल तो मौत का घर बने हुए हैं, प्राइवेट अस्पताल लूट का अड्डा बने हुए हैं, झोलाछाप डॉक्टरों से यह देश चल रहा है वरना इस देश में मौत का औसत आसमान छूने लगेगा। इन सभी खर्चों को पूरा करने के लिए भारत देश का ईमानदार नागरिक या तो जहालत और मौत को चुने या फिर चोरी करे। चोरी तो चोरी, धन-माल की हो या कर की हो। सब एक समान है। इसलिए मोदी जी जनता के मन की बात को आप हमेशा सुनते हैं। अब जनता जनार्दन के मन की बात सुनें तभी देश का कल्याण हो सकेगा।
जय हिंद-जय भारत
भारत माता की जय
अनिल कुमार मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार

Tuesday, 15 November 2016

जन्म 19 नवम्बर : वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई

 अभी उम्र कुल तेइस की थी, पर वह वीरांगना थी
 हमको जीवित करने आयी, बन स्वतन्त्रता नारी थी।
रानी लक्ष्मीबाई मराठा शासित झाँसी राज्य की रानी और 1857 के प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम की वीरांगना थीं, जिन्होंने मात्र 23 वर्ष की आयु में ब्रिटिश साम्राज्य की सेना से संग्राम किया और रणक्षेत्र में वीरगति प्राप्त की किन्तु जीते जी अंग्रेजों को अपनी झाँसी पर कब्जा नहीं करने दिया।
लक्ष्मीबाई का जन्म वाराणसी जिले के भदैनी नामक नगर में 19 नवम्बर 1828 को हुआ था। उसके बचपन का नाम मणिकर्णिका था परन्तु प्यार से उसे मनु कहा जाता था। मनु की माँ का नाम भागीरथीबाई तथा पिता का नाम मोरोपन्त तांबे था। मोरोपन्त एक मराठी थे और मराठा बाजीराव की सेवा में थे। माता भागीरथीबाई एक सुसंस्कृत, बुद्धिमान एवं धार्मिक महिला थीं। मनु जब चार वर्ष की थी तब उनकी माँ की मृत्यु हो गयी।
चूँकि घर में मनु की देखभाल के लिये कोई नहीं था इसलिए पिता मनु को अपने साथ बाजीराव के दरबार में ले गये जहाँ चंचल एवं सुन्दर मनु ने सबका मन मोह लिया। लोग उसे प्यार से छबीली कहकर बुलाने लगे। मनु ने बचपन में शास्त्रों की शिक्षा के साथ शस्त्रों की शिक्षा भी ली।
सन् 1842 में उनका विवाह झाँसी के मराठा शासित राजा गंगाधर राव निम्बालकर के साथ हुआ और वे झाँसी की रानी बनीं। विवाह के बाद उनका नाम लक्ष्मीबाई रखा गया। सन् 1851 में रानी लक्ष्मीबाई ने एक पुत्र को जन्म दिया पर चार महीने की आयु में ही उसकी मृत्यु हो गयी। सन् 1853 में राजा गंगाधर राव का स्वास्थ्य बहुत अधिक

