प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को घेरने के लिए कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी सहारा और बिड़ला से रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगाकर नए झमेले में फंस गए। गुजरात के सीएम पद पर रहते हुए नरेन्द्र मोदी द्वारा सहारा से 40 करोड़ रुपये लिये जाने का आरोपों के दस्तावेज यानी सहारा की डायरी में दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का नाम है, जिन्हें सहारा से एक करोड़ रुपये लेने का संगीन आरोप लगा है। जब यह बात उजागर हुई तो शीला दीक्षित ने इन आरोपों और इस डायरी के वजूद को नकार दिया। इससे मोदी पर लगने वाले आरोप अपने आप ही कांग्रेस के लिए उल्टे पड़े और राहुल गांधी की अपने आप किरकिरी हो गई। सन् 2013 और 2014 के बीच दिल्ली और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्रियों पर सहारा से एक करोड़ व 40करोड़ रुपये लेने का आरोप लगा है। भाजपा के एक नेता ने भी शीला दीक्षित की बात को समर्थन देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी सबूतों के अभाव में इस दस्तावेज को सही नहीं माना था। उधर शीला दीक्षित का कहना था कि ये आरोप कही-सुनी बातों के आधार पर लगाए जा रहे हैं।
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Sunday, 25 December 2016
मोदी के मन की बात: विश्व में भारत ने सफलता के झंडे गाड़े
नोट बंदी के निर्णय लागू होने के बाद कैशलेस सोसायटी, कालेधन के खिलाफ अभियान,आयकर वंचकों को पकडऩे के अभियान से अर्थव्यवस्था को न सिर्फ मजबूत बनाने बल्कि विश्व में भारतीय अर्थव्यवस्था का लोहा मनवाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अथक प्रयास किए हैं। उनके ये प्रयास जारी है। उनका कहना है कि मेरी सरकार का उद्देश्य वर्तमान पीढ़ी में ही भारत देश को विकसित देश बनाना है। प्रधानमंत्री के तमाम प्रयासों से भारतीय अर्थव्यवस्था ने विश्व स्तर पर जो छलांग लगाई है, उससे वह बहुत खुश हैं। श्री मोदी ने मन की बात में इन कामयाबियों का जिक्र करते हुए बताया कि पिछले दिनों विश्व के ‘अर्थ मंच’ पर भारत ने अनेक क्षेत्र में अपना नाम बड़े गौरव के साथ अंकित करवाया है। उनका कहना है कि हमारे देशवासियों के लगातार प्रयासों का परिणाम है कि अलग-अलग संकेतों के जरिये भारत की वैश्विक रैंकिंग में बढ़ोतरी दिखाई दे रही है। विश्व बैँक बिजनेस रिपोर्ट में भारत की रैँकिंग बढ़ है। हम भारत मे बिजनेस प्रैक्टिस को दुनिया के बेस्ट प्रैक्टिस के बराबर बनाने का तेजी से प्रयास कर रहे हैं और सफलता मिल रही है। अंकटाड द्वारा जारी वल्र्ड इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट के अनुसार टॉप रिस्पेक्टिव होस्ट इकोनॉमीस फार 2016-18 में भारत का स्थान तीसरा पहुँच गया है। वल्र्ड इकोनॉमिक फोरम के ग्लोबल कम्पटीटिव्स रिपोर्ट में भारत ने 32 स्थानों की छलांग लगाई है । ग्लोबल इन्नोवेशन इन्डेक्स 2016 में हमने 16 स्थानों की बढ़त हासिल की है और वल्र्ड बैंक के लागिस्टिक परफार्मेंन्स इन्डेक्स 2016 में 19 रैक की बढोतरी हुई है। कई रिपोर्ट ऐसी हैं जिसके मूल्यांकन भी इसी ओर इशारा करते हैं। भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है ।
