new

Monday, 16 October 2017

यूपी में सपा का उदय होना भाजपा के लिए खतरा

उत्तर प्रदेश में चार बड़ी राजनीतिक घटनाएं हुईं। ये सारी घटनाएं देश और प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ जातीं हैँ। पहली घटना यह कि उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य और मंत्री सिद्धार्थ सिंह के क्षेत्र और भाजपा के तीन वर्ष से बने अजेय दुर्ग इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र संघ के चुनाव में सत्ता में आने को बेताब समाजवादी पार्टी ने सेध लगा ली है। इसका सीधा मतलब यह लगाया जा रहा है कि छात्र राजनीति के सहारे अखिलेश यादव का उदय हो रहा है। बताया जा रहा है कि इन चुनावों में श्री मौर्य और सिद्धार्थ सिंह दोनों ने ही छात्र-छात्राओं से एबीवीपी के पक्ष में मत करने के लिए अपील की थी लेकिन तीन साल से लगातार एबीवीपी की जीत के बाद आज उस समय सपा की छात्र सभा ने एबीवीपी को मात्र एक सीट देकर सारी सीटों पर कब्जा कर लिया है। यह भी उस समय जब यूपी में भाजपा के फायरब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ की सरकार है। एक तरह से इसे भाजपा के खिलाफ जनादेश कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।
दूसरी घटना यह है कि इस जीत से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल सिंह यादव को किनारे लगाते हुए अपने पिता नेताजी मुलायम सिंह को अपने साथ कर लिया है। इससे समाजवादी पार्टी को बहुत बड़ी ताकत मिलने जा रही है। इसका असर प्रदेश के निकाय चुनावों में देखने को मिलेगा।
तीसरी घटना यह है कि महाराष्ट्र और पंजाब में मिली जीत से कांग्रेस पूरे रंग में आ गई है। पार्टी के महासचिव गुलाम नबी आजाद ने समाजवादी पार्टी से गठबंधन को तोड़ते हुए निकाय चुनाव अकेले ही लडऩे का निश्चय किया है। उन्हें विश्वास है कि गुजरात से राहुल गांधी और पंजाब की बड़ी जीत से जहां हिमाल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में पार्टी को अच्छी सफलता मिलेगी वहीं यूपी के निकाय चुनाव में पार्टी पहले से बेहतर प्रदर्शन करेगी।
चौथी घटना कानपुर महानगर से है। यहां के व्यापारी आजकल रेजगारी यानी चिल्लर को लेकर बहुत परेशान हैं। ये व्यापारी बैंकों की दादागिरी से भी परेशान हैं। आरबीआई के निर्देशों को ताक पर रखने वाले बैंकों से तंग आकर इन व्यापारियों ने पूरे प्रशासन में हाथ-पांव मारे और अखबारबाजी भी कर डाली लेकिन जब इन्हें कोई रास्ता न सूझा तो एक होडिँ्रग बनवा कर लगवा दी। गलती यह हो गई कि इन व्यापारियो ने अपनी भड़ास पीएम मोदी पर सीधी निकाली और उनकी तुलना उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन से कर डाली। बस क्या था पूरा प्रशासन इन व्यापारियों के पीछे पड़ गया और एक व्यापारी जेल में बाकी के खिलाफ मुकदमा। लेकिन यह गुस्सा भाजपा के खिलाफ ही फूट रहा है।