बिगड़ जाने पर उन्हें दत्तक पुत्र लेने की सलाह दी गयी। पुत्र गोद लेने के बाद 21 नवम्बर 1853 को राजा गंगाधर राव की मृत्यु हो गयी। दत्तक पुत्र का नाम दामोदर राव रखा गया। ब्रिटिश राज ने बालक दामोदर पर अदालत में मुकदमा दायर कर दिया। यद्यपि मुकदमे में बहुत बहस हुई परन्तु इसे खारिज कर दिया गया।  इसके बाद रानी ने घोषणा की अपने जीते जी अपनी झांसी नहीं दूंगी। ब्रितानी अधिकारियों ने राज्य का खजाना ज़ब्त कर लिया और उनके पति के कजऱ् को रानी के सालाना खर्च में से काटने का फरमान जारी कर दिया। इसके परिणामस्वरूप रानी को झाँसी का किला छोड़ कर झाँसी के रानीमहल में जाना पड़ा। पर रानी लक्ष्मीबाई ने हिम्मत नहीं हारी और उन्होनें हर हाल में झाँसी राज्य की रक्षा करने का निश्चय किया। 1857 के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों को समर्पित भारत का डाकटिकट जिसमें लक्ष्मीबाई का चित्र है।
झाँसी 1857 के संग्राम का एक प्रमुख केन्द्र बन गया जहाँ हिंसा भडक़ उठी। रानी लक्ष्मीबाई ने झाँसी की सुरक्षा को सुदृढ़ करना शुरू कर दिया और एक स्वयंसेवक सेना का गठन प्रारम्भ किया। इस सेना में महिलाओं की भर्ती की गयी और उन्हें युद्ध का प्रशिक्षण दिया गया। साधारण जनता ने भी इस संग्राम में सहयोग दिया।
झलकारी बाई जो लक्ष्मीबाई की हमशक्ल थी को उसने अपनी सेना में प्रमुख स्थान दिया।1857 के सितम्बर तथा अक्टूबर माह में पड़ोसी राज्य ओरछा तथा दतिया के राजाओं ने झाँसी पर आक्रमण कर दिया। रानी ने सफलता पूर्वक इसे विफल कर दिया। 1858 के जनवरी माह में ब्रितानी सेना ने झाँसी की ओर बढऩा शुरू कर दिया और मार्च के महीने में शहर को घेर लिया।
दो हफ़्तों की लड़ाई के बाद ब्रितानी सेना ने शहर पर कब्जा कर लिया। परन्तु रानी दामोदर राव के साथ अंग्रेजों से बच कर भाग निकलने में सफल हो गयी। रानी झाँसी से भाग कर कालपी पहुँची और तात्या टोपे से मिली।तात्या टोपे और रानी की संयुक्त सेनाओं ने ग्वालियर के विद्रोही सैनिकों की मदद से ग्वालियर के एक किले पर कब्जा कर लिया।
17 जून 1858 को ग्वालियर के पास कोटा की सराय में ब्रिटिश सेना से लड़ते-लड़ते रानी लक्ष्मीबाई ने वीरगति प्राप्त की। लड़ाई की रिपोर्ट में ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज़ ने टिप्पणी की कि रानी लक्ष्मीबाई अपनी सुन्दरता, चालाकी और दृढ़ता के लिये उल्लेेखनीय तो थी ही, विद्रोही नेताओं में सबसे अधिक खतरनाक भी थी। रानी के बारे

यह कविता बहुत ही प्रसिद्ध है

बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। 
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी।
सिंहासन हिल उठे राजवंषों ने भृकुटी तानी थी,
बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी,
गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फिरंगी को करने की सब ने मान में ठनी थी।
चमक उठी सन सत्तावन में, यह तलवार पुरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी।
नाना के संघ पढ़ती थी वो नाना के संघ खेली थी,
बर्छी, ढाल, कृपाण, कटारी, उसकी यही सहेली थी।
वीर शिवाजी की गाथाएँ उसकी याद ज़बानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वो स्वयं वीरता की अवतार,
देख मरते पुलकित होते उसकी तलवारों के वार,
नकली युध.व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार,
सैंया घेरना, दुर्ग तोडऩा यह थे उसके प्रीया खिलवाड़।
महाराष्ट्र कुल.देवी उसकी भी आराध्या भवानी थी, 
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी।