मोदी के मन की बाद:किसान,मजदूर और नौजवान की मेहनत रंग लाई
डिजिटल पेमेंट पर राज्य सरकारों ने लिया बढ़ चढ़ कर भाग
देश में नोटबंदी के निर्णय के बाद कैशलेस अभियान के सफल बनाने में राज्य सरकारों की भूमिका को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मन की बात में देश के सभी राज्यों व संघ शासित क्षेत्र को भी बधाई दी और कहा कि सबने अपने-अपने प्रकार से इस अभियान को आगे बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि आंध्र के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में एक कमेटी भी बनाई है, जो इसके लिये अनेक योजनाओं पर विचार कर रही है, लेकिन मैंने देखा कि सरकारों ने भी अपने तरीके से कई योजनाएँ लागू की है, आरंभ की है। किसी ने मुझे बताया कि असम सरकार ने प्रापर्टी टैक्स और व्यापार लाइसेंस फीस का डिजिटल भुगतान करने पर 10 फीसदी छूट देने का निर्णय किया है। ग्रामीण बैंको के ब्रांच अपने 75 प्रतिशत उपभोक्ता से जनवरी से मार्च के बीच कम से कम दो डिजिटल ट्रांजेक्शन करवाते हैं, तो उन्हें सरकार की ओर से 50 हजार रूपये ईनाम मिलने वाले हैं। 31 मार्च 2017 तक अगर 100 प्रतिशत डिजिटल ट्रांजेक्शनकरने वाले गाँवों को सरकार की ओर से उत्तम पंचायत के तहत 5 लाख रुपये का ईनाम देने की उन्होंने घोषणा की है। उन्होंने किसानों के लिए डिजिटल कृषक शिरोमणि पुरस्कार के तहतअसम सरकार ने ऐसे पहले 10 किसानों को 5 हजार रुपया ईनाम देने का निर्णय किया है जो बीज और खाद की खरीद के लिए पूरी तरह डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि मैं असम सरकार को बधाई देता हूँ लेकिन इस प्रकार से प्रयासों के लिये सभी सरकारों को बधाई देता हूँ। कई संगठनों ने भी गाँव गरीब किसानों के बीच डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के कई सफल प्रयोग किये हैं। मुझे किसी ने बताया कि गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर कारपोरेशन यानी जीएनफसी,जो मुख्यत: खाद का काम करता है, उन्होंने किसानों को सुविधा हो इसलिये एक हजार पीओएस मशीन खाद जहाँ बेचते हैं, वहाँ लगाए हैं और कुछ ही दिनों में 35 हजार किसानों को 5 लाख खाद के बोरे डिजिटल गतान के माध्यम से कर दिये और ये सब सिर्फ दो हफ्ते में किया है। यह है कि पिछले वर्ष की तुलना में खाद की बिक्री में 27 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछली बार भी ‘मन की बात’ में मैंने कहा था कि इन कठिनाइयों के बीच भी हमारे किसानों ने कड़ी मेहनत कर के ‘बुवाई’ में पिछले साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। कृषि क्षेत्र के दृष्टि से ये शुभ संकेत हैं। इस देश का मजदूर हो, इस देश का किसान हो, इस देश का नौजवान हो इन सब के परिश्रम आज नये रंग ला रहे हैं।मोदी के मन की बात: दिव्यांगों को हक दिलाने में कामयाब रहे
संसद के ठप रहने से जनता से लेकर राष्ट्रपति तक नाराज रहे