Sunday, 15 October 2017

क्या दिखने लगा जीएसटी,नोटबंदी का असर

बदल रहा जनता का मूड, मौका देख कर लगा सकती है कांग्रेस चौका

अभिनेता से नेता बने बीजेपी सांसद विनोद खन्ना के निधन के कारण पंजाब की गुरदासपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जिस तरह से कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने बीजेपी-अकाली गठजोड़ के उम्मीदवार स्वर्ण सलारिया को 1.93 लाख वोटों से शिकस्त दी है,उससे लगता है कि मोदी सरकार पर जीएसटी और नोटबंदी का विपरीत असर होना शुरू हो गया है। महाराष्ट्र और पंजाब से मिली जीत ने कांग्रेस को संजीवनी प्रदान की है। यह भी कहा जा रहा है कि राहुल गांधी के बदले स्वरूप ने अभी से जादू दिखाना शुरू कर दिया है। इसीलिए भाजपा पिछले पैरों पर आ गई है। मोदी स्वयं सोच रहे होगें  कि कोई भी जतन करके फिलहाल गुजरात बचा लिया जाए। गुजरात की हार बहुत महंगी पड़ेगी। इसके बाद होने वाले चुनाव का असर 2019 में होने वाले आम चुनाव पर सीधा असर पड़ेगा। क्योंकि इस समय जो चीज़ बदली है, वह है जनता का मूड। जनता का मूड बदलता है तो नेता के लिए रवैया भी बदलता है। कांग्रेस के लोग ख़ुद कह रहे हैं कि पहले हम नरेंद्र मोदी या भाजपा पर हमला करते थे तो लगता था कि दीवारों से बात कर रहे हैं. लेकिन अब बात करते हैं तो लगता है कि हमारी बात सुनी जा रही है।
सुनील जाखड़ के पक्ष में 4,99,752 वोट पड़े और उनके सबसे कऱीबी उम्मीदवार रहे स्वर्ण सलारिया को 3,06,533 वोट मिले.
आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार मेजर जनरल सुरेश कथूरिया के पक्ष में महज 23,579 वोट ही पड़े। अभिनेता से नेता बने बीजेपी सांसद विनोद खन्ना के निधन के कारण पंजाब की गुरदासपुर लोकसभा सीट पर ये उपचुनाव कराए गए थे। राहुल गांधी पिछले महीने जब अमरीका की एक यूनिवर्सिटी गए तो वहां उन्होंने अपने कम्युनिकेशन से काफ़ी ध्यान खींचा. इस स्तर पर राहुल में ज़रूर सुधार दिखाई देता है. उनके जुमलों में भी पैनापन दिखा है। लेकिन राहुल के अपने हुनर के अलावा भी गुजरात में कांग्रेस ने अपने संवाद और सोशल मीडिया के मोर्चे पर बहुत सुधार किया है और जैसा फ़ीडबैक मिला है कि एक मज़बूत टीम खड़ी की है. गुजरात में पूरी कांग्रेस पार्टी की आक्रामकता ज़ाहिर हो रही है। सोशल मीडिया पर कांग्रेस का चलाया ट्रेंड विकास पगला गया है वायरल हो गया है और यह बात बिल्कुल घर-घर में चली गई है। भाजपा को रक्षात्मक तरीक़े से इसका जवाब देना पड़ा है। 

Friday, 13 October 2017

खतरे की घंटी है राहुल गांधी का बढ़ता कद

2014 में भाजपा के हाथों पिटने के बाद आंख खुली हो या न खुली हो लेकिन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी इस बार गुजरात की राजनीति में खुलकर खेल रहे हैं और उन्हें उत्तर भारत से अधिक समर्थन भी मिल रहा है। राहुल गांधी के कद को बढ़ाने के लिए पुराने कांग्रेसी और राष्ट्रपति पद को सुशोभित कर चुके प्रणव मुखर्जी आगे आए हैं। जनाब मुखर्जी दूध के धुले हुए नहीं हैं, इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जब राजीव गांधी को प्रधानमंत्री बनाया जा रहा था तब विरोध करने वाले यही मुखर्जी थे। उस समय प्रधानमंत्री इसलिए बनना चाहते थे कि वह कैबिनेट में दूसरे नंबर के मंत्री थे। राष्ट्रपति पद से अवकाश लेने के बाद इतनी बड़ी हस्ती हो जाती है कि वह राजनीति से दूर रहना चाहती है लेकिन प्रणव मुखर्जी  ने अचानक राजनीति वह भी कांग्रेसपरस्त राजनीति की वकालत करके लोगों को चौंका दिया है। उन्होंने भविष्यवाणी कर दी है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस फिर से वापसी करेगी। यही नहीं उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कांग्रेसी नेता की हैसियत से कहा कि यह कहना बिलकुल गलत है कि 132 साल पुरानी पार्टी फिर से सत्ता में वापसी नहीं करेगी। यही नहीं रुके और आगे बढक़र बोले कि पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम और गिरती अर्थव्यवस्था के कारण मोदी सरकार की किरकिरी हो रही है। इतना ही नहीं उन्होंने चेतावनी भरी सलाह देते हुए कहा कि मोदी सरकार इनमें अधिक बार फेरबदल करके इसे पैनिक न बनाए वरना....। राहुल गांधी का कद महाराष्ट्र के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों अशोक चव्हाण और पृथ्वीराज चव्हाण ने बढ़ाया है। अशोक चव्हाण ने अपने गढ़ महाराष्ट्र के नांदेड़ की म्युनिसिपल कारपोरशन के चुनाव में कांग्रेस को जबर्दस्त जीत दिलवाई है। यह कहा जा रहा है कि भाजपा के गढ़ में सेंध लगा दी है जो मोदी राज में आसान नहीं है। इसी से मोदी जी को समझना चाहिए कि नाम नहीं काम बोलता है। पृथ्वीराज चव्हाण ने ऐलान कर दिया है कि राहुल गांधी गुजरात समेत पूरे देश की कमान संभालने के लिए तैयार हैं। अशोक चव्हाण ने अपने गढ़ के चुनाव में भाजपा-शिवसेना दोनों को कसके पटकनी दी है। नांदेड़ म्युनिसिपल कारपोरेशन की 81 सीटों में 73 सीटें कांग्रेस की झोली में डलवाकर मोदी सरकार को सोचने को विवश कर दिया है। क्योंकि महाराष्ट्र की सीमा से ही लगी हैं गुजरात की सीमाएं जहां पर दिसंबर में विधानसभा चुनाव संभावित हैं। 