मोदी जी की क्या है ललकार

नरेन्द्र भाई दामोदार मोदी की सुनो ललकार
नहीं चलेगा भ्रष्टाचार, कतई  नहीं चलेगा भ्रष्टाचार
 तख्त बदल दो ताज बदल दो चाहो तो मेरा राज बदल दो
नहीं रहेगा भ्रष्टाचार, जो अब तक बना था शिष्टाचार
मोदी जी की सुनो ललकार.....
भाइयों-बहनों! जो हैं ईमानदार,अब नहीं रहेंगे लाचार
चाहे जितने तगड़े हों, बेइमानों पर करेंगे प्रहार
चाहे दुश्मन बने जमाना, पर नहीं मानेंगे हम हार
मोदी जी की सुनो ललकार.....
दो सौ वर्षों की खूनी जंग के बाद देश हुआ आजाद
बीते सत्तर सालों में देश हुआ है सिर्फ बरबाद
बहुत हो चुका अब हो गई है अन्याय की सीमा पार
मोदी जी की सुनो ललकार.....
ये मेरी है न तेरी है, ये है जनता की असली सरकार
अब तक जो होता आया है, अब नहीं होगा इस बार
क्योंकि ईमानदारों से है मुझको दिल से प्यार
मोदी जी की सुनो ललकार.....
अभी तो किए बंद सिर्फ हजार-पांच सौ के नोट
काले धन के रखवालों के दिल पर लगी करारी चोट
अब तो बेईमानों से चलेगी आर-पार की तकरार
मोदी जी की सुनो ललकार.....
 कोई कहे जायेगी सरकार, कोई कहे आएगी सरकार
फैसला करेगी जनता,क्योंकि ये है जनता की सरकार
हमें इन बड़बोले लोगों के बोलों से क्या है सरोकार
मोदी जी की सुनो ललकार.....
सुनों प्यारों,अभी तो तो ये अंगड़ाई, बाकी बहुत लड़ाई है
सत्तर साल में अमीर-गरीब में बढ़ गई बहुत लम्बी खाईं है
शुरू हो गई जंग जनता की,चाहे हो आर या पार
मोदी जी की सुनो ललकार.....
शिकंजा बेइमानों पर कसने को करेंगे एक जमीन-आसमान
किया बड़े नोटों से, अब खंगालेंगे बेनामी जमीन-मकान
बेईमानों के दिल में मच गया अभी से हाहाकार
मोदी जी की सुनो ललकार.....
 मोदी जी की सरकार की धूम मची सात समुन्दर पार
हार की कगार पर पहुंच बोले, अबकी बाद ट्रंप सरकार
भारतीयों के मोदी प्रेम से अमेरिका में बनी डोनाल्ड सरकार
मोदी जी की सुनो ललकार.....
ये देश है मेरी जान, इसे बनाना है दुनिया भर में महान
बदल देंगे 100 में से 80 बेइमान,चाहे कुछ भी हो अंजाम
अब और नहीं सहेंगे,देश में कहीं भी अत्याचार
मोदी जी की सुनो ललकार.....
 चाहे जाए मेरी सरकार, चाहे सीमा हो कोई भी पार
देशप्रेमियों से है मुझे प्यार,और रहेगा सदा ही प्यार
प्राण जाए पर वचन न जाए,चलेगा यही रहेगी दरकार
मोदी जी की सुनो ललकार...
अनिल कुमार मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार

Sunday, 13 November 2016

मां तेरी ममता है महान

मां तेरी ममता है महान,तू ही गीता,तू ही रामायण,
तू ही वेद पुराण। मां तेरी ममता है महान....

जब आया तेरी कोख में,बेहद सावधान रही तू मां,
उलटा-सीधा कुछ न खाया,हर दम रखती ध्यान तू मां,
नौ माह पाला कोख में,तेरा विचित्र ज्ञान है,
मां तेरी ममता है महान...

प्रसव पीड़ा सहकर मुझको ,तुने दिया संसार मां,
अमृत तुल्य दूध पिला,कर तूने किया दुलार मां,
कैसे भुला दूं तेरा प्यार मां,किया बहुत अहसान,
मां तेरी ममता है महान...

जब जब रोया,लोरी गाकर मुझको तूने सुलाया मां ,
याद रखा हर दम,क्षणभर नहीं भुलाया मां,्र
चरण वंदना करता हूं मां,तुझसे छोटे हैं भगवान,
मां तेरी ममता है महान...

जब जब शू शू करता मैं,चदरी गीली हो जाती थी,
मुझे सूखे में सुला कर,खुद गीले में सो जाती थी,
तेरा त्याग सोचकर,मुझे होता है अभिमान,
मां तेरी ममता है महान...

पुत्र होने का माता मैं भी, अपना फर्ज निभाऊंगा,
समय-समय पर माता मैं,तेरा श्रवण बन जाऊंगा,
तुझे नमन शत-शत बार नमन,तुझमें बसते हैं प्राण,
      मां तेरी ममता है महान...
                                         -नरेन्द्र शर्मा,एडवोकेट