नोटबंदी के निर्णय के बाद संसद के सत्र में विपक्ष द्वारा लगातार डाले गऐ व्यवधान से खिन्न प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मन की बात में कहा कि इस बार संसद का सत्र देशवासियों की नाराजगी का कारण बना, चारों तरफ संसद के गतिविधि के संबंध में रोष प्रकट हुआ। राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति महोदय ने भी प्रकट रूप से नाराजगी व्यक्त की, लेकिन इस हालत में भी, कभी-कभी कुछ अच्छी बात भी हो जाती है और तब मन को एक बहुत संतोष मिलता है। संसद के हो-हल्ले के बीच एक ऐसा उत्तम काम हुआ जिसकी तरफ देश का ध्यान नहीं गया है। उन्होंने कहा कि आज मुझे इस बात को बताते हुए गर्व और हर्ष की अनुभूति हो रही है कि दिव्यांग-जनों पर जिस मिशन को ले करके मेरी सरकार चली थी, उससे जुड़ा एक बिल संसद में पारित हो गया, इसके लिये मैं लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों का आभार व्यक्त करता हूँ, देश के करोड़ों दिव्यांग-जनों की तरफ से आभार व्यक्त करता हूँ। दिव्यांगों के लिए हमारी सरकार बचनबद्ध है। पीएम ने कहा कि मैंने निजी-तौर पर भी इसे लेकर मुहिम को गति देने की कोशिश भी की है। मेरा इरादा था, दिव्यांग-जनों को उनका हक मिले, सम्मान मिले, जिसके वो अधिकारी हैं। हमारे प्रयासों और भरोसों को हमारे दिव्यांग भाई-बहनों ने उस वक््त और मजबूती दी जब वे पैरालम्पिक में चार र्मेडल जीत करके ले आये, उन्होंने अपनी जीत से न केवल देश का मान बढ़ाया बल्कि अपनी क्षमता से लोगों को आश्चर्य चकित भी कर दिया। हमारे दिव्यांग भाई-बहन भी देश के हर नागरिक की तरह हमारी एक अनमोल विरासत है, अनमोल शक्ति है। मैं आज बेहद खुश हूँ कि दिव्यांग-जनों के हित के लिए ये कानून पास होने के बाद दिव्यांगों के पास नौकरी के ज्यादा अवसर होंगे। सरकारी नौकरियों में आरक्षण की सीमा बढा करके 4प्रतिशत कर दी गयी है। इस कानून से दिव्यांगो की शिक्षा, सुविधा और शिकायतों के लिए विशेष प्रावधान भी किये गए हैं। दिव्यांगों को ले करके सरकार कितनी संवेदनशील है इसका अंदाज आप इस बात से लगा सकते हैं कि केंद्र सरकार ने पिछले दो वर्ष में दिव्यांग-जनों के लिए चार हजार तीन सौ पचास कैंप लगाए। तीन सौ बावन करोड़ रूपयों की राशि खर्च करके पाँच लाख अस्सी हजार दिव्यांग भाई-बहनों को उपकरण बाँटे। सरकार ने संयुक्त राष्ट्र की भावना के अनुरूप ही नया कानून पारित किया है। पहले दिव्यांगों की श्रेणी सात प्रकार की हुआ करती थी, लेकिन अब कानून बना करके उसे इक्कीस प्रकार की कर दी गई हैं। इसमें चौदह नई श्रेणियाँ और जोड़ दी हैं। दिव्यांगों की कई ऐसी श्रेणियाँ शामिल की गयी हैं जिसे पहली बार न्याय मिला है, अवसर मिला है। जैसे थेलेसेमिया,पार्किन्सन, या फिर बौनापन, ऐसे क्षेत्रों को भी इस श्रेणी के साथ जोड़ दिया गया है। ऐसे लोगों को लाभ मिलेगा।मोदी के मन की बात: थकने,रुकने का सवाल ही नहीं
बेनामी संपत्ति का कानून भी जल्द ही अपना काम करेगा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मन की बात में देश भर से मिल रहे नोट बंदी और कालेधन पर फीडबैक से कुछअधिक ही खूश हैं और वह इस बारे में अपने निर्णय को सही ठहराते हैं। माई गॉव और मोदी ऐप पर मिल रहे संदेशों से नरेन्द्र मोदी का उत्साह बढ़ा है और वह अपने मंजिल को स्पष्ट रूप से देख पा रहे हैं। पुणे के एक कार्यक्रम में कालेधन वालों को चेतावनी देते हुए कहा कि यह मत सोचना कि मोदी भी अन्य सरकारों की तरह डांट-फटकार के सो जाएगा। मैं सोने वाला नहीं हूं। मैं कालेधन का जड़ से खात्मा करने के बाद ही चैन की सांस लूंगा। हमारी सरकार का उद्देश्य गरीबों को