शाह मोदी को ले डूबेंगे

नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की जुगलबंदी बहुत पुरानी है। गुजरात के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से लेकर आज प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष तक सफर तो तय हो गया। यह बात और है कि मोदी ईमानदार हैं और शाह की छवि अब धूमिल होती नजर आ रही है। मोदी को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाने वाले अमित शाह ही है। अगर मोदी डूबे तो उसकी वजह भी शाह ही बनेंगे। आइए समझते हैं कैसे?
मोदी जब प्रधानमंत्री पद के दावेदार बनें और देशभर में घूम-घूम कर अच्छे दिन का प्रचार कर रहे थे। तब यह माना जा रहा था कि मोदी की सरकार बनेगी लेकिन खिचड़ी सरकार बनेगी या एनडीए की साझा सरकार बनेगी। उस समय अमित शाह ने ही जुमला दिया था कि यदि मोदी प्रधानमंत्री बनते हैं तो देश का काला धन जो स्विस बैंकों में जमा है, उसे देश लाया जाएगा और इससे प्रत्येक भारतवासी के खाते में 15-15 लाख रुपये जमा किए जाएंगे। इससे मोदी और भाजपा के प्रति लोगों का समर्थन बढ़ गया। यही नहीं उत्तर प्रदेश में चुनाव हो रहे थे तो वहां पश्चिमी उत्तर प्रदेश मेें हुए दंगों को लेकर उन्होंने एक ऐसा बयान दिया था जिसके चलते वोटों का एकतरफा धु्रवीकरण हो गया था, जिसके परिणामस्वरूप भाजपा को प्रचंड बहुमत और विपक्ष धराशायी हो गया था। अब चूंकि आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार की किरकिरी हो रही है और विपक्ष के साथ ही असंतुष्ट भाजपाई सरकार को घेर रहे हैं। ऐसे में जय शाह का मामला आग में घी की तरह है। इस मामले में पहली बार अमित शाह ने जो सफाई दी है वह जनता के गले नहीं उतर रही है। अमित शाह के लिए सुनहरा मौका है, यदि वे नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देते हैं तो मोदी सरकार की टीआरपी फर्श से अर्श तक पहुंच जाएगी। यदि ऐसा नहीं करते हैं तो इसका खामियाजा मोदी सरकार को ही भुगतना होगा। लोग ये समझ रहे हैं कि मोदी तो ईमानदार हैं लेकिन उनके साथी वैसे नहीं हैं, वे दोनों हाथों से अपनी झोलियां भर रहे हैं। अमित शाह जब सफाई देते वक्त बोफोर्स कांड का जिक्र कर रहे थे तब उन्हें यह भी ध्यान कर लेना चाहिए था कि इस कांड का खुलासा ठीक ऐसे ही समय हुआ था जब राजीव गांधी ईमानदार व्यक्ति थे और उनकी किचेन कैबिनेट के लोग ऐसे थे जिनकी वजह से प्रचंड बहुमत वाली कांग्रेस को सरकार बनाने तक का मौका नहीं मिला था। 