इंसाफ दिलाना है। अमीरों से मेरी कोई जाती दुश्मनी नहीं है, हम सारे काम देशहित में कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पत्र, लेखकों का ग्रुप ऐसा है, वे भी बहुत बड़ी संख्या में हैं। वो कहते हैं मोदी जी थक मत जाना, रुक मत जाना और जितना कठोर कदम उठा सकते हो, उठाओ, लेकिन अब एक बार रास्ता पकड़ा है तो मंजिल तक पहुंचना ही है। मैं ऐसे पत्र लिखने वाले सब को विशेष रूप से धन्यवाद करता हूँ क्योंकि उनके पत्र में एक प्रकार से विश्वास भी है, आशीर्वाद भी है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि ये पूर्ण विराम नहीं है, ये तो अभी शुरुआत है, ये जंग जीतना है और थकने का तो सवाल ही कहाँ उठता है, रुकने का तो सवाल ही नहीं उठता है और जिस बात पर सवा-सौ करोड़ देशवासियों का आशीर्वाद हो, उसमें तो पीछे हटने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है। आपको मालूम होगा हमारे देश में ‘बेनामी संपत्ति’ का एक कानून है। यह कानून 1988 में बना था, लेकिन कभी भी न उसके नियम उपनियम बनें, उसको नोटिफाई भी नहीं किया, ऐसे ही वो ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। हमनें उसको निकाला है और बड़ा धार-धार ‘बेनामी संपत्ति’ का कानून हमने बनाया है। आने वाले दिनों में वो कानून भी अपना काम करेगा। देशहित के लिये, जनहित के लिये, जो भी करना पड़े, ये हमारी प्राथमिकता है।मोदी के मन की बात: कैशलेस कारोबार 300 प्रतिशत तक बढ़ा
कैशलेस सोसायटी बनाने के लिए देशवासियों में नई-नई उत्कंठा जागरुक होने से उत्साहित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने में खास जगह देते हुए कहा कि मुझे ये जान करके खुशी होती है कि देश में टेक्नोलॉजी का उपयोग कैसे करना, ई-पेमेंट कैसे करना, ऑन लाइन पेमेंट कैसे करना, इसकी जागरूकता बहुत तेजी से बढ़ रही है। खासकर ग्रामीण अंचल के लोग कुछ अधिक जानना चाहते हैं। पिछले कुछ ही दिनों मे कैशलेस कारोबार, बिना नगद का कारोबार, 200 से 300 प्रतिशत बढ़ा है। इसको बढ़ावा देने के लिये भारत सरकार ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। ये फैसला कितना बड़ा है इसका अंदाज तो व्यापारी बहुत अच्छी तरह लगा सकते हैं। जो व्यापारी डिजिटल लेन-देन करेंगे, अपने कारोबार में नगद के बजाय आन लाइन पेमेंट की पद्धति विकसित करेंगे, ऐसे व्यापारियों को आयकर मेंं छूट दे दी गई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था में, हमारी जीवन व्यवस्था में सूचना को क्षेत्र बहुत बड़ा है और ज्यादातर इन लोगों का मजदूरी का पैसा, काम का पैसा या पगार नकद में दिया जाता है और हमें पता है, उसके कारण मजदूरों का शोषण भी होता है। 100 रूपए मिलने चाहिये तो 80 मिलते हैं, 80 मिलने चाहिये तो 50 मिलते हैं और इंश्योरेंस जैसे स्वास्थ्य क्षेत्र की दृष्टि से अन्य कई सुविधाएँ होती हैं उससे वो वंचित रह जाते हैं लेकिन अब कैशलतेस पेमेंट हो रहा है। सीधा पैसा बैंक में जमा हो रहा है। एक प्रकार से यह क्षेत्र बदल रहा है और शोषण बंद हो रहा है,। कमीशन देना पड़ता था वह अब बंद हो रहा है। मजदूर को, कारीगर को, ऐसे गरीब व्यक्ति को पूरे पैसे मिलना संभव हुआ है। साथ-साथ अन्य जो लाभ मिलते हैं वे लाभ का भी वो हकदार बन रहा है। हमारा