Wednesday, 11 October 2017

गुस्ताखी माफ: देखना है जोर कितना बाजुए ‘साहिल’ में है

देखना है जोर कितना बाजुए साहिल में है
हम अभी से क्या बताएं,ऐ भारत के सरजमी औ आसमां
हम लिखेंंगे 2022 में गरीबी की नई दासतां
ये बात कहां तलक सच है मान लेता ये सारा जहां
पांच साल में क्या हुआ, औ था तुमने क्या-क्या कहा
अब हमें तुम क्या सुनाओगे, गरीबी की नई दासतां
देखना है जोर कितना बाजुए साहिल में है...
बात करते हो गरीबी भारत छोड़ो की
करते हो नोटबंदी औ लगाते हो जीएसटी
पहले नोटबंदी ने मारा,फिर जीएसटी ने रुलाया
बचाखुचा इन्कम टैक्स के हौवा ने हाहा कार मचाया
कौन सुन रहा है गरीबों की दासतां
देखना है जोर कितना बाजुए साहिल में है...
तुमने भले ही चाय बेची हो, गरीबी देखी हो
आज आइना उठा देखो क्या तुम वही मोदी हो
साथी बदल गए, जमाना बदल गया
हम कैसे न माने कि फसाना बदल गया
तुमसे बहुत दूर हो गया गरीबी का रास्ता
देखना है जोर कितना बाजुए साहिल में है...
गरीबी कांग्रेस नहीं, जिसे तुम यूं ही मिटा दोगे
चहेते दौलमंदों को क्या गुरुद्वारे पर बिठा दोगे
उनकी अकूत दौलत को गरीबों में बंटवा दोगे
या फिर कोई 15 लाख का नया जुमला दोगे
अब तुम्हारा पड़ा है गरीबों से ही वास्ता
देखना है जोर कितना बाजुए साहिल में है...
वाह क्या बात है गुजरात के नगीनों करें गुफ्तगू
दयानंद,बापू और पटेल ने बिखेरी उम्दा खुशबू
जां पर खेल कर भारत मां को दिया खासमखास
इसलिए हिंदोस्तां ही नहीं, जमाना करता है याद
एक ने दिया आर्य समाज,दूसरे ने आजादी
तीसरे ने तो अखंड भारत की राह दिखला दी
अब तुम्हारे हिस्से में आया है हिंदोस्तां
देखना है जोर कितना बाजुए साहिल में है...
जुबां पर एक बार फिर ये फरियाद आती है
मोदी जी आप भी इन्हीं हस्तियों के साथी हैं
वतन वही और वही तुम्हारी माटी है
अब तुम देख रहे हो किसका रास्ता
देखना है जोर कितना बाजुए साहिल में है...
अब तुम्हारी बारी है, कुछ करक दिखलाओ
कोरे आंकड़ों से गरीबों का मजाक न उड़ाओ
क्योंकि अब तुम्हारे घर से उठी आवाज मोदी भगाओ
मोदी भगाओ, देश बचाओ, हो गई है हमसे भूल
हमनें क्यों चुना था 2014 में कमल कर फूल
2019 में ही निकालों कुछ नया रास्ता
देखना है जोर कितना बाजुए साहिल में है...
हालांकि तुम्हें याद आ गयी अपनी देहरी और अपना घर
भूले-बिसरे याद आए और पहचान ली तुमने अपनी डगर
फिर भी सभी ओर से आई आवाज, मोदी भाई करलो कुछ जतन
क्योंकि उम्मीद से ज्यादा उम्मीद कर बैठा है वतन
अब तुम ही निकालों गरीबों का कोई नया रास्ता
देखना है जोर कितना बाजुए साहिल में है...

मोदी जी नारे से गरीबी भारत नहीं छोड़ सकती

संभल कर रहिये ये पब्लिक है सब कुछ जानती है

मई 2014 में जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केन्द्र में सत्तारूढ़ हुए थे तब देश की सवा करोड़ जनता को यह विश्वास था कि यह सरकार उनके खाते में कालेधन का 15-15 लाख रुपया डालेगी। जब भाजपा की ओर से मात्र जुमला बताया गया तो लोगों को काफी धक्का लगा। इसके बाद भी लोगों ने विश्वास किया कि यह सरकार ईमानदार और गरीबों की समर्थक है। इसलिए नोटबंदी जैसा सख्त कदम भी आसानी से पचा गए कि इससे बड़े लोगों की शामत आएगी। पता चला कि उलटा हो गया और गरीबों के सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया। नंबर दो के काम खत्म तो आमदनी भी खत्म और जब आमदनी खत्म तो उनके आश्रित रहने वाले कामगारों की नौकरी भी खत्म। मतलब इसकी गाज गरीबों पर ही गिरी। 8 नवंबर 2016 के इस आर्थिक भूकंप की मार से अभी उबर भी नहीं पाए थे कि जीएसटी का बवाल सिर पर आ गिरा वह भी 28 प्रतिशत टैक्स का। एक चौथाई से अधिक टैक्स का। इस झटके ने दरिद्रनारायण के शरीर से एक और चिथड़ा उतार लिया। अब फिर से छोटे व्यापारी और कल कारखाने वालों ने अपने मातहतों के समक्ष हाथ खड़े कर दिये। इसका नतीजा यह हुआ कि आम आदमी सडक़ पर आ गया। पेट्रोल पर केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच चल रहे बंदरबाट के खेल से आम आदमी कराह उठा। आम आदमी तो छोडिय़े छोटे मझोले कारोबारी अपने लेन-देन से इतने तनावग्रस्त हो गए कि आत्महत्या जैसा घातक कदम उठाने को मजबूर हो गए हैं। अब मोदी जी ने  संघ प्रचारक नानाजी देशमुख की जन्मशती और जयप्रकाश नारायण की जयंती पर भारत गरीबी छोड़ो का नारा बुलंद करते हुए अपने लिए 2019 की जमीन तैयार करने की पटकथा लिखनी शुरू कर दी है। मोदी जी उत्तर प्रदेश के हजारों स्कूलों में मध्यान्ह भोजन यानी मिड डे मील जिसे एमडीएम भी कहा जाता है, का अन्न नहीं पहुंचा है आप गरीबी हटाने की बात कर रहे हैं। यह असंभव बात है। देश को कांग्रेस मुक्त आपने नहीं कांग्रंस ने खुद बनवाया है। आपको शायद यह गलतफहमी हो गई है कि आपने देश को कांग्रेस मुक्त का नारा दिया और देश कांग्रेस मुक्त हो गया। मोदी जी ऐसे ही गरीबी भारत छोड़ों का नारा देने और कुछ सरकारी आंकड़ों के दिखाने भर से काम नहीं चलने वाला। गुजरात और महाराष्ट्र के निकाय चुनाव के भरोसे न बैठिये। गुजरात तो आपका गढ़ है। वहां विधानसभा चुनाव में आपको सफलता एक बार मिल भी सकती है लेकिन गरीब तो पूरे देश में हैं और वोटिंग के दिन वह गरीब नहीं जनार्दन यानि मालिक बन जाता है, आपके किस्मत की रेखा वहीं तय करेगा। इस बात को सोच कर चेतिये वरना जब इंदिरा गांधी को कोइ्र नहीं बचा सकता तो आप तो अभी पांच साल की पहली पारी पूरी करके मैदान में आने वाले हैं। ये जनता जनार्दन है। आपसे पूरे पांच साल का हिसाब लेगी। पास फेल तो वह सीधे चुनाव में करेगी। नाना देशमुख की जयंती पर  पीएम ने कहा कि नानाजी देशमुख और लोकनायक जेपी ने मातृभूमि की सेवा की। दोनों महापुरुषों ने अपना जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गांवों और शहरों को समान सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शहर को गांवों के लिए मार्केट बनना चाहिए। पीएम ने कहा कि दीपावली के दीये गांव के कुम्हार से खरीदें। उन्होंने कहा कि 18000 गांव ऐसे थे जो कि 18वीं शताब्दी में जी रहे थे वहां पर बिजली भी नहीं थी। हमने लालकिले से 1000 दिन में इन गांवों में बिजली देने का बीड़ा उठाया, अब तक 15,000 गांवों में बिजली पहुंचा चुके हैं। हमारी सरकार मुफ्त में बिजली कनेक्शन दे रही है। पीएम मोदी ने कहा कि देश में कमी संसाधनों की नहीं बल्कि सुशासन की है। ग्रामीण विकास के लिए सुशासन का प्रयास जारी है. आने वाले दिनों पर ग्रामीण विकास पर सरकार का ज्यादा जोर होगा. जिन राज्यों में ज्यादा गरीबी है, वहां मनरेगा का काम कम हो रहा है। जिन राज्यों में सुशासन है, वहां मनरेगा का काम ज्यादा हुआ है।मोदी ने आगे बताया कि देश में गरीबी भारत छोड़ो अभियान चलाया जा रहा है और 2022 तक इसको पाने की कोशिश होगी। मोदी ने कहा कि टिंबर की खेती लोगों के लिए काफी फायदेमंद हो सकती है। कार्यक्रम में मोदी ने शौचालय बनाने और गंदगी को खत्म करने की भी बात की। प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में केवल वोट का अधिकार नहीं है, बल्कि जनता की भागीदारी भी काफी जरूरी है। सरकार हर योजना की समीक्षा कर रही है। 

नाबालिगों का विवाह ही क्यों?