देश तो सर्वाधिक युवाओं वाला देश है। टेक्नोलॉजी में सहज साध्य है। भारत जैसे देश ने तो इस क्षेत्र में सबसे आगे होना चाहिये। हमारे नौजवानों ने स्टार्ट अप से काफी प्रगति की है। ये डिजिटल मूवमेंट एक सुनहरा अवसर है हमारे नौजवान नये-नये एप्स के साथ, नयी-नयी टेक्नोलॉजी के साथ, नयी-नयी पद्धति के साथ इस क्षेत्र को जितना बल दे सकते हैं देना चाहिये, लेकिन देश को काले धन से, भ्रष्टाचार से मुक्त कराने के अभियान में पूरी ताकत से हमें जुटना चाहिये।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था में, हमारी जीवन व्यवस्था में सूचना को क्षेत्र बहुत बड़ा है और ज्यादातर इन लोगों का मजदूरी का पैसा, काम का पैसा या पगार नकद में दिया जाता है और हमें पता है, उसके कारण मजदूरों का शोषण भी होता है। 100 रूपए मिलने चाहिये तो 80 मिलते हैं, 80 मिलने चाहिये तो 50 मिलते हैं और इंश्योरेंस जैसे स्वास्थ्य क्षेत्र की दृष्टि से अन्य कई सुविधाएँ होती हैं उससे वो वंचित रह जाते हैं लेकिन अब कैशलतेस पेमेंट हो रहा है। सीधा पैसा बैंक में जमा हो रहा है। एक प्रकार से यह क्षेत्र बदल रहा है और शोषण बंद हो रहा है,। कमीशन देना पड़ता था वह अब बंद हो रहा है। मजदूर को, कारीगर को, ऐसे गरीब व्यक्ति को पूरे पैसे मिलना संभव हुआ है। साथ-साथ अन्य जो लाभ मिलते हैं वे लाभ का भी वो हकदार बन रहा है। हमारा देश तो सर्वाधिक युवाओं वाला देश है। टेक्नोलॉजी में सहज साध्य है। भारत जैसे देश ने तो इस क्षेत्र में सबसे आगे होना चाहिये। हमारे नौजवानों ने स्टार्ट अप से काफी प्रगति की है। ये डिजिटल मूवमेंट एक सुनहरा अवसर है हमारे नौजवान नये-नये एप्स के साथ, नयी-नयी टेक्नोलॉजी के साथ, नयी-नयी पद्धति के साथ इस क्षेत्र को जितना बल दे सकते हैं देना चाहिये, लेकिन देश को काले धन से, भ्रष्टाचार से मुक्त कराने के अभियान में पूरी ताकत से हमें जुटना चाहिये।
मोदी के मन की बात:नोट बंदी में कैसी-कैसी अफवाहें उड़ाईं गई
नमक के लिए दंगे करा दिए, पर जनता उकसावे में नहीं आई
जनता जनार्दन की ओर से मिले फीडबैक और सुझाव व सलाह वाले पत्रों को प्राथमिकता देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कहना है कि मैं हर महीने ‘मन की बात’ के पहले लोगों से आग्रह करता हूँ कि आप मुझे अपने सुझाव दीजिये, अपने विचार बताइए और हजारों की तादाद में रू4त्रश1 पर और हृड्डह्म्द्गठ्ठस्रह्म्ड्डरूशस्रद्ब्रश्चश्च पर इस बार जो सुझाव आये, मैं कह सकता हूँ 80-90 प्रतिशत सुझाव भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ की लड़ाई के संबंध में आये, नोटबंदी की चर्चा आयी। इन सारी चीजों को जब मैंने देखा कि कुछ लोगों ने जो मुझे लिखा है, उसमें नागरिकों को कैसी-कैसी कठिनाइयाँ हो रही है, कैसी असुविधायें हो रही हैं। इसके संबंध में विस्तार से लिखा है। लिखने वालों का दूसरा तबका वो है जिन्होंने ज्यादातर उन बातों पर बल दिया है कि इतना अच्छा काम, देश की भलाई का काम, इतना पवित्र काम, लेकिन उसके बावजूद भी कहाँ-कहाँ कैसी-कैसी धांधली हो रही है, किस प्रकार से बेईमानी के नये-नये रास्ते खोजे जा रहे हैं, इसका भी जिक्र लोगों ने किया है। और तीसरा वो तबका है जिन्होंने जो हुआ है, उसका तो समर्थन किया है लेकिन साथ-साथ ये लड़ाई