शर्मनाक: 27प्रतिशत शादियां नाबालिगों की ही होती हैं

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अन्तर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है कि नाबालिग पत्नी के साथ संबंध बनाना रेप माना जाएगा। साथ ही कोर्ट ने सरकार से बाल विवाह  रोकने को कहा है। अब सवाल उठता है कि ये स्थिति क्योंआई कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष ऐसा वाद क्यों पहुंचा कि नाबालिग पत्नी के साथ संबंध बनाने पर अपराध है या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट से इतर आज बालिका दिवस भी है। इस अवसर पर हमें यह जानकर शर्म आती है कि आज भी देश में जितनी शादियां होतीं हैं उनमें से 27 प्रतिशत शादियां नाबालिग कन्याओं की होती हैं। कहा जाता है कि कथित रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान,मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड जैसे राज्यों में बाल विवाह की सबसे अधिक प्रथा प्रचलित है। जब ये आंकड़े सरकार के सामने आते हैं। तो सरकार क्या करती है। जब सुप्रीम कोर्ट को यह मालूम है कि अक्षय तृतीया के दिन इन राज्यों में बड़ी संख्या में सामूहिक रूप से बाल विवाह होते हैं। सरकार को चाहिए कि कानूनी सख्ती करने के साथ ही जागरुकता लाए। मैं कहता हूं कि सरकार बनाने के लिए और चुनाव जीतने के लिए आप वोटरों को अपनी पार्टी के प्रति जागरुक कर सकते हैं तो देश के भविष्य के लिए आप क्या नहीं कर सकते हैं। सिर्फ इच्छा शक्ति होनी चाहिए। हम 21 वीं शताब्दी में जी रहे हैँ , जहां गांव का अनपढ-अशिक्षित व्यक्ति भी आपको एंड्रायथ फोन धड़ल्ले से चलाता मिल जाएगा। उसे डंडे से हांकने की आवश्यकता अब नहीं रह गई है अब आवश्यकता है उसे समझाने  और उसके फायदे की बात बताने की है ताकि ऐसी नौबत ही न आए कि नाबालिगों के साथ किसी तरह का अत्याचार हो। 

Tuesday, 10 October 2017

‘छोटी कुर्सी’ के लिए छिड़ी महाभारत और ‘बड़ी कुर्सी’ के लिए क्या...

समाजवादी पार्टी की ओर से पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आजकल अपनी राजनीति चमका रहे हैं। इसके दो कारण है। पहला तो वह 2019 में अपनी पार्टी को अच्छे परिणाम दिलाना चाहते हैं। समाजवादी पार्टी में यह परंपरा है कि चुनाव से दो वर्ष पूर्व मैदान में उतर कर अपने समर्थकों और मतदाताओं को मनाने की कोशिशें करते रहो चुनाव अपने आप जीत जाओगे। उनकी यह बात सही है। अब उन्होंने कहा कि बड़ी कुर्सी छीन लेंगे। ठीक है छोटी कुर्सी के लिए परिवार में महाभारत के हालात है तो बड़ी कुर्सी के लिए क्या होगा? कभी इस पर विचार करोगे और एक बार मान भी लिया कि अच्छी इमेज और पढ़े लिखे युवा होने के नाते आपको बड़ी कुर्सी छीनने में कामयाबी मिल भी गई तो उस पर किसे बिठाओगे टीपू भइया। सारा देश देख रहा है कि कोई ऐसा चेहरा तो सामने आए जो इस कांटों भरी बड़ी कुर्सी पर बैठने को तैयार हो। रही बात कांग्रेस की तो उसकी दशा तुम्हारे सामने ही है। क्योंकि इसी सभा में अखिलेश ने कहा कि कांग्रेस के साथ गठजोड़ तो जारी रखेंगे। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने सहारनपुर के तीतरों में एक जनसभा को संबोधित करते हुए बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने हमसे छोटी (सीएम) की कुर्सी छीनी है लेकिन हम उनसे बड़ी (पीएम) की कुर्सी छीनेंगे। इसके इतर अखिलेश ने ईवीएम की गड़बड़ी की ओर इशारा करते हुए बीजेपी पर आरोप लगाया कि हम विधानसभा चुनाव में हारे नहीं बल्कि हमें धोखे से शिकस्त दी गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी यशपाल सिंह की जयंती के मौके पर सहारनपुर में जुटी भीड़ को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी समाज को बांटने का काम करती है, जातिवाद की राजनीति करती है। एसपी सुप्रीमो अखिलेश ने कहा कि 'अब हम भी जातिवाद की राजनीति करेंगे। हमने विकास की राजनीति की थी लेकिन हमें वोट नहीं मिला इसी वजह से अब जातिवाद की राह पर चलना होगा।

भाजपा ने फिर पीट दिया...


अब क्या करेंगे कांग्रेस के युवराज

कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केक गढ़ गुजरात के बड़ोदरा में अजीबोगरीब बयान दिया। उन्होंने कहा कि 2014 में भाजपा ने हमे इतना पीटा कि हमारी आंखें खुल गईँ। साथ ही यह भी कहा कि हम सत्ता में आएंगे तो सबसे पहले महंगाई पर काबू पाएंगे। वहां उपस्थित किसी ने पूछा कि आपके पास महंगाई रोकने का क्या फार्मूला है तो इसके जवाब मेकं उन्होंने कहा कि पेट्रोल की कीमतें सबसे पहले कम करें क्योंकि यही महंगाई की जड़ हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जो आप कपड़े पहन रहे हैँ, खा पी रहे है या कोई भी वस्तु बाजार से खरीद रहे हैं उसमें पेट्रोल की कीमतों की बहुत बड़ी भूमिका है। सोशल मीडिया में यह भी टिप्पणी आई कि राहुल गांधी अपने कांग्रेस शासित राज्यों में महंगाई को रोकने के लिए पेट्रोल कीमतें कम करने को कहें। पंजाब में सबसे अधिक महंगाई है। उसके लिए राहुल कुछ करेंगे। अभी यह बात चल ही रही थी कि अचानक दिन में खबर आई कि गुजरात और महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में भाजपा की जबर्दस्त विजय हुई है और कांग्रेस सिमट कर रह गई है। महाराष्ट्र में हाल ही में हुए ग्राम पंचायत चुनावों में दमदार जीत के बाद बीजेपी के लिए विधानसभा चुनाव से पहले गुजरात से भी अच्छी खबर आई है। यहां स्थानीय निकाय चुनाव में बीजेपी ने बड़ी जीत दर्ज की है। बीजेपी ने 7 में से 5 सीटें जीत ली है। कांग्रेस की सीटें घटकर आधी रह गई।इससे पहले महाराष्ट्र में पहले चरण के मतदान रिजल्ट में बीजेपी ने करीब 50 फीसदी सीटों पर कब्जा जमा लिया। 7 अक्टूबर को हुए 3,884 ग्राम पंचायत चुनावों में से 2,974 पंचायत के नतीजे मंगलवार को घोषित हुए जिसमें बीजेपी को 1457 सीटों पर जीत मिली। महाराष्ट्र पंचायत चुनाव में मिली इस बड़ी जीत पर पीएम नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को बधाई दी है और इसके लिए महाराष्ट्र की जनता का शुक्रिया अदा किया है। ग्राम पंचायत चुनावों में दूसरी पार्टियां बीजेपी से काफी पीछे हैं। इसमें कांग्रेस को 301 सीटें मिली हैं। वहीं 222 सीटों पर शिव सेना ने कब्जा किया है। एनसीपी ने 194 सीट पर बाजी मारी है। इस पर यह भी तंज आया कि भाजपा ने फिर पीट दिया। अब कांग्रेस के युवराज क्या फिर से भाजपा को यह कहते हुए धन्यवाद देंगे कि महाराष्ट्र और गुजरात तुम ले जाओ हम यूपी के निकाय चुनाव में इसका बदला लेंगे। राहुल जी तैयार रहिये यूपी में निकाय चुनाव अगले माह के अंत में होने वाले हैं। 

Monday, 9 October 2017

राहुल को पीएम बनने के लिए पहले आत्मविश्वास ढूंढना होगा

मोदी के सामने ब्रह्मास्त्र चलाना आसान नहीं, यूपी में पीके फार्मूला ने कांग्रेस में फूंकी थी जान