आगे बढऩी चाहिये। भ्रष्टाचार, काला धन पूर्णत: नष्ट होना चाहिये, इसके लिए और कठोर कदम उठाने चाहिये तो उठाने चाहिये, ऐसा बड़ा ही बल दे करके लिखने वाले लोग भी हैं। प्रधानमंत्री ने देशवासियों का आभारी जताया कि उन्होंने इतनी सारी चि_ियाँ लिख करके सरकार की मदद की है। श्रीमान गुरुमणि केवल ने लिखा है काले धन पर लगाम लगाने का ये कदम प्रशंसा के योग्य है। हम नागरिकों को परेशानी हो रही है, लेकिन हम सब भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे हैं और इस लड़ाई में हम जो सहयोग दे रहे हैं, उससे हम खुश हैं। हम भ्रष्टाचार, काला धन इत्यादि के खिलाफ सेना की तरह लड़ रहे हैं। इस पत्र में जो बात लिखी है देश के हर कोने में से यही भावना उजागर हो रही है। हम सब इसको अनुभव कर रहे हैं। लेकिन ये बात सही है जब जनता कष्ट झेलती है, तकलीफ झेलती है तो कौन इंसान होगा जिसको पीड़ा न होती हो। जितनी पीड़ा आपको होती है, उतनी ही पीड़ा मुझे भी होती है। लेकिन एक उत्तम ध्येय के लिये, एक उच्च इरादे को पार करने के लिये, साफ नीयत के साथ जब काम होता है तो ये कष्ट के बीच, दुख के बीच, पीड़ा के बीच भी देशवासी हिम्मत के साथ डटे रहते हैं। ये लोग ही असल में बदलाव के पुरोधा हैं। मैं लोगों को एक और कारण के लिये भी धन्यवाद देता हूँ कि उन्होंने न केवल परेशानियाँ उठाई हैं, बल्कि उन चुनिन्दा लोगों को करारा जवाब भी दिया है, जो जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। कितनी सारी अफवाहें फैलाईं गई। भ्रष्टाचार और काले धन जैसी लड़ाई को भी साम्प्रदायिकता के रंग से रंगने का भी कितना प्रयास किया गया। किसी ने अफवाह फैलाई नोट पर लिखी स्पेलिंग गलत है, किसी ने कह दिया नमक का दाम बढ़ गया है, किसी ने अफवाह चला दी 2000 के नोट भी जाने वाली है, 500 और 100 के भी जाने वाली है, ये भी फिर से जाने वाला है, लेकिन मैंने देखा भाँति-भाँति अफवाहों के बावजूद भी देशवासियों के मन को कोई डुला नहीं सका है। इतना ही नहीं, कई लोग मैदान में आए, अपने बुद्धि शक्ति के द्वारा अफवाह फैलाने वालों को भी बेनकाब किया, अफवाहों को भी बेनकाब कर दिया और सत्य लाकर के खड़ा कर दिया।मोदी के मन की बात: ये है राज की बात
मन की बात में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नोटबंदी के निर्णय लागू होने के बाद रोज-रोज कालेधन वाले पकड़े जाने की खबरों के मिलने का राज साझा करते हुए बताते हैं कि आज आप लोग टी.वी. पर समाचार-पत्रों में देखते होंगे! रोज नये-नये लोग पकड़े जा रहे हैं! नोटें पकड़ेे जा रहे हैं! छापे मारे जा रहे है! अच्छे-अच्छे लोग पकड़े जा रहे हैं। ये कैसे संभव हुआ है? मैं सीक्रट बता दूँ। सीक्रेट यह है कि जानकारियाँ मुझे लोगों की तरफ से मिल रही हैं। सरकारी व्यवस्था से जितनी जानकारी आती है उस से अनेक गुना ज्यादा सामान्य नागरिकों से जानकारियाँ आ रही हैं और ज्यादातर हमें सफलता मिल रही है वो जन-सामान्य की जागरूकता के कारण मिल रही है। कोई कल्पना कर सकता है - मेरे देश का जागरूक नागरिक ऐसे तत्वों को बेनकाब करने के लिए कितना जोखिम उठा रहा है और जो जानकारियाँ आ रही हैं उसमें ज्यादातर सफलता मिल रही है। मुझे विश्वास है कि सरकार ने इसके लिये जो एक ईमेल आईडी बनाई है जिस में इस प्रकार की खबरें देना चाहते हैं उनके लिए बनाया है। उस पर भी भेज सकते हो, माईगॉव पर भी भेज सकते हो। सरकार ऐसी सारी बुराइयों के साथ लडऩे के लिए प्रतिबद्ध है और जब आपका सहयोग है तो फिर लडऩा बहुत आसान है।
मोदी के मन की बात: रोज-रोज नियम क्यों बदले गए
जनता को तकलीफ न हो,बेईमान गलत फायदा न उठा सकें
नोटबंदी के दौरान अफवाहें फैलाकर और अपने कुत्सित इरादों से आम जनता को भडक़ाने वाले राजनीतिक दलों को आड़े हाथ लेते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि जो लोग खुल कर के भ्रष्टाचार और काले धन का समर्थन नहीं कर पाते हैं, वे सरकार की कमियाँ ढूंढने के लिए पूरी देर लगे रहते हैं। एक बात ये भी आती है बार-बार नियम क्यों बदलते हैं। ये सरकार जनता-जनार्दन के लिये है। जनता का लगातार फीडबैक लेने का प्रयास सरकार करती है। जनता-जनार्दन को कहाँ कठिनाई हो रही है! किस नियम के कारण दिक्कत आती है! उसका क्या रास्ता खोजा जा सकता है! हर पल सरकार एक सवेंदनशील सरकार होने के कारण जनता-जनार्दन की सुख-सुविधा को ध्यान में रखते हुए जितने भी नियम बदलने पड़ते हैं, ताकि लोगों की परेशानी कम हो। ईमानदारों की आड़ में दूसरा कोई उसका गलत लाभ न उठा सके। दूसरी तरफ, मैंने पहले ही दिन कहा था, 8 नवंबर को कहा था, ये लड़ाई असामान्य है। 70 साल से बेईमानी और भ्रष्टाचार के काले कारोबार में कैसी शक्तियाँ जुड़ी हुई है? उनकी ताकत कितनी है? ऐसे लोगों से मैंने जब मुकाबला करना ठान लिया है तो वे भी तो सरकार को पराजित करने के लिए रोज नये तरीके अपनाते हैं। जब वो नये तरीके अपनाते हैं तो हमें भी तो उसके काट के लिये नया तरीका अपनाना पड़ता है। तू डाल-डाल, तो मैं पात-पात, क्योंकि हमने तय किया है कि भ्रष्टाचारियों को, काले कारोबारों को, काले धन को, मिटाना है। दूसरी तरफ, कई लोगों के पत्र इस बात को लेकर के आए हैं जिसमें किस प्रकार की धाँधलियां हो रही हैं, किस प्रकार से नये-नये रास्ते खोजे जा रहे हैं इसकी चर्चा है।मोदी के मन की बात: राजनीतिक दलों को नहीं मिलेगी छूट
देश की सवा सौ करोड़ जनता जनार्दन के प्रति मुक्त कंठ से सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने अपनी मन की बात में कहा कि ये मैं हर पल अनुभव कर रहा हूँ। जब सवा-सौ करोड़ देशवासी आपके के साथ खड़े हों तब कुछ भी असंभव नहीं होता है और जनता जनार्दन ही तो ईश्वर का रूप होती है और जनता के आशीर्वाद, ईश्वर के ही आशीर्वाद बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि मैं देश की जनता को धन्यवाद देता हूँ कि भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ इस महायज्ञ में लोगों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं चाहता था कि सदन में भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ जो लड़ाई चल रही है राजनैतिक दलों के लिये भी व्यापक चर्चा हो। अगर सदन चला होता तो जरूर अच्छी चर्चा होती। जो लोग अफवाहें फैला रहे हैं कि राजनैतिक दलों को सब छूट-छाट है, ये गलत है। कानून सब के लिये समान होता है और कानून का पालन भी चाहे व्यक्ति हो, संगठन हो या राजनैतिक दल हो, हर किसी को कानून का पालन करना ही होता है और करना ही पड़ेगा।
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