राहुल गांधी पीएम बननें और 2019 में कांग्रेस को सत्ता में लाने के लिए गुजरात में पूरी दमखम लगा रहे हैं। इस बीच यह खबर मिली कि उन्हें मोदी को हराने के लिए एक अमेरिकी कंपनी रूपी ब्रह्मास्त्र मिल गया है। पहले यह परंपरा थी कि ब्रह्मास्त्र उसे ही दिया जाता था जो इसको चलाने में पारंगत होता था। अब पहले ब्रह्मास्त्र को चलाने की विद्या राहुल को सीखनी होगी वरना यूपी जैसा ही हश्र होगा। चुनाव से पहले जब कांग्रेस ने पीके को कमान सौंपी थी। पीके ने अपना फार्मूला अपनाया था, जिसने शुरुआती  चरण में 27 वर्ष से मृतप्राय पड़ी कांग्रेस में जान फूंक दी थी। फिर अचानक कांग्रेस ने सपा से समझौते की बात छेड़ दी और समझौता किया तो उसका हश्र सामने आ गया। अब पहले राहुल गांधी आत्म विश्वास पैदा करें और लोगों पर विश्चास करना सीखें तभी कुछ बात बन सकती है। यही मौका है कि राहुल गुजरात को सीढ़ी बनाकर आगे बढें और अगले साल कई राज्यों में चुनाव हैं यदि आज से कमर कस कर कुछ काम करें तो बात बन सकती है और जिस तरह से आम जनता मोदी के शासन के तीन साल में ऊब गई है उसका फायदा मिल सकता है वरना कोई भी ब्रह्मास्त्र राहुल को पीएम की गद्दी तक नहीं पहुंचा सकता।
क्या कांग्रेस को 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए ब्र्रह्राास्त्र मिल गया है? रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस कैंब्रिज ऐनालिटिका नाम की उस चर्चित कंपनी के संपर्क में है जिसने पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डॉनल्ड ट्रंप को जितवाने में अहम भूमिका निभाई थी। दरअसल, कैंब्रिज ऐनालिटिका कन्ज़्यूमर्स के इंटरनेट डेटा का विश्लेषण करके यह पता लगाने का काम करती है कि लोगों को क्या पसंद-नापसंद है, लोगों के लिए मुद्दे क्या हैं ताकि नेता उसी हिसाब से अपनी रणनीति तैयार कर सकें। इस विश्लेषण में ऑनलाइन सर्च, ईमेल और यहां तक की शॉपिंग वेबसाइट्स को भी खंगाला जाता है।  2014 के लोकसभा चुनाव में जब यह बात सामने आई कि बीजेपी सोशल मीडिया को भी ध्यान में रखकर चुनावी रणनीति तैयार कर रही है तो राजनीतिक पंडितों ने इसे ज्यादा तवज्जो नहीं दी। उनका मानना था कि भारत की ग्रामीण जनता का इससे कोई सीधा ताल्लुक नहीं है, लेकिन बीजेपी की शानदार जीत ने यह साबित किया कि मतदाताओं के समूह की पहचान करने और फिर उन्हें ध्यान में रखते हुए चुनावी रणनीति बनाने में इंटरनेट का भारी योगदान रहा। बीजेपी और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोशल मीडिया पर काफी ऐक्टिव रहते हैं और उसके जरिए उन्होंने कई बड़े अभियान भी चलाए हैं। स्मार्ट ऑनलाइन कैंपेन के जमाने में अब पुरानी चुनावी रणनीतियां और तरीके उतने कारगर नहीं रहे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कैंब्रिज ऐनालिटिका के सीईओ अलेग्जेंडर निक्स ने अगले लोकसभा चुनाव में यूपीए के लिए चुनावी रणनीति बनाने के सिलसिले में विपक्ष के कई नेताओं से मुलाकात की है। कंपनी ने कांग्रेस को एक प्रेजेंटेशन भी दिया है जिसमें वोटरों को ऑनलाइन साधने की रणनीति को विस्तार से बताया गया है।
बता दें कि कैंब्रिज ऐनालिटिका का लोहा आज पूरी दुनिया मान रही है। कंपनी ने न सिर्फ अमेरिका में ट्रंप की जीत में बड़ा रोल निभाया, बल्कि ब्रेग्जिट को लेकर हुए जनमत संग्रह में भी कमाल दिखाया। ऐनालिटिका ने ब्रेग्जिट के पक्ष में कैंपेन चलाया था जिस पर ब्रिटेन की जनता ने भी मुहर लगाई। दुनियाभर की कई राजनीतिक पार्टियां आज कंपनी के संपर्क में हैं। माना यह जा रहा है कि अगर सही वोटरों को टारगेट कर के ट्रंप जैसे उम्मीदवार चुनाव जीत सकते हैं तो फिर अन्य लोग भी जीत सकते हैं। बता दें कि अमेरिकी चुनाव की शुरुआत में ट्रंप को काफी कमजोर माना जा रहा था। अपने चुनावी अभियान में ट्रंप ने विदेशी कामगारों को लेकर सख्त रवैया अपनाया था, लेकिन फिर भी वह हिंदुओं को लुभाने में कामयाब रहे। बताया जाता है कि यह रणनीति कंपनी के उस डेटा पर आधारित थी जिसमें बताया गया था कि कुछ अहम राज्यों में हिंदू वोटर्स अपना पाला बदल सकते हैं। यह कंपनी की सुझायी रणनीति ही थी कि ट्रंप ने भारतीय वोटरों को लुभाने के लिए हिंदी में विज्ञापन जारी किए। वर्जिनिया में ट्रंप की बेटी एक हिंदू मंदिर में दीपावली मनाती नजर आईं और ट्रंप यह कहते देखे गए कि वाइट हाउस में भारतीयों और हिंदू समुदाय का एक सच्चा दोस्त पहुंचेगा। अभी तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाए जाने वाले ऑनलाइन अभियानों की कोई काट विपक्ष नहीं ढूंढ पाया है। मोदी की सीधे वोटरों तक पहुंचने की कला और बीजेपी चीफ अमित शाह की चुनावी रणनीति, मतदाता की इच्छाओं के विश्लेषण के आधार पर ही तैयार होती है। अभी तक इस मोर्चे पर कमजोर माने जाने वाले विपक्ष ने भी अब इसी रास्ते पर आगे बढऩे का फैसला किया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या कैंब्रिज ऐनालिटिका जैसी कंपनी के सहारे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अगले लोकसभा चुनाव में मोदी को हरा पाएंगे? इस सवाल का जवाब शायद वक्त और डेटा ही तय करेंगे।